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जान जोखिम में डाल कोरोना मरीजों को अस्पताल पहुंचा रहे योद्धा
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बहराइच। कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 16 एंबुलेंस लगाई गई है। इन एंबुलेंस के द्वारा कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरे की जान बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुरक्षा के लिए उन्हें सिर्फ पीपीई किट, मॉस्क व सेनेटाइजर ही दिया गया है। कोई 80 तो कोई 300 किलोमीटर की दूरी पर रहकर कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जिले में तेजी से फैल रही है। इस बार कोरोना की चेन इतना खतरनाक है कि लोगों को पता भी नहीं चलता और ऑक्सीजन दर काफी नीचे चली जाती है। ऑक्सीजन के अभाव में कोरोना संक्रमित दम तोड़ रहे हैं। संक्रमितों की चपेट में न आएं, इसके लिए ग्रामीण व शहरवासी दूरी बना रहे हैं। कोरोना संक्रमितों को बेहतर इलाज देने के लिए चिकित्सक और स्टाफ नर्स की वाहवाही के बीच में एंबुलेंस कर्मियों को अपना स्थान नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई सुविधाओं से ही एंबुलेंस कर्मी जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कोरोना संक्रमितों को कोविड अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
हालत में सुधार होने पर उन्हें पुन: उनके घर सकुशल पहुंचा रहे हैं। वहीं जिन संक्रमितों की हालत में सुधार नहीं होती है, उन संक्रमितों को एंबुलेंस कर्मियों की ओर से लखनऊ ले जाना पड़ता है। लेकिन इन योद्धाओं को वह सम्मान नहीं मिल पाता है। एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि कोरोना संक्रमित से बचाव के लिए उन्हें पीपीई किट, मॉस्क व सेनेटाइजर दी गई है। इसी के सहारे वह सभी संक्रमित को घर से अस्पताल पहुंचाते हैं। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर और सूचना मिलने पर पुन: सभी को उनके घर पहुंचाया जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों की तरह एंबुलेंस कर्मी भी कोरोना योद्धा हैं। उनके सहयोग से ही सुदूर गांवों से कोविड के मरीजों को जिला मुख्यालय अस्पताल लाकर भर्ती कराया जाता है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रमपुरवा, रिसिया, पयागपुर, नानपारा, हुजूरपुर, फखरपुर, विशेश्वरगंज, शिवपुर, चित्तौरा, मोतीपुर, जरवल, कैसरगंज और चरदा में एंबुलेंस संक्रमितों को एलटू अस्पताल भेजने के लिए लगी हुई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में तीन एंबुलेंस लगे हैं। जिससे गंभीर संक्रमितों को जिला अस्पताल से लखनऊ भेजा जा सके।
कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लगे 108 एंबुलेंस के कर्मचारी नसीम अहमद का कहना है कि अपने लिए सब जीते हैं। लेकिन इस महामारी में दूसरों को जीवन दिया जा सके। यही सबसे बड़ा कार्य है। उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
नसीम अहमद
बस्ती जिला में पत्नी व परिवार के अन्य सदस्य रह रहे हैं। लेकिन इस महामारी में घर भी नहीं जा रहे हैं। फोन पर ही हालचाल लेकर संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। जीवन रहा तो परिवार से पुन: मुलाकात हो जाएगी।
संतोष पांडेय
कोरोना संक्रमण एक-दूसरे से फैलता है। हम लोगों में भी फैलने का खतरा रहता है। लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ संक्रमितों का जीवन बचाने के लिए लगे हुए हैं। लेकिन अपने मन से भय हटाकर संक्रमितों की मदद कर रहे हैं। लोग भी सुरक्षित रहकर मदद कर सकते हैं।
जीवनलाल
कोरोना महामारी जैसा संक्रमण जीवन में पहली बार देखा है। जिसमें अपनी जान भी जाने का खतरा है। लेकिन अपने जीवन को सुरक्षित रखते हुए दूसरे के जीवन को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। यह कार्य ताउम्र याद रहेगा।
प्रदीप तिवारी
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जिले में तेजी से फैल रही है। इस बार कोरोना की चेन इतना खतरनाक है कि लोगों को पता भी नहीं चलता और ऑक्सीजन दर काफी नीचे चली जाती है। ऑक्सीजन के अभाव में कोरोना संक्रमित दम तोड़ रहे हैं। संक्रमितों की चपेट में न आएं, इसके लिए ग्रामीण व शहरवासी दूरी बना रहे हैं। कोरोना संक्रमितों को बेहतर इलाज देने के लिए चिकित्सक और स्टाफ नर्स की वाहवाही के बीच में एंबुलेंस कर्मियों को अपना स्थान नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई सुविधाओं से ही एंबुलेंस कर्मी जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कोरोना संक्रमितों को कोविड अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
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हालत में सुधार होने पर उन्हें पुन: उनके घर सकुशल पहुंचा रहे हैं। वहीं जिन संक्रमितों की हालत में सुधार नहीं होती है, उन संक्रमितों को एंबुलेंस कर्मियों की ओर से लखनऊ ले जाना पड़ता है। लेकिन इन योद्धाओं को वह सम्मान नहीं मिल पाता है। एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि कोरोना संक्रमित से बचाव के लिए उन्हें पीपीई किट, मॉस्क व सेनेटाइजर दी गई है। इसी के सहारे वह सभी संक्रमित को घर से अस्पताल पहुंचाते हैं। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर और सूचना मिलने पर पुन: सभी को उनके घर पहुंचाया जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों की तरह एंबुलेंस कर्मी भी कोरोना योद्धा हैं। उनके सहयोग से ही सुदूर गांवों से कोविड के मरीजों को जिला मुख्यालय अस्पताल लाकर भर्ती कराया जाता है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रमपुरवा, रिसिया, पयागपुर, नानपारा, हुजूरपुर, फखरपुर, विशेश्वरगंज, शिवपुर, चित्तौरा, मोतीपुर, जरवल, कैसरगंज और चरदा में एंबुलेंस संक्रमितों को एलटू अस्पताल भेजने के लिए लगी हुई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में तीन एंबुलेंस लगे हैं। जिससे गंभीर संक्रमितों को जिला अस्पताल से लखनऊ भेजा जा सके।
कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लगे 108 एंबुलेंस के कर्मचारी नसीम अहमद का कहना है कि अपने लिए सब जीते हैं। लेकिन इस महामारी में दूसरों को जीवन दिया जा सके। यही सबसे बड़ा कार्य है। उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
नसीम अहमद
बस्ती जिला में पत्नी व परिवार के अन्य सदस्य रह रहे हैं। लेकिन इस महामारी में घर भी नहीं जा रहे हैं। फोन पर ही हालचाल लेकर संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। जीवन रहा तो परिवार से पुन: मुलाकात हो जाएगी।
संतोष पांडेय
कोरोना संक्रमण एक-दूसरे से फैलता है। हम लोगों में भी फैलने का खतरा रहता है। लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ संक्रमितों का जीवन बचाने के लिए लगे हुए हैं। लेकिन अपने मन से भय हटाकर संक्रमितों की मदद कर रहे हैं। लोग भी सुरक्षित रहकर मदद कर सकते हैं।
जीवनलाल
कोरोना महामारी जैसा संक्रमण जीवन में पहली बार देखा है। जिसमें अपनी जान भी जाने का खतरा है। लेकिन अपने जीवन को सुरक्षित रखते हुए दूसरे के जीवन को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। यह कार्य ताउम्र याद रहेगा।
प्रदीप तिवारी