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कटान में चार और मकान समाहित, विद्यालय मुहाने पर
Updated Fri, 08 Sep 2017 10:48 PM IST
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बहराइच/राजीचौराहा। बाढ़ तो नहीं है लेकिन घाघरा की लहरें कटान कर आशियानों को लील रही हैं। महसी का चुरईपुरवा गांव नदी के निशाने पर है। जिससे गांव निवासी चार और ग्रामीणों के मकान को नदी की लहरों ने शुक्रवार को लील लिया। वहीं प्राथमिक विद्यालय भवन मुहाने पर आ गया है। गांव के लोग आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।
घाघरा की लहरें इस बार बड़े पैमाने पर कहर बरपा रही हैं। इसके चलते महसी का चुरईपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है। कटान के चलते स्पर नंबर चार का 15 मीटर हिस्सा दो दिन पूर्व नदी में समाहित हो गया था। जिससे अब नदी की धारा के निशाने पर चुरईपुरवा गांव आ गया है। गांव को कटान से बचाने के लिए दो साल पूर्व लगाए गए कटान निरोधक योजना के तहत परक्यूपाइन भी बेकार साबित हो रहे हैं। कुछ परक्यूपाइन नदी में बह चुके हें। जो बचे हैं वह नदी की लहरों को नहीं मोड़ पा रहे। इससे गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई है। गांव निवासी सुधाकर, मोल्हे, श्रवण कुमार और दिवाकर के मकान को नदी की लहरों ने शुक्रवार शाम को लील लिया। गांव के अन्य ग्रामीण आशियाने के छप्पर और ईंट को समेटकर पलायन करने लगे हैं। अफरा-तफरी के हालात दिख रहे हैं।
कटान पीड़ितों की बनवा रहे सूची
चुरईपुरवा गांव में 175 मकान थे। वर्ष 2016 में नदी की लहरों ने कटान करते हुए 80 मकानों को लील लिया है। ग्रामीणों को विश्वास था कि परक्यूपाइन योजना से गांव कटान से बच जाएगा। लेकिन अब हालात गंभीर हैं। उपजिलाधिकारी नागेंद्र कुमार का कहना है कि कटान पीड़ितों की सूची बनवा रहे हैं। उन्हें मुआवजा देंगे। बसाया भी जाएगा।
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घाघरा की लहरें इस बार बड़े पैमाने पर कहर बरपा रही हैं। इसके चलते महसी का चुरईपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है। कटान के चलते स्पर नंबर चार का 15 मीटर हिस्सा दो दिन पूर्व नदी में समाहित हो गया था। जिससे अब नदी की धारा के निशाने पर चुरईपुरवा गांव आ गया है। गांव को कटान से बचाने के लिए दो साल पूर्व लगाए गए कटान निरोधक योजना के तहत परक्यूपाइन भी बेकार साबित हो रहे हैं। कुछ परक्यूपाइन नदी में बह चुके हें। जो बचे हैं वह नदी की लहरों को नहीं मोड़ पा रहे। इससे गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई है। गांव निवासी सुधाकर, मोल्हे, श्रवण कुमार और दिवाकर के मकान को नदी की लहरों ने शुक्रवार शाम को लील लिया। गांव के अन्य ग्रामीण आशियाने के छप्पर और ईंट को समेटकर पलायन करने लगे हैं। अफरा-तफरी के हालात दिख रहे हैं।
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कटान पीड़ितों की बनवा रहे सूची
चुरईपुरवा गांव में 175 मकान थे। वर्ष 2016 में नदी की लहरों ने कटान करते हुए 80 मकानों को लील लिया है। ग्रामीणों को विश्वास था कि परक्यूपाइन योजना से गांव कटान से बच जाएगा। लेकिन अब हालात गंभीर हैं। उपजिलाधिकारी नागेंद्र कुमार का कहना है कि कटान पीड़ितों की सूची बनवा रहे हैं। उन्हें मुआवजा देंगे। बसाया भी जाएगा।
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