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आज दवा कारोबारियों की हड़ताल, दवा के लिए पहुंचें जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 13 Oct 2015 09:50 PM IST
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बहराइच। आज का दिन लोगों के लिए मुसीबत भरा साबित हो सकता है। मरीजों की जान पर भी बन सकती है। कारण आज जिले भर में दवा की 1700 दुकानें बंद रहेंगी।
दवा कारोबारियों ने केंद्र सरकार द्वारा दवाओं की ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की तैयारी के विरोध में बंद का एलान किया है। कारोबारी दवा नीति में बदलाव के साथ दवा की रिटेल दुकान पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को लेकर भी समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पताल खुलें रहेंगे, जहां लोगों को दवाएं मिलेंगी।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शीतल प्रसाद अग्रवाल के मुताबिक बहराइच में दवा की कुल 1700 दुकानें हैं। इनमें 1100 फुटकर व 600 थोक विक्रेता हैं। उन्होंने कहा कि बताया कि बुधवार को सभी दवा की दुकानें बंद रहेंगी।
एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी नितिन बंसल का कहना है कि एक दिन दवा दुकानें बंद रहने से करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। इसके बावजूद ई-फार्मेसी पर रोक नहीं लगाई गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए दवा कारोबारियों को मजबूर होना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का ये फैसला मरीजों की जान के साथ ही दवा व्यापार पर भी विपरीत असर डालेगा। इसमें कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए डॉक्टर के लिखे गए पर्चे की स्कैन कॉपी से ऑर्डर प्लेस कर देगा और उसकी दवा घर पहुंच जाएगी।
इस नई व्यवस्था से दवाओं की कालाबाजारी तो बढ़ेगी ही उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। इससे नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ेगा। ऑनलाइन दवा बिक्री में बची दवा की वापसी संभव नहीं है जिसका सीधा नुकसान मरीजों को होगा। वहीं, दवा दुकानों पर काम करने वाले करोड़ों लोग बेरोजगार होंगे।
आज अस्पताल की व्यवस्थाओं पर करें भरोसा
दवा कारोबारियों के हड़ताल पर जाने से व मरीजों व उनके तीमारदारों को कठिनाई होगी। वहीं, कुछ कारोबारी मजबूरी का फायदा उठाकर दवाओं की कालाबाजारी भी कर सकते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भरोसा करना ज्यादा ठीक होगा। यहां इलाज के साथ दवाएं भी मिलेंगी।
खुलें रहेंगे अस्पताल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ केबी जैन का कहना है कि हड़ताल के देखते हुए दवाओं के संबंध में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पताल खुलें रहेंगे। यहां मरीजों का इलाज होगा और उन्हें दवाएं भी दी जाएंगी।
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दवा कारोबारियों ने केंद्र सरकार द्वारा दवाओं की ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की तैयारी के विरोध में बंद का एलान किया है। कारोबारी दवा नीति में बदलाव के साथ दवा की रिटेल दुकान पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को लेकर भी समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पताल खुलें रहेंगे, जहां लोगों को दवाएं मिलेंगी।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शीतल प्रसाद अग्रवाल के मुताबिक बहराइच में दवा की कुल 1700 दुकानें हैं। इनमें 1100 फुटकर व 600 थोक विक्रेता हैं। उन्होंने कहा कि बताया कि बुधवार को सभी दवा की दुकानें बंद रहेंगी।
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एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी नितिन बंसल का कहना है कि एक दिन दवा दुकानें बंद रहने से करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। इसके बावजूद ई-फार्मेसी पर रोक नहीं लगाई गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए दवा कारोबारियों को मजबूर होना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का ये फैसला मरीजों की जान के साथ ही दवा व्यापार पर भी विपरीत असर डालेगा। इसमें कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए डॉक्टर के लिखे गए पर्चे की स्कैन कॉपी से ऑर्डर प्लेस कर देगा और उसकी दवा घर पहुंच जाएगी।
इस नई व्यवस्था से दवाओं की कालाबाजारी तो बढ़ेगी ही उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। इससे नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ेगा। ऑनलाइन दवा बिक्री में बची दवा की वापसी संभव नहीं है जिसका सीधा नुकसान मरीजों को होगा। वहीं, दवा दुकानों पर काम करने वाले करोड़ों लोग बेरोजगार होंगे।
आज अस्पताल की व्यवस्थाओं पर करें भरोसा
दवा कारोबारियों के हड़ताल पर जाने से व मरीजों व उनके तीमारदारों को कठिनाई होगी। वहीं, कुछ कारोबारी मजबूरी का फायदा उठाकर दवाओं की कालाबाजारी भी कर सकते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भरोसा करना ज्यादा ठीक होगा। यहां इलाज के साथ दवाएं भी मिलेंगी।
खुलें रहेंगे अस्पताल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ केबी जैन का कहना है कि हड़ताल के देखते हुए दवाओं के संबंध में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पताल खुलें रहेंगे। यहां मरीजों का इलाज होगा और उन्हें दवाएं भी दी जाएंगी।