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वन ग्रामीणों को दिलाएंगे हक
अमर उजाला/बहराइच
Updated Mon, 17 Apr 2017 11:56 PM IST
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सम्मेलन को संबोधित करते विधायक
- फोटो : अमर उजाला
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कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के गिरिजापुरी में स्थित देहात संस्था के कार्यालय परिसर में सोमवार को वनाधिकार सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस मौके पर वन ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा हुई। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बलहा विधायक ने लोगों को संबोधित करते हुए वन ग्रामीणों को उनका हक और अधिकार दिलाने का संकल्प लिया। बोले कि हर स्तर पर वन ग्रामीणों के हक की लड़ाई लड़ी जाएगी।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी परिक्षेत्र में अभी भी वनग्राम स्थापित हैं। लेकिन इन वन ग्रामीणों को अब तक उनके हक और अधिकार नहीं मिल सके हैं। इसी मामले को लेकर वनाधिकार सम्मेलन का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड ने शिरकत की।
इस मौके पर डेवलपमेंटल एसोसिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट के मुख्य कार्यकारी डॉ. जीतेंद्र चतुर्वेदी ने संबोधित करते हुए वन ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया। कहा कि मिहींपुरवा विकास खंड में सात वनग्रामों में निवास करने वाले लोग 12 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें गुलामी की जिंदगी बितानी पड़ रही है। उनकी जीवनशैली बदल नहीं सकी है।
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इस मौके पर वनाधिकार मंच के पदाधिकारियों ने भी समस्याएं बताईं। कहा कि सरकार ने अब तक आश्वासन तो दिए, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। वन ग्रामीणों का पग-पग पर उत्पीड़न हो रहा है। इस पर मुख्य अतिथि बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड ने वन ग्रामीणों के हक और अधिकार दिलाने का संकल्प लेते हुए कहा कि हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक पैरवी की जाएगी और समस्याआें का समाधान कराया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन भी बलहा विधायक को सौंपा गया।
इंसेट
वन ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-
- खारिज किए गए वनाधिकार दावों की हो सुनवाई।
- अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी वनाधिकार मान्यता अधिनियम हो लागू।
- वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिले।
- सामुदायिक वनाधिकारों का कानूनी सदुपयोग हो।
- वन ग्रामीणों को पक्के निर्माण करने की अनुमति मिले और राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी हो।
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कतर्नियाघाट सेंक्चुरी परिक्षेत्र में अभी भी वनग्राम स्थापित हैं। लेकिन इन वन ग्रामीणों को अब तक उनके हक और अधिकार नहीं मिल सके हैं। इसी मामले को लेकर वनाधिकार सम्मेलन का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड ने शिरकत की।
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इस मौके पर डेवलपमेंटल एसोसिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट के मुख्य कार्यकारी डॉ. जीतेंद्र चतुर्वेदी ने संबोधित करते हुए वन ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया। कहा कि मिहींपुरवा विकास खंड में सात वनग्रामों में निवास करने वाले लोग 12 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें गुलामी की जिंदगी बितानी पड़ रही है। उनकी जीवनशैली बदल नहीं सकी है।
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इस मौके पर वनाधिकार मंच के पदाधिकारियों ने भी समस्याएं बताईं। कहा कि सरकार ने अब तक आश्वासन तो दिए, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। वन ग्रामीणों का पग-पग पर उत्पीड़न हो रहा है। इस पर मुख्य अतिथि बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड ने वन ग्रामीणों के हक और अधिकार दिलाने का संकल्प लेते हुए कहा कि हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक पैरवी की जाएगी और समस्याआें का समाधान कराया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन भी बलहा विधायक को सौंपा गया।
इंसेट
वन ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-
- खारिज किए गए वनाधिकार दावों की हो सुनवाई।
- अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी वनाधिकार मान्यता अधिनियम हो लागू।
- वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिले।
- सामुदायिक वनाधिकारों का कानूनी सदुपयोग हो।
- वन ग्रामीणों को पक्के निर्माण करने की अनुमति मिले और राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी हो।