'मेरे सामने मगरमच्छ भतीजे को चबा गया': बहराइच में चाचा बोले- झाड़ियों में छिपा था, आहट सुनते ही घसीटकर ले गया
सरयू नदी किनारे हाथ-मुंह धोते समय मगरमच्छ ने एक बालक पर हमला कर उसे पानी में खींच लिया। परिजनों और ग्रामीणों की कोशिश के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। कई घंटे बाद शव बरामद हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत है और वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
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बहराइच में गुरुवार (16 जुलाई) रुह कंपा देने वाला वीडियो सामने आया था, जिसमें बहराइच के विजय राज सिंह के 12 साल के भतीजे सुनील को मगरमच्छ जिंदा खा गया। नर्सरी लगाने के बाद सरयू में हाथ-मुंह धुल रहे सुनील को झाड़ियों में छिपा मगरमच्छ नदी में खींच ले गया।
मौके पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। मगरमच्छ बालक को उसके परिजनों के सामने निवाला बनाता रहा। परिजन बेबस खड़े यह दर्दनाक मंजर देखते रहे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शुक्रवार दोपहर विजय बच्चे का शव गोद में लेकर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। पोस्टमॉर्टम के बाद शाम को गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विजय राज सिंह ने मीडिया से आंखों हाल बताया। कहा कि मगरमच्छ आया और भतीजे को दबोच लिया। वह चीखने लगा। यह देखकर मैंने नदी में छलांग लगा दी। 7 से 8 मिनट तक भतीजे को खींचता रहा, लेकिन छुड़ा नहीं सका। मगरमच्छ बच्चे को पानी के अंदर ले गया। 3-4 बार पानी में उछालकर पटका और मेरे सामने आधा शरीर खा गया। फिर हमने खोजबीन की, लेकिन बच्चा नहीं मिला। करीब 3 घंटे बाद भतीजे का शव उतराता मिला।
3-4 बार बच्चे को पटका, फिर पानी के अंदर ले गया
ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मगरमच्छ बच्चे को लेकर चला गया। कुछ देर बाद वह बच्चे को जबड़े में दबाकर पानी से बाहर आया। उसने बच्चे को कई बार पटकने के बाद फिर पानी के अंदर ले गया। ग्रामीणों ने बड़े-बड़े बांस के डंडों की मदद से नदी में तलाश शुरू की। तब तक पुलिस, वन विभाग और NDRF की टीम भी पहुंच गई थी।
बालक को निवाला बनाता रहा मगरमच्छ, बेबस देखते रहे लोग
तिकुरी गांव निवासी सुनील सिंह (12) के पिता बुधराज सिंह और मां की अरसे पहले मौत हो चुकी है। वह अपने चाचा विजयराज सिंह के पास तीन छोटे भाई बहनों के साथ रहता था। सुनील गांव के जूनियर विद्यालय में कक्षा छह का छात्र था। स्कूल से आने के बाद वह चाचा के साथ खेती किसानी के काम में हाथ बंटाता था।
इसी के तहत बृहस्पतिवार को दोपहर में वह स्कूल से आने के बाद सरयू नदी के किनारे स्थित खेत में धान की नर्सरी लगवाने गया था। शाम को काम खत्म होने के बाद जब सभी घर चलने को हुए तो हाथ पैर में कीचड़ लगा होने के कारण सुनील नदी के तट पर पहुंचकर धोने लगा।
इसी दौरान नदी के किनारे झाड़ियों में छिपे मगरमच्छ ने हमला कर उसे दबोच लिया और नदी में खींच ले गया। चाचा विजयराज ने शोर मचाते हुए भतीजे को बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ से उसे छुड़ा नहीं सके।
माता-पिता की हो चुकी है मौत
सुनील पहले से ही अनाथ था। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मां का सात वर्ष पहले और पिता का पांच वर्ष पहले बीमारी से निधन हो चुका था। अब परिवार में 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और सात वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। सिर्फ चाचा का ही सहारा है। घटना के बाद गांव के लोग बच्चों की मदद के लिए आगे आने लगे हैं और चंदा भी एकत्र किया जा रहा है।
गांव में दहशत
घटना के बाद तिंकुरी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसान नदी किनारे खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि सरयू किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए जाल लगाने, अतिरिक्त गश्त बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।