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घाघरा में दिखे मगरमच्छ, ग्रामीणों में दहशत
अमर उजाला/बहराइच
Updated Wed, 15 Feb 2017 11:00 PM IST
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घाघरा में अाया मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी में मगरमच्छ आ गए हैं। बुधवार को दोपहर चरवाहों ने मगरमच्छों को धूप सेंकते देखा तो सभी सकते में आ गए। जानकारी पाकर गांव के लोग भी इकट्ठा हो गए। इस मामले की सूचना वन विभाग को दी गई है। नदी में मगरमच्छ दिखने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
घाघरा नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ नहीं पाए जाते हैं। जिसके चलते आए दिन बौंडी, शुक्लनपुरवा, घुरेहरीपुर, पिपरी, पिपरा व अन्य गांवों के लोग नदी में स्नान करने के साथ ही मवेशियों को तट पर चराने ले जाते है। लेकिन बुधवार को अचानक घाघरा नदी में मगरमच्छ दिखा। शुक्लनपुरवा गांव के निकट स्पर के उस पार टॉपू में अलग-अलग स्थानों पर तीन मगरमच्छ धूप सेंक रहे थे।
इस दौरान चरवाहा किशुन कुमार, बजरंगी आदि ने मरगमच्छों को नदी के टॉपू पर देखा तो सहम गए। सूचना पाकर गांव के तमाम लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। हालांकि इस दौरान आवाज होने पर मगरमच्छ नदी के पानी में अंदर चले गए। इस मामले की वन विभाग को सूचना दी गई है। वन क्षेत्राधिकारी परवेज रुस्तम का कहना है कि घाघरा में कभी-कभार मगरमच्छ आ जाते हैं। कोई चौंकने वाली बात नहीं है। लेकिन तटवर्ती गांव के लोगों को इससे सजग रहना होगा। मवेशियों को पानी पिलाते समय भी सतर्क रहना होगा।
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उधर, नेपाल से निकलने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदी में मरगमच्छ बहुतायत में पाए जाते हैं। गौरतलब हो कि यही नदी चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से घाघरा के रूप में बनकर निकलती है। जिसके चलते बैराज का फाटक खुलने पर अक्सर मगरमच्छ और घड़ियाल घाघरा में पहुंच जाते हैं।
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घाघरा नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ नहीं पाए जाते हैं। जिसके चलते आए दिन बौंडी, शुक्लनपुरवा, घुरेहरीपुर, पिपरी, पिपरा व अन्य गांवों के लोग नदी में स्नान करने के साथ ही मवेशियों को तट पर चराने ले जाते है। लेकिन बुधवार को अचानक घाघरा नदी में मगरमच्छ दिखा। शुक्लनपुरवा गांव के निकट स्पर के उस पार टॉपू में अलग-अलग स्थानों पर तीन मगरमच्छ धूप सेंक रहे थे।
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इस दौरान चरवाहा किशुन कुमार, बजरंगी आदि ने मरगमच्छों को नदी के टॉपू पर देखा तो सहम गए। सूचना पाकर गांव के तमाम लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। हालांकि इस दौरान आवाज होने पर मगरमच्छ नदी के पानी में अंदर चले गए। इस मामले की वन विभाग को सूचना दी गई है। वन क्षेत्राधिकारी परवेज रुस्तम का कहना है कि घाघरा में कभी-कभार मगरमच्छ आ जाते हैं। कोई चौंकने वाली बात नहीं है। लेकिन तटवर्ती गांव के लोगों को इससे सजग रहना होगा। मवेशियों को पानी पिलाते समय भी सतर्क रहना होगा।
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उधर, नेपाल से निकलने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदी में मरगमच्छ बहुतायत में पाए जाते हैं। गौरतलब हो कि यही नदी चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से घाघरा के रूप में बनकर निकलती है। जिसके चलते बैराज का फाटक खुलने पर अक्सर मगरमच्छ और घड़ियाल घाघरा में पहुंच जाते हैं।