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मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू जांच की नहीं सुविधा
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बहराइच। तराई में संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसमें डेंगू समेत विभिन्न कारणों से आने वाले बुखार के मरीजों की संख्या में दिनों दिन इजाफा हो रहा है। नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इस पर रोक लगाने के लिए मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। आधी अधूरी तैयारियों के बीच रोगों पर अंकुश लगाने की कवायद के दावे किए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विभाग की ओर से स्वाइल फ्लू से संदिग्ध मरीज मिलने पर जांच लखनऊ से कराने की बात कही जा रही है।
जनपद के कैसरगंज, नानपारा, रुपईडीहा तहसील समेत अन्य स्थानों पर संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में बीते लगभग एक माह से वृद्धि हो रही है। मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार से पीड़ित मरीजों के आने पर उनकी डेंगू समेत अन्य जांचें कराई जा रही हैं।
बीते एक माह में लगभग एक दर्जन से अधिक मरीजों में डेंगू की पुष्टि भी हो चुकी है। रिसिया में एक युवक की डेंगू से मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहा है। डेंगू के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का वार्ड आरक्षित कर पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में निवासरत पीड़ितों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या लखनऊ स्थित निजी नर्सिंग होमों की शरण लेेनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज परिसर में भी भीषण गंदगी व्याप्त होने से चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों के भी रोगग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है।
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सीएचसी पर बढ़ाई गई सुविधा
जिला स्वास्थ्य एवं शिक्षा सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि डेंगू समेत अन्य बुखार से पीड़ित मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कैसरगंज, फखरपुर, मोतीपुर, शिवपुर, पयागपुर, हुजूरपुर, नानपारा, महसी व नवाबगंज स्थित सीएचसी पर भी 10-10 बेड के वार्ड आरक्षित कर दिए गए हैं। जिससे सभी को इलाज की सुविधा मिल सके।
निगेटिव आई हैं सभी रिपोर्ट
चिकनगुनिया से पीड़ित होने की संभावना पर 285 लोगों की एलाइजा व रैपिड जांच कराई गई है। सभी मरीजों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव मिली है। स्वाइन फ्लू का अभी कोई मरीज नहीं मिला है। स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर मरीज का सैंपल लखनऊ भेजकर जांच कराई जाएगी। -डॉ.ओपी चौधरी, सीएमएस।
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जनपद के कैसरगंज, नानपारा, रुपईडीहा तहसील समेत अन्य स्थानों पर संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में बीते लगभग एक माह से वृद्धि हो रही है। मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार से पीड़ित मरीजों के आने पर उनकी डेंगू समेत अन्य जांचें कराई जा रही हैं।
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बीते एक माह में लगभग एक दर्जन से अधिक मरीजों में डेंगू की पुष्टि भी हो चुकी है। रिसिया में एक युवक की डेंगू से मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहा है। डेंगू के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का वार्ड आरक्षित कर पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में निवासरत पीड़ितों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या लखनऊ स्थित निजी नर्सिंग होमों की शरण लेेनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज परिसर में भी भीषण गंदगी व्याप्त होने से चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों के भी रोगग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है।
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सीएचसी पर बढ़ाई गई सुविधा
जिला स्वास्थ्य एवं शिक्षा सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि डेंगू समेत अन्य बुखार से पीड़ित मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कैसरगंज, फखरपुर, मोतीपुर, शिवपुर, पयागपुर, हुजूरपुर, नानपारा, महसी व नवाबगंज स्थित सीएचसी पर भी 10-10 बेड के वार्ड आरक्षित कर दिए गए हैं। जिससे सभी को इलाज की सुविधा मिल सके।
निगेटिव आई हैं सभी रिपोर्ट
चिकनगुनिया से पीड़ित होने की संभावना पर 285 लोगों की एलाइजा व रैपिड जांच कराई गई है। सभी मरीजों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव मिली है। स्वाइन फ्लू का अभी कोई मरीज नहीं मिला है। स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर मरीज का सैंपल लखनऊ भेजकर जांच कराई जाएगी। -डॉ.ओपी चौधरी, सीएमएस।