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सहकारी समिति कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
बहराइच
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:48 PM IST
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सोमवार को सामूहिक इस्तीफा देते सहकारी समिति के कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारियों का वेतन आठ से दस साल का बकाया है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी बरकरार हैं। इन सभी समस्याओं के निराकरण के लिए सहकारी समितियों के कर्मचारी 23 अक्तूबर से समिति, कार्यालय और गोदाम पर तालाबंदी कर हड़ताल पर हैं लेकिन शासन और प्रशासन के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। उपेक्षा से आहत कर्मचारियों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट के धरनास्थल पर प्रदर्शन करते हुए सामूहिक त्याग पत्र सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को सौंपा। इससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है। वहीं आंदोलित कर्मचारी समस्याओं का निराकरण न होने तक मानने को तैयार नहीं है।
सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले जिलेे के 111 सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारी अपने बकाया वेतन और लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए बीते 23 अक्तूबर से तालाबंदी कर हड़ताल पर हैं। जिसके चलते सहकारी समितियों पर धान खरीद का कार्य प्रभावित है। वहीं किसान खाद-बीज भी नहीं ले पा रहे हैं।
सात दिन के आंदोलन के बावजूद सहकारी समिति कर्मचारियों की समस्याओं पर शासन और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। जबकि कर्मचारी भूखे-प्यासे धरनास्थल पर बैठे रहे। संघ के अध्यक्ष चंद्रप्रताप त्रिपाठी व महामंत्री भवानी प्रसाद मिश्र की अगुवाई में सोमवार सुबह सभी कर्मचारियों ने व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर धरना दिया।
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इसके बाद सामूहिक त्यागपत्र सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधन सहकारिता को सौंपा। अध्यक्ष और मंत्री ने कहा कि शासन और प्रशासन की चुप्पी से लग रहा है कि उसे कर्मचारियों के हितों से कोई मतलब नहीं है। लाखों रुपये वेतन बकाया है।
कर्मचारी और उनके परिवार भुखमरी के दौर से गुजर रहे हैं। किसी तो आठ तो किसी को 10 साल से वेतन नहीं मिला है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। ऐसे में अब आश्वासन से काम नहीं चलने वाला। उन्होंने कहा कि भूखे रहकर आंदोलन करने से अच्छा है, नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया जाए। इस्तीफा सौंपने वालों में अध्यक्ष व मंत्री के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलबीर सिंह, राजकुमार सिंह, अखिलेश, धीरजलाल दीक्षित समेत सभी कर्मचारी शामिल रहे।
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सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले जिलेे के 111 सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारी अपने बकाया वेतन और लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए बीते 23 अक्तूबर से तालाबंदी कर हड़ताल पर हैं। जिसके चलते सहकारी समितियों पर धान खरीद का कार्य प्रभावित है। वहीं किसान खाद-बीज भी नहीं ले पा रहे हैं।
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सात दिन के आंदोलन के बावजूद सहकारी समिति कर्मचारियों की समस्याओं पर शासन और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। जबकि कर्मचारी भूखे-प्यासे धरनास्थल पर बैठे रहे। संघ के अध्यक्ष चंद्रप्रताप त्रिपाठी व महामंत्री भवानी प्रसाद मिश्र की अगुवाई में सोमवार सुबह सभी कर्मचारियों ने व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर धरना दिया।
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इसके बाद सामूहिक त्यागपत्र सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधन सहकारिता को सौंपा। अध्यक्ष और मंत्री ने कहा कि शासन और प्रशासन की चुप्पी से लग रहा है कि उसे कर्मचारियों के हितों से कोई मतलब नहीं है। लाखों रुपये वेतन बकाया है।
कर्मचारी और उनके परिवार भुखमरी के दौर से गुजर रहे हैं। किसी तो आठ तो किसी को 10 साल से वेतन नहीं मिला है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। ऐसे में अब आश्वासन से काम नहीं चलने वाला। उन्होंने कहा कि भूखे रहकर आंदोलन करने से अच्छा है, नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया जाए। इस्तीफा सौंपने वालों में अध्यक्ष व मंत्री के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलबीर सिंह, राजकुमार सिंह, अखिलेश, धीरजलाल दीक्षित समेत सभी कर्मचारी शामिल रहे।