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राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासियों का कृषि मॉडल चयनित
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 13 Nov 2015 10:14 PM IST
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बहराइच। कठिन परिश्रम व मेहनत ही सफलता की कुंजी है। इसे सच कर दिखाया है मिहींपुरवा के सघन वन क्षेत्र के आदिवासी व वनवासियों ने।
स्वदेशी नुस्खों पर आधारित खेती की बदौलत इन आदिवासियों की आर्थिक दशा तो सुधरी ही, इनके कृषि मॉडल को आज सराहा भी जा रहा है।
खास बात यह है कि कृषि एवं आजीविका सुरक्षा के लिए पूरे देश से जिन तीन संस्थाओं के प्रोजेक्ट को चुना गया है, उनमें आदिवासियों की खाद्य सुरक्षा हेतु विकसित मॉडल भी एक है।
मुख्यमंत्री आवास में आज मंच-2015 कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री की पहल पर पूरे देश से कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, वैकल्पिक उर्जा, शिक्षा, रोजगार व आजीविका, स्वास्थ्य एवं पेयजल व स्वच्छता जैसे देश से कुल 22 मॉडल चुने गए हैं।
यह मॉडल स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विकसित किए गए हैं। कृषि एवं आजीविका सुरक्षा के लिए पूरे देश से जिन तीन संस्थाओं के प्रोजेक्ट मॉडल चुने गए हें, उनमें बहराइच की डेवलेपमेंट एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) द्वारा मिहींपुरवा क्षेत्र के थारू आदिवासी व वनवासियों की खाद्य सुरक्षा हेतु विकसित मॉडल भी एक है।
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कार्यक्रम में इस मॉडल पर व्यापक व क्रियान्वयन व प्रसार पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में 22 जिलों के डीएम, 15 प्रमुख सचिव व सभी मॉडल के कमिश्रर हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही प्रमुख कंपनियां भी होंगी।
देहात संस्था के प्रमुख कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि बहराइच जैसे पिछड़े क्षेत्र में संस्था द्वारा किए गए कार्य की प्रदेश स्तर पर स्वीकार्यता व प्रदेश सरकार द्वारा संज्ञान में लेना अपने आप में गौरव का विषय है। इसका श्रेय मॉडल के विकास में जुटे आदिवासी व टीम को जाता है।
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स्वदेशी नुस्खों पर आधारित खेती की बदौलत इन आदिवासियों की आर्थिक दशा तो सुधरी ही, इनके कृषि मॉडल को आज सराहा भी जा रहा है।
खास बात यह है कि कृषि एवं आजीविका सुरक्षा के लिए पूरे देश से जिन तीन संस्थाओं के प्रोजेक्ट को चुना गया है, उनमें आदिवासियों की खाद्य सुरक्षा हेतु विकसित मॉडल भी एक है।
मुख्यमंत्री आवास में आज मंच-2015 कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री की पहल पर पूरे देश से कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, वैकल्पिक उर्जा, शिक्षा, रोजगार व आजीविका, स्वास्थ्य एवं पेयजल व स्वच्छता जैसे देश से कुल 22 मॉडल चुने गए हैं।
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यह मॉडल स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विकसित किए गए हैं। कृषि एवं आजीविका सुरक्षा के लिए पूरे देश से जिन तीन संस्थाओं के प्रोजेक्ट मॉडल चुने गए हें, उनमें बहराइच की डेवलेपमेंट एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) द्वारा मिहींपुरवा क्षेत्र के थारू आदिवासी व वनवासियों की खाद्य सुरक्षा हेतु विकसित मॉडल भी एक है।
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कार्यक्रम में इस मॉडल पर व्यापक व क्रियान्वयन व प्रसार पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में 22 जिलों के डीएम, 15 प्रमुख सचिव व सभी मॉडल के कमिश्रर हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही प्रमुख कंपनियां भी होंगी।
देहात संस्था के प्रमुख कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि बहराइच जैसे पिछड़े क्षेत्र में संस्था द्वारा किए गए कार्य की प्रदेश स्तर पर स्वीकार्यता व प्रदेश सरकार द्वारा संज्ञान में लेना अपने आप में गौरव का विषय है। इसका श्रेय मॉडल के विकास में जुटे आदिवासी व टीम को जाता है।