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घोड़ी में मिला ग्लैंडर्स वायरस, जहर का इंजेक्शन देकर मारा

Fri, 30 Aug 2019 10:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Aug 2019 10:03 PM IST
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Glanders virus found in mare, killed by injecting poison
जरवल में घोड़ी को ग्लैंडर्स बीमारी के कारण जहर का इंजेक्शन देकर मारते चिकित्सक। - फोटो : BAHRAICH
जरवल (बहराइच)। जरवल के सराय मोहल्ला निवासी एक व्यक्ति की घोड़ी को ग्लैंडर्स बीमारी हो गई थी। जांच के लिए उसका सीरम सिरसा हिसार भेजा गया। जांच रिपोर्ट में ग्लैंडर्स वायरस की पुष्टि होने पर चिकित्सकों ने घोड़ी को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद उसे जमीन में दफना दिया गया। इसके अलावा 12 अन्य घोड़ों की जांच में सीरम निगेटिव मिला।
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जरवल नगर पंचायत के मोहल्ला सराय निवासी इरफान पुत्र ईदू ने घोड़ी पाल रखी है। वह भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। उसने घोड़ी का नाम रेशमा रखा था। इस घोड़ी में ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण मिलने पर जरवल के पशु चिकित्साधिकारी ने सीरम जांच के लिए हिसार भेेजा था।
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जांच रिपोर्ट में घोड़ी में घातक ग्लैंडर्स बीमारी होने की पुष्टि हुई। इस पर चिकित्सकों की टीम ने घोड़ी को गुरुवार देर शाम खाली जगह ले जाकर जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इसके बाद उसे जमीन में दफना दिया गया।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2019 में दो माह पूर्व 85 घोड़ों की जांच के लिए सीरम हरियाणा भेजा गया। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र सिरसा हिसार में 12 सैंपल घोड़ों में पाजिटिव मिले थे। उन्हें भी मारा जा चुका है।
ऐसे में पशु मालिक बीमारी के फैलने की आशंका होने पर चिकित्सकों को तत्काल सूचित करें। उन्हें मुआवजा भी प्रदान किया जाता है। जिसमें घोड़ों के मारने पर 25 हजार रुपये व खच्चर को मारने पर 16000 हजार रुपये दिया जाता है।
अब तक 12 घोड़ों को उतारा जा चुका मौत के घाट
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि जरवल क्षेत्र में ग्लैंडर्स बीमारी का प्रकोप घोड़ों में अधिक हुआ है। यहां पर करीब एक साल के अंदर करीब 12 घोड़ों को बीमारी होने पर मारा जा चुका है।

बीमारी का नहीं है इलाज
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि ग्लैंडर्स की बीमारी का इलाज संभव नहीं है। इसके होने पर दूसरे जानवरों के होने के साथ ही मनुष्यों में भी फैलने का खतरा होता है। बीमारी सी ग्रसित घोड़े का रक्त लेकर हैदराबाद परीक्षण के लिए भेजा जाता है। रिपोर्ट के आधार पर ही मारने की कार्रवाई की जाती है।
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