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दीवानी न्यायालय में कवि सम्मेलन का आयोजन

Fri, 20 Sep 2019 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2019 10:27 PM IST
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Poet conference organized in civil court
बहराइच के दीवानी कचहरी परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्यपाठ करते कवि। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। अखिल भारतीय हिंदी विधि प्रतिष्ठान के तत्वावधान में शुक्रवार को दीवानी न्यायालय के सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर जनपद के कवियों व साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि दिवाकर मिश्रा दिवाकर ने की। कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश सुनील मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान रामसूरत वर्मा जलज ने मां का स्तवन पंदन करते हुये कहा कि हथवा से मथवा सवांर देतिव माई।
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इसके बाद उन्होंने पढ़ा, हमारी आन है हिंदी, हमारी शान है हिंदी। हमारे देश की गौरवमयी पहचान है हिंदी। रमाशंकर राही ने पढ़ा, गैरो सा जो दिखता था, सदियों से जो अपना था। कश्मीर हुआ अपना, अब पीओके भी हमारा है। बृजनंदन पांडेय ने पढ़ा, उमड़ घुमड़ नभ के बादल, चातक के मनमीत बन गये। जब-जब याद तुम्हारी याद आई, मेरे आंसू गीत बन गये।
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एसएमएस जैदी ने पढ़ा, क्यों न हर दिल में बने आज मकाने हिंदी, है मोहब्बत का फंसाना ये जबाने हिंदी। रंजीता देवी ने पढ़ा, साया जैसी साथ चली है मेरे, मेरी मां की दुआ, इसलिए सामने मेरे है मुश्किलें शर्मिंदा। अयोध्या प्रसाद शर्मा ने पढ़ा फूल हूं बसुंधरा का, धूल में निवास मेरा। कंटकों की आवाज पे मुधर मुस्काना है।

रायबरेली से आई कवियत्री शविस्ता बृजेश ने पढ़ा, कबीरा की जबां पे मुक्ति का शुचि सार है हिंदी, कभी तुलसी के मुख में भक्ति का उपहार है हिंदी। मगर बरदाई होठों पे यदि आ जाये ये भाषा, तो गोरी के लिए शुचि काल की तलवार है हिंदी। काव्यगोष्ठी में आशुतोष श्रीवास्तव, दिवकार मिश्रा दिवाकर, डा.राधेश्याम पांडेय, डॉ. मुबारक, रईस सिद्दकी आदि ने भी अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया।
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