{"_id":"6a4fe4caeb39e2ef110a6d52","slug":"repairs-cost-115-crore-yet-the-minor-canal-remains-dry-bahraich-news-c-98-1-bhr1003-152794-2026-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: 1.15 करोड़ से हुई मरम्मत, फिर भी सूखी है माइनर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: 1.15 करोड़ से हुई मरम्मत, फिर भी सूखी है माइनर
विज्ञापन
सूखी पड़ी गजपतिपुर माइनर।
बौंडी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा 1.15 करोड़ रुपये की लागत से 10.300 किलोमीटर लंबी गजपतिपुर माइनर की मरम्मत का कार्य हुआ है। लेकिन माइनर किसानों के लिए निप्रयोज्य साबित हो रही है। विडंबना यह है कि जिस गांव के नाम पर यह माइनर है, उसी गजपतिपुर तक एक बूंद पानी भी नहीं पहुंच सका है।
विभागीय सूचना पट्ट के अनुसार इस परियोजना का कार्य 21 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ और 18 जून 2025 को पूरा किया गया। गजपतिपुर माइनर के किमी 0.000 से किमी 10.300 तक पुनरोद्धार एवं मरम्मत तथा नए पुलों का निर्माण कराया गया। इस पर 1.15 करोड़ खर्च हुए, यह कार्य मेसर्स एसके कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया गया।
विभाग का दावा था कि माइनर के चालू होने से तेजवापुर ब्लॉक के नहकटिया, चेतरा, यादवपुर, मोगलहा, सबलापुर, टिकोरा, हेमरिया, हुसेनपुर सहित दो दर्जन गांवों के करीब 19 हजार किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा और धान व गेहूं की पैदावार बढ़ेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विज्ञापन
गजपतिपुर के किसान रामसागर ने कहा, 20 साल बाद नहर दुरुस्त हुई और 115 लाख रुपये भी खर्च हुए, लेकिन हमारे गांव तक आज तक पानी नहीं पहुंचा। मोगलहा के किसान योगेंद्र मौर्य ने कहा, धान की रोपाई का समय निकल रहा है। नहर सूखी पड़ी है, इसलिए मजबूरी में महंगा डीजल जलाकर बोरिंग से सिंचाई करनी पड़ रही है। हेमरिया के किसान प्रेम कुमार का आरोप है कि अधिकारियों ने केवल फोटो खिंचवाकर औपचारिकता पूरी कर दी। अब नहर दोबारा घास-फूस और मिट्टी से पट गई है।
इस संबंध में अवर अभियंता गायत्री यादव ने बताया कि माइनर का हेड ऊंचाई पर स्थित है। ऐसी स्थिति में यदि मुख्य नहर में पानी का स्तर कम रहता है, तो माइनर तक पानी नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि जैसे ही मुख्य नहर में पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा, माइनर में भी तेजी से पानी आने लगेगा।
विज्ञापन
विभागीय सूचना पट्ट के अनुसार इस परियोजना का कार्य 21 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ और 18 जून 2025 को पूरा किया गया। गजपतिपुर माइनर के किमी 0.000 से किमी 10.300 तक पुनरोद्धार एवं मरम्मत तथा नए पुलों का निर्माण कराया गया। इस पर 1.15 करोड़ खर्च हुए, यह कार्य मेसर्स एसके कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया गया।
विज्ञापन
विभाग का दावा था कि माइनर के चालू होने से तेजवापुर ब्लॉक के नहकटिया, चेतरा, यादवपुर, मोगलहा, सबलापुर, टिकोरा, हेमरिया, हुसेनपुर सहित दो दर्जन गांवों के करीब 19 हजार किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा और धान व गेहूं की पैदावार बढ़ेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विज्ञापन
गजपतिपुर के किसान रामसागर ने कहा, 20 साल बाद नहर दुरुस्त हुई और 115 लाख रुपये भी खर्च हुए, लेकिन हमारे गांव तक आज तक पानी नहीं पहुंचा। मोगलहा के किसान योगेंद्र मौर्य ने कहा, धान की रोपाई का समय निकल रहा है। नहर सूखी पड़ी है, इसलिए मजबूरी में महंगा डीजल जलाकर बोरिंग से सिंचाई करनी पड़ रही है। हेमरिया के किसान प्रेम कुमार का आरोप है कि अधिकारियों ने केवल फोटो खिंचवाकर औपचारिकता पूरी कर दी। अब नहर दोबारा घास-फूस और मिट्टी से पट गई है।
इस संबंध में अवर अभियंता गायत्री यादव ने बताया कि माइनर का हेड ऊंचाई पर स्थित है। ऐसी स्थिति में यदि मुख्य नहर में पानी का स्तर कम रहता है, तो माइनर तक पानी नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि जैसे ही मुख्य नहर में पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा, माइनर में भी तेजी से पानी आने लगेगा।