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चार मकान व 80 बीघा खेत नदी में समाए
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jul 2017 09:55 PM IST
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घाघरा नदी का जलस्तर शनिवार रात से कम होना शुरू हो गया है। इसके साथ ही नदी ने कटान तेज कर दी है। महसी में नदी की कटान में चार घर और 70 बीघा खेत समाहित हो गए। जरवलरोड में भी कटान तेज है।
फसल अनुसंधान केंद्र घाघराघाट के निकट आदमपुर-रेवली तटबंध से नदी महज पांच मीटर दूर है। यहां भी कटान तेज हो गई है। 10 बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। कटान होने की सूचना पर महसी और कैसरगंज के एसडीएम ने गांवों का जायजा लिया। बाढ़ चौकियों के कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है।
घाघरा नदी नेपाल में हो रही तेज बारिश के कारण शनिवार को उफना गई थी। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। महसी तहसील क्षेत्र के चार गांवों में पानी भर गया था। कायमपुर-जरमापुर मार्ग पर भी पानी चलने लगा था।
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लेकिन शनिवार रात से घाघरा नदी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। एल्गिन ब्रिज पर रविवार दोपहर घाघरा नदी का जलस्तर 106.006 दर्ज किया गया। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है।
नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में नदी की कटान तेज हो गई है। महसी तहसील के गोलागंज गांव में नदी की कटान गांव निवासी पृथ्वीराज, संतराम, किशनलाल व सुहाग के घर कट गए।
जबकि जरमापुर गांव निवासी मूसूद्दीन व असगर अली के घर के सामने का हिस्सा भी नदी में समाहित हो गया। गांव निवासी पृथ्वीराज, रामकुमार गुप्ता, कमलेश कुमार, असगर अली, मंशाराम, देशराज, राजकरन सिंह व लाल जी समेत अन्य ग्रामीणों की लगभग 70 बीघा कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो गई।
कटान की सूचना पर उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने गोलागंज गांव का निरीक्षण किया। एसडीएम ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी। जरवलरोड में घाघरा नदी फसल अनुसंधान केंद्र घाघराघाट के निकट आदमपुर-रेवली तटबंध से महज पांच मीटर दूरी पर है।
नदी की कटान भी तेज हो गई है। यहां गड़रियनपुरवा, सपसा दिकौलिया आदि गांवों में लगभग 10 बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। एसडीएम पंकज कुमार ने डाक बंगला और ग्राम सचिवालय में बनी बाढ़ चौकियों का जायजा लिया है। बाढ़ को देखते हुए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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फसल अनुसंधान केंद्र घाघराघाट के निकट आदमपुर-रेवली तटबंध से नदी महज पांच मीटर दूर है। यहां भी कटान तेज हो गई है। 10 बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। कटान होने की सूचना पर महसी और कैसरगंज के एसडीएम ने गांवों का जायजा लिया। बाढ़ चौकियों के कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है।
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घाघरा नदी नेपाल में हो रही तेज बारिश के कारण शनिवार को उफना गई थी। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। महसी तहसील क्षेत्र के चार गांवों में पानी भर गया था। कायमपुर-जरमापुर मार्ग पर भी पानी चलने लगा था।
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लेकिन शनिवार रात से घाघरा नदी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। एल्गिन ब्रिज पर रविवार दोपहर घाघरा नदी का जलस्तर 106.006 दर्ज किया गया। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है।
नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में नदी की कटान तेज हो गई है। महसी तहसील के गोलागंज गांव में नदी की कटान गांव निवासी पृथ्वीराज, संतराम, किशनलाल व सुहाग के घर कट गए।
जबकि जरमापुर गांव निवासी मूसूद्दीन व असगर अली के घर के सामने का हिस्सा भी नदी में समाहित हो गया। गांव निवासी पृथ्वीराज, रामकुमार गुप्ता, कमलेश कुमार, असगर अली, मंशाराम, देशराज, राजकरन सिंह व लाल जी समेत अन्य ग्रामीणों की लगभग 70 बीघा कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो गई।
कटान की सूचना पर उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने गोलागंज गांव का निरीक्षण किया। एसडीएम ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी। जरवलरोड में घाघरा नदी फसल अनुसंधान केंद्र घाघराघाट के निकट आदमपुर-रेवली तटबंध से महज पांच मीटर दूरी पर है।
नदी की कटान भी तेज हो गई है। यहां गड़रियनपुरवा, सपसा दिकौलिया आदि गांवों में लगभग 10 बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। एसडीएम पंकज कुमार ने डाक बंगला और ग्राम सचिवालय में बनी बाढ़ चौकियों का जायजा लिया है। बाढ़ को देखते हुए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।