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उर्स मुबारक पर दरगाह शरीफ में हुआ नातिया मुशायरा
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बहराइच में सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर चल रहे उर्स के मौके काव्य पाठ करते कवि।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। हजरत सैय्यद सालार मसूद गाजी के उर्स-ए-मुबारक के मौके पर देर शाम नाल दरवाजा के सामने नातिया मुशायरा आयोजित हुआ। जिसकी अध्यक्षता शायर सैय्यद मुबस्सीर हुसैन असर बहराइची ने की और संचालन गुलाम अली शाह ने किया। मुशायरा देर रात तक चलता रहा। नाल दरवाजे की सजावट ने लोगों को काफी आकर्षित किया।
दरगाह प्रबंध समिति के सदस्य मकसूद अहमद रायनी के संयोजकत्व में आयोजित नातिया मुशायरे में स्थानीय व बाहरी शायरों ने नात व मनकबत का नजराना पेश करते हुए हजरत सैय्यद सालार मसूद गाजी की शान में भी कई कलाम पेश किए। नातिया मुशायरे में असर बहराइची ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कि कल को यौमे नासूर है मेरा सामना भी जरूर है। मेरी बेकसी मेरे साथ चल मेरी आबरू का सवाल है। गुलाम अली शाह ने अपना कलाम पढ़ते हुए कहा कि वह अगर सिर्फ बशर है तो बता दे कोई अर्श के सीने पर यह नक्श कफ पाकिया है। इजहार शाहजहापुरी ने कहा कि नबी के चाहने वाले हैं बे शुमार मगरहर एक चाहने वाला बिलाल थोड़ी है।
शब्बीर मसूदी ने कहा कि क्यों अबरे करम बज्म पे यूं छाए हुए हैं क्या शहर ए मदीना से हुजूर आय हुए हैं। शहर बहराइची ने पढ़ा कि मैं क्यों ना चांद को देखूं कि जिसने देखा है तुम्हारा रौब। तारिक बहराईची ने कहा कि हर खास व आम की भर्ती हैं झोलियां गाजी मियां के उर्स का ये फैज आम है। इनके अलावा शायर रईस सिद्दीकी, मोहम्मद याकूब, अज्म गोंडवी, सगीर सिद्दीकी, शाने आलम मसूदी, राशिद राही, मजहर सईद, मंजूर, अहसान रजा, कौसर हस्सान, शौकत रजा, अकील अंजुम, डाक्टर मुबारक आदि शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। मुशायरे में प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैय्यद शमशाद अहमद, सदस्य दिलशाद अहमद, हाजी अजमत उल्ला, बच्चे भारती, वसीम मेकरानी के साथ बड़ी तादाद में जायरीन मौजूद रहे।
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दरगाह प्रबंध समिति के सदस्य मकसूद अहमद रायनी के संयोजकत्व में आयोजित नातिया मुशायरे में स्थानीय व बाहरी शायरों ने नात व मनकबत का नजराना पेश करते हुए हजरत सैय्यद सालार मसूद गाजी की शान में भी कई कलाम पेश किए। नातिया मुशायरे में असर बहराइची ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कि कल को यौमे नासूर है मेरा सामना भी जरूर है। मेरी बेकसी मेरे साथ चल मेरी आबरू का सवाल है। गुलाम अली शाह ने अपना कलाम पढ़ते हुए कहा कि वह अगर सिर्फ बशर है तो बता दे कोई अर्श के सीने पर यह नक्श कफ पाकिया है। इजहार शाहजहापुरी ने कहा कि नबी के चाहने वाले हैं बे शुमार मगरहर एक चाहने वाला बिलाल थोड़ी है।
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शब्बीर मसूदी ने कहा कि क्यों अबरे करम बज्म पे यूं छाए हुए हैं क्या शहर ए मदीना से हुजूर आय हुए हैं। शहर बहराइची ने पढ़ा कि मैं क्यों ना चांद को देखूं कि जिसने देखा है तुम्हारा रौब। तारिक बहराईची ने कहा कि हर खास व आम की भर्ती हैं झोलियां गाजी मियां के उर्स का ये फैज आम है। इनके अलावा शायर रईस सिद्दीकी, मोहम्मद याकूब, अज्म गोंडवी, सगीर सिद्दीकी, शाने आलम मसूदी, राशिद राही, मजहर सईद, मंजूर, अहसान रजा, कौसर हस्सान, शौकत रजा, अकील अंजुम, डाक्टर मुबारक आदि शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। मुशायरे में प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैय्यद शमशाद अहमद, सदस्य दिलशाद अहमद, हाजी अजमत उल्ला, बच्चे भारती, वसीम मेकरानी के साथ बड़ी तादाद में जायरीन मौजूद रहे।
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