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जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम महज खानापूर्ति
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:31 PM IST
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बहराइच। राजधानी के केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर के सेकेंड फ्लोर पर शनिवार शाम भीषण आग लगने के बाद अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजामों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला अस्पताल में एनआरएचएम के तहत सीज फायर खरीदे गए थे। मगर इनकी स्थिति खराब है। अस्पताल में फायर अलार्म और ओवरहेड टैंक तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं निजी अस्पतालों में भी कागजी खानापूर्ति कर आग से बचाव के इंतजाम दिखाए जा रहे हैं।
राजधानी के केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर के अंदर शनिवार शाम भीषण आग लग गई थी। आग से बचाव के इंतजाम यहां नदारद थे। इसी तरह बहराइच के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के हालात भी काफी खराब हैं। देवीपाटन मंडल का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बाद भी जिला अस्पताल में आग से बचाव को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं हैं। वार्ड के अंदर बेड भर जाने पर मरीजों को बरामदे में ही लेटने को मजबूर होना पड़ता है। जिला अस्पताल के वार्डों में आग से बचाव के लिए सीजफायर तक भी नहीं लगे हुए हैं। वहीं वार्डों से बाहर निकलने के लिए कोई आपातकालीन दरवाजे की भी व्यवस्था नहीं है। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में भी आग से बचाव के कोई इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। जिससे कभी भी आग लगने पर मरीजों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
18 अस्पतालों में रोजाना चार हजार मरीजों का होता इलाज
जिले में एक संयुक्त जिला चिकित्सालय, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें प्रतिदिन करीब चार हजार मरीज अपना इलाज कराने आते हैं।
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अलार्म की नहीं है व्यवस्था
जिला अस्पताल में आग लगने पर लोगों को सचेत करने के लिए अलार्म की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में बीते माह शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग चुकी है। हालांकि आग पर काबू पा लिया गया था। लेकिन अलार्म न होने के कारण अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई थी।
सुरक्षा का रखा जा रहा ध्यान
जिला अस्पताल काफी बड़ा है। संसाधनों की कुछ कमी भी है। लेकिन मौजूद संसाधनों से ही व्यवस्था चलायी जा रही है। जिला अस्पताल के प्रमुख स्थानों पर आग से बचाव के लिए सीजफायर लगे हुए हैं। बालू की बाल्टियां भी रखी जा रही हैं। आग लगने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। -डॉ. ओपी पांडेय सीएमएस बहराइच
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राजधानी के केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर के अंदर शनिवार शाम भीषण आग लग गई थी। आग से बचाव के इंतजाम यहां नदारद थे। इसी तरह बहराइच के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के हालात भी काफी खराब हैं। देवीपाटन मंडल का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बाद भी जिला अस्पताल में आग से बचाव को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं हैं। वार्ड के अंदर बेड भर जाने पर मरीजों को बरामदे में ही लेटने को मजबूर होना पड़ता है। जिला अस्पताल के वार्डों में आग से बचाव के लिए सीजफायर तक भी नहीं लगे हुए हैं। वहीं वार्डों से बाहर निकलने के लिए कोई आपातकालीन दरवाजे की भी व्यवस्था नहीं है। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में भी आग से बचाव के कोई इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। जिससे कभी भी आग लगने पर मरीजों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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18 अस्पतालों में रोजाना चार हजार मरीजों का होता इलाज
जिले में एक संयुक्त जिला चिकित्सालय, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें प्रतिदिन करीब चार हजार मरीज अपना इलाज कराने आते हैं।
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अलार्म की नहीं है व्यवस्था
जिला अस्पताल में आग लगने पर लोगों को सचेत करने के लिए अलार्म की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में बीते माह शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग चुकी है। हालांकि आग पर काबू पा लिया गया था। लेकिन अलार्म न होने के कारण अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई थी।
सुरक्षा का रखा जा रहा ध्यान
जिला अस्पताल काफी बड़ा है। संसाधनों की कुछ कमी भी है। लेकिन मौजूद संसाधनों से ही व्यवस्था चलायी जा रही है। जिला अस्पताल के प्रमुख स्थानों पर आग से बचाव के लिए सीजफायर लगे हुए हैं। बालू की बाल्टियां भी रखी जा रही हैं। आग लगने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। -डॉ. ओपी पांडेय सीएमएस बहराइच