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नेपाल में तेज बारिश से घाघरा उफनाई
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 04 Aug 2015 09:57 PM IST
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बहराइच। बहराइच। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के चलते घाघरा नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। मंगलवार शाम को नदी एल्गिन ब्रिज पर लाल निशान पार कर गई।
इस समय नदी खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है। उफनाई घाघरा नदी से तटवर्ती इलाकों में बसे गांव के लोग दहशत में आ गए हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई बचाव के उपाय नहीं किए गए हैं।
नेपाल में वर्षा के बाद गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पानी गिरिजापुरी बैराज के सहारे घाघरा में पहुंच गया है। बैराज के अवर अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि लगभग 1.24 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में चल रहा है।
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गिरिजापुरी बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण महसी के पास लगभग एक मीटर नदी के जलस्तर में सुबह से अब तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।
बौंडी में अभी नदी खतरे के निशान के काफी नजदीक है। वहीं एल्गिन ब्रिज पर नदी मंगलवार शाम बजे खतरे के निशान 106.07 मीटर को पार कर गई है।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश ने बताया कि एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। शाम सात बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.126 मीटर मापा गया।
जलस्तर बढ़ने से कैसरगंज का गड़रियनपुरवा गांव जहां नदी के निशाने पर आ गया है। वहीं, महसी में पिपरी, चुरईपुरवा गांव पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोग दहशत में हैं।
राजस्वकर्मियों को किया अलर्ट : एडीएम
अपर जिलाधिकारी विद्याशंकर सिंह का कहना है कि घाघरा के जलस्तर में मामूली बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय राजस्व कर्मियों को नदी की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को आवश्यकता पड़ने पर हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।
बाढ़ से निपटने के लिए बुलाई गई एनडीआरएफ
बहराइच। घाघरा नदी खतरे के निशान के पार हो गई है। इससे बाढ़ की आशंका से लोग सिहर उठे हैं। बाढञ की संभावना देखते हुए पटना से एनडीआरएफ के जवानों को बुला लिया गया है। इन सभी को महसी में ठहराया गया है। फ्लड पीएसी के जवान पहले से ही जिले में कैंप कर रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी व आपदा केंद्र प्रभारी विद्याशंकर सिंह ने बताया कि फिलहाल बाढ़ की संभावना नहीं है। लेकिन एहतियात के तौर पर तैयारियां मुकम्मल हैं।
पटना से एनडीआरएफ के 40 जवानों को मय संसाधन के बुलाया गया है। यह जवान बहराइच पहुंच गए हैं। उन्हें महसी तहसील कें बाढ़ प्रभावित इलाके में ठहराया गया है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ग्रामीणों को मदद पहुंचायी जा सके।
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इस समय नदी खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है। उफनाई घाघरा नदी से तटवर्ती इलाकों में बसे गांव के लोग दहशत में आ गए हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई बचाव के उपाय नहीं किए गए हैं।
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नेपाल में वर्षा के बाद गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पानी गिरिजापुरी बैराज के सहारे घाघरा में पहुंच गया है। बैराज के अवर अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि लगभग 1.24 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में चल रहा है।
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गिरिजापुरी बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण महसी के पास लगभग एक मीटर नदी के जलस्तर में सुबह से अब तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।
बौंडी में अभी नदी खतरे के निशान के काफी नजदीक है। वहीं एल्गिन ब्रिज पर नदी मंगलवार शाम बजे खतरे के निशान 106.07 मीटर को पार कर गई है।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश ने बताया कि एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। शाम सात बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.126 मीटर मापा गया।
जलस्तर बढ़ने से कैसरगंज का गड़रियनपुरवा गांव जहां नदी के निशाने पर आ गया है। वहीं, महसी में पिपरी, चुरईपुरवा गांव पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोग दहशत में हैं।
राजस्वकर्मियों को किया अलर्ट : एडीएम
अपर जिलाधिकारी विद्याशंकर सिंह का कहना है कि घाघरा के जलस्तर में मामूली बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय राजस्व कर्मियों को नदी की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को आवश्यकता पड़ने पर हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।
बाढ़ से निपटने के लिए बुलाई गई एनडीआरएफ
बहराइच। घाघरा नदी खतरे के निशान के पार हो गई है। इससे बाढ़ की आशंका से लोग सिहर उठे हैं। बाढञ की संभावना देखते हुए पटना से एनडीआरएफ के जवानों को बुला लिया गया है। इन सभी को महसी में ठहराया गया है। फ्लड पीएसी के जवान पहले से ही जिले में कैंप कर रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी व आपदा केंद्र प्रभारी विद्याशंकर सिंह ने बताया कि फिलहाल बाढ़ की संभावना नहीं है। लेकिन एहतियात के तौर पर तैयारियां मुकम्मल हैं।
पटना से एनडीआरएफ के 40 जवानों को मय संसाधन के बुलाया गया है। यह जवान बहराइच पहुंच गए हैं। उन्हें महसी तहसील कें बाढ़ प्रभावित इलाके में ठहराया गया है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ग्रामीणों को मदद पहुंचायी जा सके।