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Bahraich News: कुत्ते व सियार के हमले बढ़े, रोजाना 200 मरीज पहुंच रहे अस्पताल
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बहराइच मेडिकल कालेज में मरीज को एंटीरेबीज का टीका लगाते फॉर्मासिस्ट।
बहराइच। जिले में आवारा कुत्तों व सियार के हमले बढ़ गए हैं। जुलाई में प्रतिदिन करीब 200 लोग सरकारी व गैर सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उधर, शिवपुर ब्लाॅक में दो बच्चों की मौत का कारण बने खूनी कुत्ते फिर गांवों के आसपास दिखाई देने लगे हैं। इससे लोग भयभीत हो उठे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जून व जुलाई में प्रतिदिन सभी सीएचसी व मेडिकल कॉलेज को मिलाकर करीब 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें से 70 से 80 मरीज अकेले मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। ये वो मरीज हैं जिन्हें रेबीज इंजेक्शन के अलावा इलाज की भी जरूरत होती है। बाकी मरीज सीएचसी व पीएचसी पहुंच रहे हैं। सीएमएसडी के प्रभारी किशोर कुमार बताते हैं कि इस समय प्रति ब्लाॅक औसतन दो सौ वायल एंटी रेबीज इंजेक्शन जा रहा है। ऐसे में प्रति माह जिले में करीब 2800 वायल की जरूरत पड़ रही है।
बच्चों के लिए बढ़ा ज्यादा खतरा
शिवपुर ब्लॉक के मटेरा कला, सेमरियावा व कमहरिया में खूनी कुत्तों ने दो बच्चों को नोच कर मार डाला था। इसी के बाद डीएम के आदेश पर इन खूनी कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम लगाई गई थी, लेकिन टीम बिना एक भी कुत्तों को पकड़े लौट गई। माहौल शांत हो जाने के बाद अब ये खूनी कुत्ते फिर से गांव के आसपास दिखाई देने लगे हैं। इसको लेकर ग्रामीण सावधान तो हैं, लेकिन उससे कहीं अधिक भयभीत है। वह अब अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने ही नहीं देना चाहते हैं।
सामान्य तौर पर मार्च व अप्रैल में कुत्ते बच्चे को जन्म देते हैं। उस समय उनका वैक्सीनेशन होता है। यह तीन महीने के लिए कराया जाता है। यह हो सकता है कि जुलाई में उनके वैक्सीन की वैधता समाप्त हो जाती है। इसलिए पालतू कुत्तों के काटने पर एंटी रेबीज लगाया जाता है लेकिन इस माह में ये आक्रामक हो जाते हैं। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह उनके अन्य क्लाइमेट पर निर्भर करता है।
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- आरके उपाध्याय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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बच्चों के लिए बढ़ा ज्यादा खतरा
शिवपुर ब्लॉक के मटेरा कला, सेमरियावा व कमहरिया में खूनी कुत्तों ने दो बच्चों को नोच कर मार डाला था। इसी के बाद डीएम के आदेश पर इन खूनी कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम लगाई गई थी, लेकिन टीम बिना एक भी कुत्तों को पकड़े लौट गई। माहौल शांत हो जाने के बाद अब ये खूनी कुत्ते फिर से गांव के आसपास दिखाई देने लगे हैं। इसको लेकर ग्रामीण सावधान तो हैं, लेकिन उससे कहीं अधिक भयभीत है। वह अब अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने ही नहीं देना चाहते हैं।
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सामान्य तौर पर मार्च व अप्रैल में कुत्ते बच्चे को जन्म देते हैं। उस समय उनका वैक्सीनेशन होता है। यह तीन महीने के लिए कराया जाता है। यह हो सकता है कि जुलाई में उनके वैक्सीन की वैधता समाप्त हो जाती है। इसलिए पालतू कुत्तों के काटने पर एंटी रेबीज लगाया जाता है लेकिन इस माह में ये आक्रामक हो जाते हैं। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह उनके अन्य क्लाइमेट पर निर्भर करता है।
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- आरके उपाध्याय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी