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डीएम ने 46 अफसरों का वेतन रोका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2016 09:59 PM IST
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बहराइच। लोहिया ग्रामों की सत्यापन रिपोर्ट न मिलने पर जिलाधिकारी अभय ने बीएसए, डीआईओएस, डीएमओ, डीपीओ समेत 46 अधिकारियों का अप्रैल माह का वेतन नहीं जारी करने का आदेश दिया है।
इस संबंध में कोषाधिकारी को पत्र भेज दिया गया है। पांच दिन पहले छुट्टी पर जाने से पहले डीएम ने ये कार्रवाई की, जिससे हड़कंप मचा है। अधिकारियों में डीएम के प्रति रोष पनप रहा है।
बहराइच जनपद में वर्ष 2012 से लेकर अभी तक कुल 146 डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र गांवों का चयन किया जा चुका है। वर्ष 2012-13, 13-14, 14-15 और 15-16 में चयनित किए गए गांवों में होने वाले विकास कार्यों के लिए डीएम ने विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किए थे।
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नोडल अधिकारियों को गांवों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के सत्यापन की रिपोर्ट संबंधित खंड विकास अधिकारी को सौंपनी थी लेकिन चार साल के बीच कई अधिकारियों ने गांवों में जाकर सत्यापन नहीं किया।
इससे नाराज होकर डीएम ने जिला कृषि अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, डीआईओएस, डीएचओ, डीडी मंडी परिषद, डीडी कृषि, डीपीआरओ, बीएसए, डीएमओ, समाज कल्याण अधिकारी, एडी रेशम, एडी मत्स्य, डीएसओ, सीवीओ, जिला प्रोबेशन अधिकारी, डीपीओ, जिला गन्ना अधिकारी, खादी ग्रामोद्योग प्राचार्य, पीओ डूडा समेत 46 अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है।
सवा साल बाद याद आई रिपोर्ट
जिलाधिकारी अभय ने बहराइच में जनवरी 2015 में कार्यभार ग्रहण किया था। डीएम बनने के सवा साल बाद उनको अब लोहिया गांवों के सत्यापन की रिपोर्ट याद आई है। अधिकारियों में ये चर्चा का विषय बना है।
डीडीओ के साथ हुई घटना से आक्रोश
डीएम अभय ने एक पखवारे पूर्व विकास भवन में आयोजित बैठक के दौरान जिला विकास अधिकारी एसएन श्रीवास्तव के साथ अभद्रता की थी, जिसकी जिले के अधिकारी दबी जुबान से निंदा कर रहे हैं। डीडीओ के मेडिकल अवकाश पर जाने के मामले को भी डीएम की फटकार और सरकारी वाहन छीन लिए जाने की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
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इस संबंध में कोषाधिकारी को पत्र भेज दिया गया है। पांच दिन पहले छुट्टी पर जाने से पहले डीएम ने ये कार्रवाई की, जिससे हड़कंप मचा है। अधिकारियों में डीएम के प्रति रोष पनप रहा है।
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बहराइच जनपद में वर्ष 2012 से लेकर अभी तक कुल 146 डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र गांवों का चयन किया जा चुका है। वर्ष 2012-13, 13-14, 14-15 और 15-16 में चयनित किए गए गांवों में होने वाले विकास कार्यों के लिए डीएम ने विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किए थे।
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नोडल अधिकारियों को गांवों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के सत्यापन की रिपोर्ट संबंधित खंड विकास अधिकारी को सौंपनी थी लेकिन चार साल के बीच कई अधिकारियों ने गांवों में जाकर सत्यापन नहीं किया।
इससे नाराज होकर डीएम ने जिला कृषि अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, डीआईओएस, डीएचओ, डीडी मंडी परिषद, डीडी कृषि, डीपीआरओ, बीएसए, डीएमओ, समाज कल्याण अधिकारी, एडी रेशम, एडी मत्स्य, डीएसओ, सीवीओ, जिला प्रोबेशन अधिकारी, डीपीओ, जिला गन्ना अधिकारी, खादी ग्रामोद्योग प्राचार्य, पीओ डूडा समेत 46 अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है।
सवा साल बाद याद आई रिपोर्ट
जिलाधिकारी अभय ने बहराइच में जनवरी 2015 में कार्यभार ग्रहण किया था। डीएम बनने के सवा साल बाद उनको अब लोहिया गांवों के सत्यापन की रिपोर्ट याद आई है। अधिकारियों में ये चर्चा का विषय बना है।
डीडीओ के साथ हुई घटना से आक्रोश
डीएम अभय ने एक पखवारे पूर्व विकास भवन में आयोजित बैठक के दौरान जिला विकास अधिकारी एसएन श्रीवास्तव के साथ अभद्रता की थी, जिसकी जिले के अधिकारी दबी जुबान से निंदा कर रहे हैं। डीडीओ के मेडिकल अवकाश पर जाने के मामले को भी डीएम की फटकार और सरकारी वाहन छीन लिए जाने की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।