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मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी, मरीज बेहाल
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बहराइच। मेडिकल कॉलेज में मांग के अनुसार 296 प्रकार की दवाइयों की आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन इस समय महज 194 प्रकार की दवाएं ही मेडिकल कॉलेज में आई हैं। 102 प्रकार की दवा नहीं आ रही है। इसके साथ ही उल्टी, दस्त और जुकाम में दी जाने वाली दवाओं का भी टोटा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। मजबूरी में मरीजों को मेडिकल कॉलेज से बाहर की दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
जिला मुख्यालय पर स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज संचालित है। मेडिकल कॉलेज में जिले के साथ बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा व नेपाल के भी कुछ मरीज इलाज के लिए आते हैं। मेडिकल कॉलेज में 296 प्रकार की दवा सप्लाई की मांग है। इन दवाओं से विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीजों का इलाज किया जाता है। मरीजों को दवा अस्पताल में ही मिल जाती है, लेकिन इस समय कॉर्पोरेशन विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज में महज 194 प्रकार की दवाएं ही भेजी जा रही हैं। अस्पताल के भंडार गृह में 102 प्रकार की दवाओं की कमी है। कॉर्पोरेशन विभाग मांग के हिसाब से दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। ऐसे में दवाओं की कमी होने से साधारण रोग से ग्रसित मरीजों को भी दवा अस्पताल से नहीं मिल पाती है। मेडिकल कॉलेज में तैनात चिकित्सक मजबूरी में मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। मरीजों के तीमारदार मेडिकल स्टोर से बाहर की दवा खरीदकर मरीजों को खिलाते हैं। दवाओं की आपूर्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बच्चों को बुखार में पिलाया जाने वाला पैरासीटामॉल ड्रॉप भी मेडिकल कॉलेज में नहीं है। खुजली में प्रयोग होने वाला लोशन भी भंडार गृह में नहीं है। ऐसे में दूरदराज से आने वाले मरीज बाहर की दवा खरीदने को मजबूर हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन मरीजों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
इन दवाओं का टोटा
केटाडीन इंजेक्शन
पैरासीटामॉल ड्रॉप
खुजली का लोशन
इंजेक्शन विटामिन
कॉर्पोरेशन विभाग को लिखा गया है पत्र
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के हिसाब से दवाओं की आपूर्ति होती है। मांग के हिसाब से इस समय 102 प्रकार की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए लखनऊ कॉर्पोरेशन विभाग को पत्र लिखा गया है। कॉर्पोरेशन की ओर से ही दवाओं की सप्लाई की जाती है। जल्द ही कम दवाएं भी अस्पताल को मिल जाएंगी।
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डॉ. डीके सिंह, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
सर्जिकल की होती है लोकल खरीद
मेडिकल कॉलेज के स्टोर रूम के इंचार्ज डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सर्जिकल सामानों की कमी जब होती है तो उसकी खरीद लोकल परचेज में होती है, जिसमें काटन, पट्टी आदि शामिल हैं। इसका भुगतान मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से किया जाता है। इस समय कुछ कॉटन की कमी है, जिसे एक या दो दिन में खरीद लिया जाएगा।
अस्पताल से मिली आधी दवा
हुजूरपुर विकास खंड के चंदईपुर गांव निवासी नसीरुन अपने पुत्र का इलाज कराने मेडिकल कॉलेज आई हैं। नसीरुन ने बताया कि उनके पुत्र को पीलिया है। चिकित्सक ने आधी दवा अस्पताल की लिखी है, जबकि आधी दवा बाहर की लिखी है। बाहर की दवा लाकर बच्चे का इलाज करा रहे हैं। बलरामपुर जिले के ललिया थाना क्षेत्र निवासी मीना देवी ने बताया कि उसकी ननद की तबियत खराब है। वह इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आई है। अस्पताल से दवाइयां मिल गई हैं।
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जिला मुख्यालय पर स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज संचालित है। मेडिकल कॉलेज में जिले के साथ बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा व नेपाल के भी कुछ मरीज इलाज के लिए आते हैं। मेडिकल कॉलेज में 296 प्रकार की दवा सप्लाई की मांग है। इन दवाओं से विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीजों का इलाज किया जाता है। मरीजों को दवा अस्पताल में ही मिल जाती है, लेकिन इस समय कॉर्पोरेशन विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज में महज 194 प्रकार की दवाएं ही भेजी जा रही हैं। अस्पताल के भंडार गृह में 102 प्रकार की दवाओं की कमी है। कॉर्पोरेशन विभाग मांग के हिसाब से दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। ऐसे में दवाओं की कमी होने से साधारण रोग से ग्रसित मरीजों को भी दवा अस्पताल से नहीं मिल पाती है। मेडिकल कॉलेज में तैनात चिकित्सक मजबूरी में मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। मरीजों के तीमारदार मेडिकल स्टोर से बाहर की दवा खरीदकर मरीजों को खिलाते हैं। दवाओं की आपूर्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बच्चों को बुखार में पिलाया जाने वाला पैरासीटामॉल ड्रॉप भी मेडिकल कॉलेज में नहीं है। खुजली में प्रयोग होने वाला लोशन भी भंडार गृह में नहीं है। ऐसे में दूरदराज से आने वाले मरीज बाहर की दवा खरीदने को मजबूर हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन मरीजों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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इन दवाओं का टोटा
केटाडीन इंजेक्शन
पैरासीटामॉल ड्रॉप
खुजली का लोशन
इंजेक्शन विटामिन
कॉर्पोरेशन विभाग को लिखा गया है पत्र
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के हिसाब से दवाओं की आपूर्ति होती है। मांग के हिसाब से इस समय 102 प्रकार की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए लखनऊ कॉर्पोरेशन विभाग को पत्र लिखा गया है। कॉर्पोरेशन की ओर से ही दवाओं की सप्लाई की जाती है। जल्द ही कम दवाएं भी अस्पताल को मिल जाएंगी।
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डॉ. डीके सिंह, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
सर्जिकल की होती है लोकल खरीद
मेडिकल कॉलेज के स्टोर रूम के इंचार्ज डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सर्जिकल सामानों की कमी जब होती है तो उसकी खरीद लोकल परचेज में होती है, जिसमें काटन, पट्टी आदि शामिल हैं। इसका भुगतान मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से किया जाता है। इस समय कुछ कॉटन की कमी है, जिसे एक या दो दिन में खरीद लिया जाएगा।
अस्पताल से मिली आधी दवा
हुजूरपुर विकास खंड के चंदईपुर गांव निवासी नसीरुन अपने पुत्र का इलाज कराने मेडिकल कॉलेज आई हैं। नसीरुन ने बताया कि उनके पुत्र को पीलिया है। चिकित्सक ने आधी दवा अस्पताल की लिखी है, जबकि आधी दवा बाहर की लिखी है। बाहर की दवा लाकर बच्चे का इलाज करा रहे हैं। बलरामपुर जिले के ललिया थाना क्षेत्र निवासी मीना देवी ने बताया कि उसकी ननद की तबियत खराब है। वह इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आई है। अस्पताल से दवाइयां मिल गई हैं।