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जिला अस्पताल में मरीज की मौत, डॉक्टरों से हाथापाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Aug 2016 11:25 PM IST
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अस्पताल में हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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उल्टी और पेट दर्द की शिकायत पर एक युवक को शनिवार भोर में परिवारीजन जिला अस्पताल ले गए जहां सर्पदंश की बात कहकर डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया। परिवारीजनों ने उसे भर्ती नहीं कराया और झाड़फूंक कराने चले गए। कुछ देर बाद फिर अस्पताल लाए लेकिन युवक की मौत हो चुकी थी।
इसके बाद परिवारीजनों ने गलत इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप मढ़ते हुए अस्पताल में हंगामा किया। डॉक्टर व कर्मचारियों से हाथापाई के साथ तोड़फोड़ की। इससे नाराज डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। सुरक्षा के मुद्दे पर आठ घंटे उपचार ठप रहा। डीएम के आश्वासन पर शाम चार बजे हड़ताल खत्म हो सकी।
शहर में मोहल्ला गुलाम अलीपुरा निवासी सूरज कश्यप (25) पुत्र राम आधार कश्यप को शनिवार तड़के करीब साढ़े चार बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत पर परिवारीजन जिला अस्पताल ले गए। इमरजेंसी में चिकित्साधिकारी डॉ. रिजवान खां ने परीक्षण के बाद सूरज को संदिग्ध सर्पदंश पीड़ित बताया।
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इंजेक्शन लगाया और भर्ती करने की बात कही। परिवारीजनों ने भर्ती कराने से इंकार करते हुए सूरज को झाड़ फूंक कराने ले गए। सुबह सात बजे के करीब पुन: सूरज को गंभीर हालत में परिवारीजन अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस पर परिवारीजन नाराज हो गए।
उनका कहना था कि सूरज को सर्प ने नहीं डसा था फिर भी उसे जहर का इंजेक्शन लगा दिया गया। इससे सूरज की मौत हुई। विरोध करने पर डॉ. रिजवान और कर्मचारियों के साथ भीड़ ने हाथापाई और अस्पताल में तोड़फोड़ की। सूचना पर एसपी सालिकराम वर्मा, एएसपी नगर दिनेश त्रिपाठी, एडीएम विद्याशंकर सिंह व अन्य अधिकारी अस्पताल पहुंचे। किसी तरह स्थिति को काबू में किया।
उधर मारपीट से नाराज चिकित्सक और कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा कर दी। इससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी गईं। मरीजों को काफी परेशान होना पड़ा। चिकित्सक अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे थे।
डीएम अभय कुमार से वार्ता में सुरक्षा का आश्वासन मिलने पर शाम चार बजे ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बहाल हुईं। एसपी ने बताया कि एक वज्र वाहन अस्पताल में सुरक्षा के लिहाज से लगाया गया है। कानूनगोपुरा चौकी के दो सिपाहियों की भी नियमित ड्यूटी रहेगी।
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इसके बाद परिवारीजनों ने गलत इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप मढ़ते हुए अस्पताल में हंगामा किया। डॉक्टर व कर्मचारियों से हाथापाई के साथ तोड़फोड़ की। इससे नाराज डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। सुरक्षा के मुद्दे पर आठ घंटे उपचार ठप रहा। डीएम के आश्वासन पर शाम चार बजे हड़ताल खत्म हो सकी।
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शहर में मोहल्ला गुलाम अलीपुरा निवासी सूरज कश्यप (25) पुत्र राम आधार कश्यप को शनिवार तड़के करीब साढ़े चार बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत पर परिवारीजन जिला अस्पताल ले गए। इमरजेंसी में चिकित्साधिकारी डॉ. रिजवान खां ने परीक्षण के बाद सूरज को संदिग्ध सर्पदंश पीड़ित बताया।
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इंजेक्शन लगाया और भर्ती करने की बात कही। परिवारीजनों ने भर्ती कराने से इंकार करते हुए सूरज को झाड़ फूंक कराने ले गए। सुबह सात बजे के करीब पुन: सूरज को गंभीर हालत में परिवारीजन अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस पर परिवारीजन नाराज हो गए।
उनका कहना था कि सूरज को सर्प ने नहीं डसा था फिर भी उसे जहर का इंजेक्शन लगा दिया गया। इससे सूरज की मौत हुई। विरोध करने पर डॉ. रिजवान और कर्मचारियों के साथ भीड़ ने हाथापाई और अस्पताल में तोड़फोड़ की। सूचना पर एसपी सालिकराम वर्मा, एएसपी नगर दिनेश त्रिपाठी, एडीएम विद्याशंकर सिंह व अन्य अधिकारी अस्पताल पहुंचे। किसी तरह स्थिति को काबू में किया।
उधर मारपीट से नाराज चिकित्सक और कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा कर दी। इससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी गईं। मरीजों को काफी परेशान होना पड़ा। चिकित्सक अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे थे।
डीएम अभय कुमार से वार्ता में सुरक्षा का आश्वासन मिलने पर शाम चार बजे ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बहाल हुईं। एसपी ने बताया कि एक वज्र वाहन अस्पताल में सुरक्षा के लिहाज से लगाया गया है। कानूनगोपुरा चौकी के दो सिपाहियों की भी नियमित ड्यूटी रहेगी।