{"_id":"593196194f1c1bac0dbdcebf","slug":"danger-on-the-existence-of-22-villages-to-the-ghaghra","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा से 22 गांवों के अस्तित्व पर खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा से 22 गांवों के अस्तित्व पर खतरा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Fri, 02 Jun 2017 10:15 PM IST
विज्ञापन
बहराइच में कटान करती नदी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाघरा नदी शांत है, लेकिन बरसात शुरू होने के साथ ही नदी का रुख धीरे-धीरे विकराल होगा। कटान भी तेजी से शुरू हो जाएगी। लेकिन कटान से बचाव के अब तक कोई उपाय नहीं किए गए हैं। जबकि चहलारीघाट से कैसरगंज तक नदी के मुहाने तक 22 गांव हैं। इनमें 11 गांव ऐसे हैं, जिनसे सटकर नदी बह रही है। जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही इन गांवों में कोहराम शुरू होगा। लगभग 2400 आशियाने प्रभावित होंगे। अगर कटान रोकने के उपाय न हुए तो इन गांवों का अस्तित्व राजस्व नक्शे से मिट सकता है।
घाघरा नदी प्रति वर्ष 15 जून से 15 अक्तूबर के मध्य तबाही मचाती है। सबसे अधिक तबाही का मंजर महसी तहसील क्षेत्र में दिखाई देता है। यहां पर औसतन 1.75 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आती है। डेढ़ दशक से बाढ़ की विभीषिका कहर बरपा रही है। लेकिन अब तक ग्रामीणों को बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।
वर्ष 2010 की बाढ़ पर नजर डालें तो आठ गांवों का अस्तित्व इस बाढ़ में खत्म हुआ था। जबकि वर्ष 2011 में 9 गांव राजस्व नक्शे से मिट गए थे। इन गांवों के 1300 परिवारों की लगभग 3500 की आबादी के आशियाने व खेतों को नदी ने लील लिया था।
विज्ञापन
वर्ष 2012 से 2016 के मध्य सात गांवों राजस्व नक्शे से मिटे हैं। जिसके चलते बाढ़ व कटान में सब कुछ गंवाने के बाद यह सभी आज भी खानाबदोशों की तरह तटबंध व सड़कों के किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं।
यही स्थिति पुन: क्षेत्र के 22 गांवों में बन सकती है। नदी के मुहाने पर बसे इन 22 गांवों व नदी के मध्य काफी कम फासला बचा है। पिपरी, पिपरा और तारापुर गांव के निकट नदी तटबंध के काफी नजदीक है। महज 150 से 250 मीटर तक का फासला है। ऐसे में बाढ़ और कटान शुरू होने पर तटबंध को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इंसेट
अभियंताओं को सौंपी गई है सूची
उपजिलाधिकारी नगेंद्र कुमार का कहना है कि नदी के मुहाने पर बसे गांवों की सूची तैयार कर सरयू ड्रेनेज खंड के अभियंताओं को सौंपी गई है। कटान रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं।
पिपरा, पिपरी, कायमपुर, गोलागंज, सिलौटा नईबस्ती, अटोडर, तूलापुरवा, शुक्लनपुरवा, रानीबाग, घूरदेवी, भौंरी, पचदेवरी, रामसहायपुरवा आदि गांव शामिल हैं।
इंसेट
इन गांवों से यह है नदी की दूरी
गांव नदी से दूरी
रानीबाग 130 मीटर
तारापुरवा 40 मीटर
नई बस्ती धुसरू 20 मीटर
घूरदेवी 0 मीटर
छत्तरपुरवा 130 मीटर
जयजयरामपुरवा 90 मीटर
खरीराडीह 140 मीटर
मथुरापुरवा 22 मीटर
कुट्टीबाग 150 मीटर
टिकुरी 40 मीटर
नई बस्ती कपरवल 10 मीटर
पतुरियनबाग 50 मीटर
गोलागंज 180 मीटर
छीटनबाग 40 मीटर
धोबिनपुरवा 25 मीटर
चौहाननपुरवा 40 मीटर
राजबलिपुरवा 10 मीटर
कोट
तटबंध की करा रहे मरम्मत, कटान भी रोकेंगे
तटबंध की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया गया है। रेनकट और रैटहोल भरे जा रहे हैं। घाघरा नदी प्रतिवर्ष रुख बदलती है। इस वर्ष भी नदी की धारा में परिवर्तन हो सकता है। सर्वे कार्य चल रहा है। इसके बाद कटान रोकने के उपाय किए जाएंगे।
शोभित कुशवाहा, एक्सईएन सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम
विज्ञापन
घाघरा नदी प्रति वर्ष 15 जून से 15 अक्तूबर के मध्य तबाही मचाती है। सबसे अधिक तबाही का मंजर महसी तहसील क्षेत्र में दिखाई देता है। यहां पर औसतन 1.75 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आती है। डेढ़ दशक से बाढ़ की विभीषिका कहर बरपा रही है। लेकिन अब तक ग्रामीणों को बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2010 की बाढ़ पर नजर डालें तो आठ गांवों का अस्तित्व इस बाढ़ में खत्म हुआ था। जबकि वर्ष 2011 में 9 गांव राजस्व नक्शे से मिट गए थे। इन गांवों के 1300 परिवारों की लगभग 3500 की आबादी के आशियाने व खेतों को नदी ने लील लिया था।
विज्ञापन
वर्ष 2012 से 2016 के मध्य सात गांवों राजस्व नक्शे से मिटे हैं। जिसके चलते बाढ़ व कटान में सब कुछ गंवाने के बाद यह सभी आज भी खानाबदोशों की तरह तटबंध व सड़कों के किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं।
यही स्थिति पुन: क्षेत्र के 22 गांवों में बन सकती है। नदी के मुहाने पर बसे इन 22 गांवों व नदी के मध्य काफी कम फासला बचा है। पिपरी, पिपरा और तारापुर गांव के निकट नदी तटबंध के काफी नजदीक है। महज 150 से 250 मीटर तक का फासला है। ऐसे में बाढ़ और कटान शुरू होने पर तटबंध को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इंसेट
अभियंताओं को सौंपी गई है सूची
उपजिलाधिकारी नगेंद्र कुमार का कहना है कि नदी के मुहाने पर बसे गांवों की सूची तैयार कर सरयू ड्रेनेज खंड के अभियंताओं को सौंपी गई है। कटान रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं।
पिपरा, पिपरी, कायमपुर, गोलागंज, सिलौटा नईबस्ती, अटोडर, तूलापुरवा, शुक्लनपुरवा, रानीबाग, घूरदेवी, भौंरी, पचदेवरी, रामसहायपुरवा आदि गांव शामिल हैं।
इंसेट
इन गांवों से यह है नदी की दूरी
गांव नदी से दूरी
रानीबाग 130 मीटर
तारापुरवा 40 मीटर
नई बस्ती धुसरू 20 मीटर
घूरदेवी 0 मीटर
छत्तरपुरवा 130 मीटर
जयजयरामपुरवा 90 मीटर
खरीराडीह 140 मीटर
मथुरापुरवा 22 मीटर
कुट्टीबाग 150 मीटर
टिकुरी 40 मीटर
नई बस्ती कपरवल 10 मीटर
पतुरियनबाग 50 मीटर
गोलागंज 180 मीटर
छीटनबाग 40 मीटर
धोबिनपुरवा 25 मीटर
चौहाननपुरवा 40 मीटर
राजबलिपुरवा 10 मीटर
कोट
तटबंध की करा रहे मरम्मत, कटान भी रोकेंगे
तटबंध की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया गया है। रेनकट और रैटहोल भरे जा रहे हैं। घाघरा नदी प्रतिवर्ष रुख बदलती है। इस वर्ष भी नदी की धारा में परिवर्तन हो सकता है। सर्वे कार्य चल रहा है। इसके बाद कटान रोकने के उपाय किए जाएंगे।
शोभित कुशवाहा, एक्सईएन सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम