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रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण में सहायक बनी मनरेगा
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बहराइच। करीब 15 वर्ष पहले शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना श्रमिकों को रोजगार देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक बन रही है। इस योजना के तहत कोविड-19 महामारी के दौरान रोजी-रोटी का संकट झेल रहे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही मनरेगा से ग्राम पंचायतवार लक्ष्य निर्धारित कर पौधरोपण कराया जा रहा है। पौधरोपण के लिए गड्डा खोदाई कार्य चल रहा है। इसकी निगरानी ब्लॉक व जिले स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।
लोगों को गांव में ही 100 दिन का रोजगार मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना शुरू की थी। इस योजना में कच्चे काम को वरीयता दी जाती है। कोविड-19 महामारी के चलते बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए भटक रहे थे। इन लोगों के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है। पर्यावरण संतुलन बनाने में भी इस योजना का अहम रोल है। महामारी के कारण उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों व लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में श्रमिक घर लौट चुके हैं। इन श्रमिकों को इस योजना में रोजगार से जोड़ा गया है। जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से 5801 कार्य शुरू कराकर एक लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। मिट्टी पटाई, तालाब खोदाई समेत अन्य कार्यों में श्रमिक लगाए गए हैं।
22 लाख से अधिक पौधे रोपने का है लक्ष्य
मनरेगा योजना से जिले में हरियाली लाने के लिए 22 लाख 60 हजार 20 पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए अब तक 9 लाख 2 हजार 136 गड्ढा खोदाई की जा चुकी है। गड्ढा खोदाई के लिए ब्लॉकवार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन गड्डों में वर्ष 2020-21 में बारिश के दौरान पौधरोपण किया जाएगा। पौधरोपण हो जाने से जिले में पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
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ब्लॉकवार गड्ढा खोदाई का लक्ष्य
पौधरोपण के लिए अधिकारियों की ओर से ब्लॉकवार गांवों में गड्ढा खोदाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें बलहा में 1 लाख 32 हजार 930 के सापेक्ष 46 हजार 345 गड्ढे, चित्तौरा में 1 लाख 87 हजार 180 के सापेक्ष 1 लाख 9 हजार 735, हुजूरपुर में 1 लाख 66 हजार 180 की जगह 1 लाख 36 हजार 56 गड्ढे खोदे जा चुके हैं। इसी तरह जरवल में 1 लाख 66 हजार 180 के सापेक्ष 65 हजार 800 कैसरगंज में 1 लाख 53 हजार 930 के सापेक्ष 27 हजार 600, महसी 1 लाख 50 हजार 180 के सापेक्ष 58 हजार 600, मिहींपुरवा में 1 लाख 80 हजार 180 के सापेक्ष 76 हजार 200, नवाबगंज में 1 लाख 52 हजार 180 के सापेक्ष 57 हजार गड्ढे खोदे जा चुके हैं। यही नहीं फखरपुर में 1 लाख 80 हजार 180 के सापेक्ष 36 हजार 200, पयागपुर में 1 लाख 55 हजार 680 के सापेक्ष 44 हजार 400, रिसिया में 1 लाख 59 हजार 180 के सापेक्ष 80 हजार 340, शिवपुर में 1 लाख 48 हजार 680 के स्थान पर 79 हजार 600, तेजवापुर में 1 लाख 57 हजार 430 के सापेक्ष 72 हजार 200, विशेश्वरगंज में 1 लाख 60 हजार 930 के सापेक्ष 12 हजार 60 गड्ढों की खोदाई की जा चुकी है।
वर्जन
प्रवासी श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने व पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में मनरेगा से अभियान चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत पौधरोपण भी कराया जाएगा इससे धरती हरी-भरी तो रहेगी ही। इसके साथ ही श्रमिकों को रोजगार भी मिल सकेगा। इसकी नियमित रूप से निगरानी की जा रही है।
- अनिल सिंह, उपायुक्त मनरेगा
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लोगों को गांव में ही 100 दिन का रोजगार मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना शुरू की थी। इस योजना में कच्चे काम को वरीयता दी जाती है। कोविड-19 महामारी के चलते बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए भटक रहे थे। इन लोगों के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है। पर्यावरण संतुलन बनाने में भी इस योजना का अहम रोल है। महामारी के कारण उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों व लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में श्रमिक घर लौट चुके हैं। इन श्रमिकों को इस योजना में रोजगार से जोड़ा गया है। जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से 5801 कार्य शुरू कराकर एक लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। मिट्टी पटाई, तालाब खोदाई समेत अन्य कार्यों में श्रमिक लगाए गए हैं।
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22 लाख से अधिक पौधे रोपने का है लक्ष्य
मनरेगा योजना से जिले में हरियाली लाने के लिए 22 लाख 60 हजार 20 पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए अब तक 9 लाख 2 हजार 136 गड्ढा खोदाई की जा चुकी है। गड्ढा खोदाई के लिए ब्लॉकवार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन गड्डों में वर्ष 2020-21 में बारिश के दौरान पौधरोपण किया जाएगा। पौधरोपण हो जाने से जिले में पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
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ब्लॉकवार गड्ढा खोदाई का लक्ष्य
पौधरोपण के लिए अधिकारियों की ओर से ब्लॉकवार गांवों में गड्ढा खोदाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें बलहा में 1 लाख 32 हजार 930 के सापेक्ष 46 हजार 345 गड्ढे, चित्तौरा में 1 लाख 87 हजार 180 के सापेक्ष 1 लाख 9 हजार 735, हुजूरपुर में 1 लाख 66 हजार 180 की जगह 1 लाख 36 हजार 56 गड्ढे खोदे जा चुके हैं। इसी तरह जरवल में 1 लाख 66 हजार 180 के सापेक्ष 65 हजार 800 कैसरगंज में 1 लाख 53 हजार 930 के सापेक्ष 27 हजार 600, महसी 1 लाख 50 हजार 180 के सापेक्ष 58 हजार 600, मिहींपुरवा में 1 लाख 80 हजार 180 के सापेक्ष 76 हजार 200, नवाबगंज में 1 लाख 52 हजार 180 के सापेक्ष 57 हजार गड्ढे खोदे जा चुके हैं। यही नहीं फखरपुर में 1 लाख 80 हजार 180 के सापेक्ष 36 हजार 200, पयागपुर में 1 लाख 55 हजार 680 के सापेक्ष 44 हजार 400, रिसिया में 1 लाख 59 हजार 180 के सापेक्ष 80 हजार 340, शिवपुर में 1 लाख 48 हजार 680 के स्थान पर 79 हजार 600, तेजवापुर में 1 लाख 57 हजार 430 के सापेक्ष 72 हजार 200, विशेश्वरगंज में 1 लाख 60 हजार 930 के सापेक्ष 12 हजार 60 गड्ढों की खोदाई की जा चुकी है।
वर्जन
प्रवासी श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने व पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में मनरेगा से अभियान चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत पौधरोपण भी कराया जाएगा इससे धरती हरी-भरी तो रहेगी ही। इसके साथ ही श्रमिकों को रोजगार भी मिल सकेगा। इसकी नियमित रूप से निगरानी की जा रही है।
- अनिल सिंह, उपायुक्त मनरेगा