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...तो कभी भी कांप सकती है तराई की धरती
अतुल अवस्थी/बहराइच
Updated Fri, 15 Apr 2016 11:17 PM IST
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भूकंप
- फोटो : file photo
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हिमालय की तलहटी में बसा बहराइच भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है। बहराइच के साथ तराई व आसपास के 22 जिले डेंजर जोन 4 में स्थित है। इसके चलते आए दिन भूकंप के झटके महसूस होते हैं। दो दिन पूर्व उत्तर भारत और नेपाल में भूकंप के झटके महसूस हुए। विशेषज्ञों की मानें तो तराई व इससे सटे नेपाल की धरती में निरंतर हलचल हो रही है। जो बड़े भूकंप की ओर इशारा कर रही हैं।
भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक खतरनाक डेंजर जोन चार में प्रदेश के बहराइच के अलावा श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बुलंदशहर, लखीमपुर, सीतापुर, फैजाबाद, बाराबंकी, देवरिया, गोरखपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सिद्धार्थनगर, अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली समेत 22 जिले शामिल हैं। वर्ष 2015 में आए भूकंप ने तराई के मकानों की नींव तक को हिला दिया था।
बहराइच में 13 मकान ढहे थे। 39 इमारतों में दरारें आ गई थीं। नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी। अभी साल भर नहीं बीते हैं। पुन: धरती डगमगाने लगी है। दो दिन पूर्व उत्तर भारत और नेपाल दिल्ली तक भूकंप से दहशत फैली। इससे तराई के लोग भी बीते साल के मंजर को याद कर सहम जाते हैं। प्रशासन की ओर से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
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गौरतलब हो कि जनपद में अधिकांश संख्या में ऐसी इमारतें हैं जो भूकंप के हल्के झटके सहने में भी नाकाम साबित हो सकती हैं। आपदा प्रबंधन विभाग शिविर का आयोजन कर भूकंप आदि आपदाओं से बचाव के उपाय अपनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर किनारा कस रहा है।
प्लेट टेक्नाटिक्स थ्योरी में छुपा है भूकंप का राज
किसान पीजी कॉलेज के प्राचार्य व भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि शोध रिपोर्टों के मुताबिक वर्तमान समय में जहां आज हिमालय पर्वत शृंखला है। वहां हजारों वर्ष पहले समुद्र अथवा घाटी थी। हिमालय की उत्पत्ति भी इन प्लेटों के टकराने का ही परिणाम माना जाता है। इस क्षेत्र में पुन: प्लेटों के टकराने की संभावना प्रबल है।
प्लेट टेक्नाटिक्स थ्योरी के अनुसार विश्व के सभी महाद्वीप व सागर सिलिका व एल्यूमिनियम की बनी सात प्लेटों के ऊपर स्थित हैं। ये प्लेटें पृथ्वी के गर्भ में मौजूद गर्म स्थिति में उबल रहे मैग्नीशियम व लोहे के ऊपर तैरती हैं। सदैव गतिशील अवस्था में रहने के कारण ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती रहती हैं। जब इन प्लेटों की सतह एक दूसरे से टकराती है तो भूकंप आते हैं।
भूकंप आने पर क्या करें
भूकंप के झटके महसूस होने पर हर संभव प्रयास करें कि घर से बाहर निकल कर मैदान में पहुंच जाएं। अगर यह संभव नहीं है तो मजबूत मेज के नीचे या लिंटर के नीचे खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करें। इससे जान बच सकती है।
08 रिएक्टर तीव्रता का भूकंप हो सकता घातक
वर्ष 2015 में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आए भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर पहले आए भूंकप से सर्वाधिक 7.9 रही। जबकि पूर्व में आए भूकंपों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 4.0 से कम रही है। विशेषज्ञों की माने तो धरती के अंदर प्लेटों के परिवर्तन की जो स्थिति है। उससे आगामी दिनों में 8.0 तीव्रता से अधिक के भूकंप के झटके से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक खतरनाक डेंजर जोन चार में प्रदेश के बहराइच के अलावा श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बुलंदशहर, लखीमपुर, सीतापुर, फैजाबाद, बाराबंकी, देवरिया, गोरखपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सिद्धार्थनगर, अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली समेत 22 जिले शामिल हैं। वर्ष 2015 में आए भूकंप ने तराई के मकानों की नींव तक को हिला दिया था।
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बहराइच में 13 मकान ढहे थे। 39 इमारतों में दरारें आ गई थीं। नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी। अभी साल भर नहीं बीते हैं। पुन: धरती डगमगाने लगी है। दो दिन पूर्व उत्तर भारत और नेपाल दिल्ली तक भूकंप से दहशत फैली। इससे तराई के लोग भी बीते साल के मंजर को याद कर सहम जाते हैं। प्रशासन की ओर से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
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गौरतलब हो कि जनपद में अधिकांश संख्या में ऐसी इमारतें हैं जो भूकंप के हल्के झटके सहने में भी नाकाम साबित हो सकती हैं। आपदा प्रबंधन विभाग शिविर का आयोजन कर भूकंप आदि आपदाओं से बचाव के उपाय अपनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर किनारा कस रहा है।
प्लेट टेक्नाटिक्स थ्योरी में छुपा है भूकंप का राज
किसान पीजी कॉलेज के प्राचार्य व भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि शोध रिपोर्टों के मुताबिक वर्तमान समय में जहां आज हिमालय पर्वत शृंखला है। वहां हजारों वर्ष पहले समुद्र अथवा घाटी थी। हिमालय की उत्पत्ति भी इन प्लेटों के टकराने का ही परिणाम माना जाता है। इस क्षेत्र में पुन: प्लेटों के टकराने की संभावना प्रबल है।
प्लेट टेक्नाटिक्स थ्योरी के अनुसार विश्व के सभी महाद्वीप व सागर सिलिका व एल्यूमिनियम की बनी सात प्लेटों के ऊपर स्थित हैं। ये प्लेटें पृथ्वी के गर्भ में मौजूद गर्म स्थिति में उबल रहे मैग्नीशियम व लोहे के ऊपर तैरती हैं। सदैव गतिशील अवस्था में रहने के कारण ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती रहती हैं। जब इन प्लेटों की सतह एक दूसरे से टकराती है तो भूकंप आते हैं।
भूकंप आने पर क्या करें
भूकंप के झटके महसूस होने पर हर संभव प्रयास करें कि घर से बाहर निकल कर मैदान में पहुंच जाएं। अगर यह संभव नहीं है तो मजबूत मेज के नीचे या लिंटर के नीचे खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करें। इससे जान बच सकती है।
08 रिएक्टर तीव्रता का भूकंप हो सकता घातक
वर्ष 2015 में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आए भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर पहले आए भूंकप से सर्वाधिक 7.9 रही। जबकि पूर्व में आए भूकंपों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 4.0 से कम रही है। विशेषज्ञों की माने तो धरती के अंदर प्लेटों के परिवर्तन की जो स्थिति है। उससे आगामी दिनों में 8.0 तीव्रता से अधिक के भूकंप के झटके से इंकार नहीं किया जा सकता है।