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सोती नाला से निकल मवेशियों को निवाला बना रहा मगरमच्छ
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:10 PM IST
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मगरमच्छ
- फोटो : DEMO Pics
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सोती नाला के तट पर बसे रमतलिया खैरीगौढ़ी गांव के लोग दो दिन से दहशत की जिंदगी जी रहे हैं। अचानक सोती नाले में पहुंचा मगरमच्छ ग्रामीणों के मवेशियों को निवाला बना रहा है। अब तक तीन मवेशियों को मरगमच्छ निवाला बना चुका है। जिसके चलते दिन में भी गांव के लोग नाले की तरफ जाने से डरते हैं।
सूचना के बावजूद अब तक वनकर्मी नहीं पहुंचे हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंज अंतर्गत रमतलिया खैरीगौढ़ी गांव सोती नाला से 100 मीटर की दूरी पर है। गांव के लोग अपने मवेशियों को नाले में ही पानी पिलाते और नहलाते हैं।
रविवार दोपहर से एक मगरमच्छ ने इस कदर आतंक शुरू किया है कि ग्रामीणों की हिम्मत नाले की ओर जाने की नहीं पड़ती। रविवार दोपहर में गांव निवासी अशोक सोनी और नरायन निषाद के मवेशी नाले के तट पर घास चरने गए थे।
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इसी दौरान मगरमच्छ ने दोनों ग्रामीणों की बकरियों को निवाला बना लिया। सोमवार को गांव निवासी बदलू यादव के बछड़े को नाले के तट पर मगरमच्छ ने हमला कर निवाला बनाया। ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय पर सूचना दी। डीएफओ को मामले से अवगत कराया है।
लेकिन अभी तक कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि वनकर्मियों की टीम को भेजा जा रहा है। अगर जरूरत हुई तो मगरमच्छ को निकालकर घाघरा या गेरुआ नदी में छोड़ा जाएगा।
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सूचना के बावजूद अब तक वनकर्मी नहीं पहुंचे हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंज अंतर्गत रमतलिया खैरीगौढ़ी गांव सोती नाला से 100 मीटर की दूरी पर है। गांव के लोग अपने मवेशियों को नाले में ही पानी पिलाते और नहलाते हैं।
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रविवार दोपहर से एक मगरमच्छ ने इस कदर आतंक शुरू किया है कि ग्रामीणों की हिम्मत नाले की ओर जाने की नहीं पड़ती। रविवार दोपहर में गांव निवासी अशोक सोनी और नरायन निषाद के मवेशी नाले के तट पर घास चरने गए थे।
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इसी दौरान मगरमच्छ ने दोनों ग्रामीणों की बकरियों को निवाला बना लिया। सोमवार को गांव निवासी बदलू यादव के बछड़े को नाले के तट पर मगरमच्छ ने हमला कर निवाला बनाया। ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय पर सूचना दी। डीएफओ को मामले से अवगत कराया है।
लेकिन अभी तक कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि वनकर्मियों की टीम को भेजा जा रहा है। अगर जरूरत हुई तो मगरमच्छ को निकालकर घाघरा या गेरुआ नदी में छोड़ा जाएगा।