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घने कोहरे व शीतलहर से दिनभर कांपते रहे लोग
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बहराइच नगर में शनिवार को कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े पहनकर जाते लोग।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। तराई में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शनिवार को शीतलहर व गलन से लोग कांप रहे हैं। तेज पछुआ हवा चलने से लोग घरों में ही दुबके रहे। वहीं, घने कोहरे के चलते परिवहन तथा रेल सेवाएं चरमरा गई हैं। हाड़कंपाती सर्दी में घर से निकलने वाले छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरी पेशा वर्ग के लोग भी ठंड से परेशान हैं। मौसम विज्ञान के मुताबिक शनिवार को बहराइच का न्यूनतम पारा दो डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जिसके चलते शनिवार इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा।
तराई मेें कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शनिवार को सुबह घने कोहरे के बीच दिनचर्या की शुरुआत हुई। सुबह लगा कि मौसम साफ होगा, लेकिन कोहरा नहीं खत्म हुआ। पछुआ हवाएं तेज गति से चलीं, जिसके चलते लोग घरों से निकलने से बचते रहे। हालांकि छात्र और मजदूरी पेशा वर्ग के जो लोग घर से निकले, वह गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। हर कोई अपने को ठंड से बचाने की जुगत में दिखा।
घने कोहरे के चलते सुबह से शाम तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। शीतलहर चलने से गलन बढ़ गई, जिससे दिन भर लोग कांपते रहे। कोहरे और धुंध के कारण परिवहन तथा रेल सेवाएं भी चरमराई रहीं। सुबह और रात्रिकालीन रेलगाड़ियां निर्धारित समय से 30 से 45 मिनट देसी से संचालित हुईं। इसका कारण घना कोहरा बताया जा रहा है। यही स्थिति परिवहन निगम की बसों की रही। फैजाबाद, लखनऊ, बलरामपुर, गोंडा, कानपुर रूट की बसें निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे देरी से बस अड्डा पहुंचीं।
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शीतलहर के चलते अधिकतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि पछुवा हवाएं पश्चिमोत्तर दिशा में तेज गति से चलीं, जिसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि आगामी तीन-चार दिन तक तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।
कांपते हुए स्कूल पहुंचे छात्र
कड़ाके की ठंड के चलते जिले के सभी विद्यालयों को 28 दिसंबर तक बंद कर दिया गया। शनिवार को कक्षा नौ से उच्च स्तर तक के सभी विद्यालय खुल गए। इस पर घर से निकले छात्र कांपते हुए स्कूलों को पहुंचे।
नहीं दिखे अलाव, ठिठुरते रहे राहगीर
जिला अस्पताल, रोडवेज व रेलवे स्टेशन तथा अन्य प्रमुख चौक चौराहों पर जिला प्रशासन ने अलाव जलवाने का दावा किया था, लेकिन कहीं भी अलाव जलते नहीं दिखे। सिहरते और कांपते हुए राहगीर गंतव्य की ओर जाने को मजबूर हैं।
निरीक्षण कर करेंगे कार्रवाई
अलाव जलने वाले स्थान का वह स्वयं निरीक्षण करेंगे। अगर कहीं पर अलाव जलता नहीं मिला तो क्षेत्रीय राजस्व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण अंचलों में भी अलाव जलवाने के निर्देश दिये गये हैं।
- जयचंद्र पांडेय, अपर जिलाधिकारी
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तराई मेें कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शनिवार को सुबह घने कोहरे के बीच दिनचर्या की शुरुआत हुई। सुबह लगा कि मौसम साफ होगा, लेकिन कोहरा नहीं खत्म हुआ। पछुआ हवाएं तेज गति से चलीं, जिसके चलते लोग घरों से निकलने से बचते रहे। हालांकि छात्र और मजदूरी पेशा वर्ग के जो लोग घर से निकले, वह गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। हर कोई अपने को ठंड से बचाने की जुगत में दिखा।
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घने कोहरे के चलते सुबह से शाम तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। शीतलहर चलने से गलन बढ़ गई, जिससे दिन भर लोग कांपते रहे। कोहरे और धुंध के कारण परिवहन तथा रेल सेवाएं भी चरमराई रहीं। सुबह और रात्रिकालीन रेलगाड़ियां निर्धारित समय से 30 से 45 मिनट देसी से संचालित हुईं। इसका कारण घना कोहरा बताया जा रहा है। यही स्थिति परिवहन निगम की बसों की रही। फैजाबाद, लखनऊ, बलरामपुर, गोंडा, कानपुर रूट की बसें निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे देरी से बस अड्डा पहुंचीं।
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शीतलहर के चलते अधिकतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि पछुवा हवाएं पश्चिमोत्तर दिशा में तेज गति से चलीं, जिसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि आगामी तीन-चार दिन तक तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।
कांपते हुए स्कूल पहुंचे छात्र
कड़ाके की ठंड के चलते जिले के सभी विद्यालयों को 28 दिसंबर तक बंद कर दिया गया। शनिवार को कक्षा नौ से उच्च स्तर तक के सभी विद्यालय खुल गए। इस पर घर से निकले छात्र कांपते हुए स्कूलों को पहुंचे।
नहीं दिखे अलाव, ठिठुरते रहे राहगीर
जिला अस्पताल, रोडवेज व रेलवे स्टेशन तथा अन्य प्रमुख चौक चौराहों पर जिला प्रशासन ने अलाव जलवाने का दावा किया था, लेकिन कहीं भी अलाव जलते नहीं दिखे। सिहरते और कांपते हुए राहगीर गंतव्य की ओर जाने को मजबूर हैं।
निरीक्षण कर करेंगे कार्रवाई
अलाव जलने वाले स्थान का वह स्वयं निरीक्षण करेंगे। अगर कहीं पर अलाव जलता नहीं मिला तो क्षेत्रीय राजस्व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण अंचलों में भी अलाव जलवाने के निर्देश दिये गये हैं।
- जयचंद्र पांडेय, अपर जिलाधिकारी