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ठंडक के साथ तराई में साइबेरियन पक्षियों की दस्तक
बहराइच/अमरउजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Nov 2015 10:35 PM IST
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तराई में ठंड की आहट के साथ ही साइबेरियन पक्षियों की भी दस्तक होने लगी है। नेपाल सीमा से सटे कतर्निया घाट के गेरुआ नदी व जंगल में स्थापित झीलों व सरोवरों में विदेशी मेहमानों के कलरव की गूंज सुनाई देने लगी है। इसके अलावा जिले के अन्य झील और तालाब भी साइबेरियन मेहमानों के कलरव से गुलजार होने लगे हैं। फरवरी माह तक यह साइबेरियन मेहमान भारत में प्रवास करेंगे।
तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। ठंड की शुरुआत होते ही साइबेरियन मेहमान तराई में दस्तक दे देते हैं। प्रतिवर्ष अक्तूबर माह के अंत से साइबेरियन मेहमानों की आमद शुरू हो जाती है।
लेकिन इस बार मौसम में देर से बदलाव होने के चलते नवंबर माह के प्रथम पखवारे में साइबेरियन मेहमानों ने तराई में दस्तक दी है। पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो फरवरी तक साइबेरियन पक्षी हिमालय की तराई में बसे क्षेत्र के सीमावर्ती तालाब और झीलों में प्रवास करते हैं।
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सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी बहराइच के कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट स्थित झीलों में समय बिताते हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यह साइबेरियन पक्षी पुन: हिमालय पारकर साइबेरिया का रुख कर लेते हैं।
चार महीने का यह प्रवास काल तराई के वातवरण को काफी खुशनुमा बनाता है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट में साइबेरियन पक्षियों की आमद हो गई है। कलरव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है।
यहां प्रवास करते हैं साइबेरियन मेहमान
कतर्नियाघाट के माहादेवा ताल झील, सेंट्रल स्टेट फार्म, लठौवा-कठौवा ताल झील, धर्मापुर झील, गायघाट स्थित सरयू तट, मजरा डैम, गिरिजापुरी बैराज, गेरुआ नदी के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट, चित्तौरा झील, पयागपुर का बघैल ताल झील।
हिमालय पार कर आती हैं 25 प्रजातियां
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के चेयरमैन भगवानदास लखमानी ने बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्रो में चार माह तक प्रवास करते हैं। इनमें लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, कामनकूट पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
शिकारियों की भी होती है नजर
चार माह के प्रवास पर आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर शिकारियों की भी नजर होती है। बड़े पैमाने पर शिकार होता है। इस मामले में डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित तालाब, झील व नदियों में प्रवास करने वाले पक्षियों की सुरक्षा के लिए सभी रेंजों के वन दरोगा व वन रक्षकों को अलर्ट कर दिया गया है।
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तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। ठंड की शुरुआत होते ही साइबेरियन मेहमान तराई में दस्तक दे देते हैं। प्रतिवर्ष अक्तूबर माह के अंत से साइबेरियन मेहमानों की आमद शुरू हो जाती है।
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लेकिन इस बार मौसम में देर से बदलाव होने के चलते नवंबर माह के प्रथम पखवारे में साइबेरियन मेहमानों ने तराई में दस्तक दी है। पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो फरवरी तक साइबेरियन पक्षी हिमालय की तराई में बसे क्षेत्र के सीमावर्ती तालाब और झीलों में प्रवास करते हैं।
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सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी बहराइच के कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट स्थित झीलों में समय बिताते हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यह साइबेरियन पक्षी पुन: हिमालय पारकर साइबेरिया का रुख कर लेते हैं।
चार महीने का यह प्रवास काल तराई के वातवरण को काफी खुशनुमा बनाता है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट में साइबेरियन पक्षियों की आमद हो गई है। कलरव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है।
यहां प्रवास करते हैं साइबेरियन मेहमान
कतर्नियाघाट के माहादेवा ताल झील, सेंट्रल स्टेट फार्म, लठौवा-कठौवा ताल झील, धर्मापुर झील, गायघाट स्थित सरयू तट, मजरा डैम, गिरिजापुरी बैराज, गेरुआ नदी के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट, चित्तौरा झील, पयागपुर का बघैल ताल झील।
हिमालय पार कर आती हैं 25 प्रजातियां
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के चेयरमैन भगवानदास लखमानी ने बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्रो में चार माह तक प्रवास करते हैं। इनमें लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, कामनकूट पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
शिकारियों की भी होती है नजर
चार माह के प्रवास पर आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर शिकारियों की भी नजर होती है। बड़े पैमाने पर शिकार होता है। इस मामले में डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित तालाब, झील व नदियों में प्रवास करने वाले पक्षियों की सुरक्षा के लिए सभी रेंजों के वन दरोगा व वन रक्षकों को अलर्ट कर दिया गया है।