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वाहन की टक्कर से लेपर्ड कैट की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 14 Feb 2016 10:56 PM IST
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निशानगाड़ा रेंज में रविवार सुबह सड़क किनारे लेपर्ड कैट का शव मिला। तेंदुए का शावक होने की सूचना से वन विभाग में हड़कंप मच गया। हालांकि, वन विभाग की टीम ने जब शव का पोस्टमार्टम कराया तो उसके लेपर्ड कैट होने की पुष्टि हुई। पोस्टमार्टम में लेपर्ड कैट की मौत का कारण अज्ञात वाहन की टक्कर बताया गया है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग अंतर्गत निशानगाड़ा रेंज के किलोमीटर 37 के निकट एक लेपर्ड कैट का शव पड़ा मिला था। लेपर्ड कैट के मुंह से खून भी निकला था। लोगों ने तेंदुए का शावक होने की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी थी। डीएफओ आशीष तिवारी के निर्देश पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
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शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी गई। मिहींपुरवा के पशु चिकित्सक डॉ. आरसी वर्मा, सुजौली के डॉ. एएन कटियार और गायघाट के डॉ. संतोष कुमार सोनवानी की टीम ने निशानगाड़ा रेंज परिसर में शव का पोस्टमार्टम किया। इसमें उसके लेपर्ड कैट होने की पुष्टि हुई।
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डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि तेंदुए का शावक होने की सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची थी। लेपर्ड कैट की उम्र लगभग पांच माह थी। वह नर था। रेंजर गयादीन ने बताया कि वाहन को पकड़ने के संबंध में रेंज केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
...इसलिए लोग खा जाते हैं धोखा
डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि लेपर्ड कैट आम बिल्लियों की अपेक्षा काफी बड़ी होती है। ग्रामीण एक झटके में उसे देखकर धोखा खा जाते हैं। एकबार देखने में वह तेंदुए जैसे ही मालूम पड़ती है।
वाहनों की तेज रफ्तार पर नहीं लग रहा अंकुश
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग संरक्षित वन क्षेत्र घोषित है। इस क्षेत्र में वाहनों की रफ्तार कम रखने के संबंध में निर्देश भी जारी है। इसके बावजूद वन विभाग आदेशों का अनुपालन नहीं सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। इसके कारण आए दिन वन्यजीव तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं।