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गिरिजापुरी बैराज का हुआ क्लोजर, सूख गई नदी
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मोतीपुर तहसील के सुजौली क्षेत्र में स्थित बैराज में क्लोजर के बाद सूखी गेरुआ नदी।
- फोटो : BAHRAICH
बिछिया (बहराइच)। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज का क्लोजर सोमवार को कर दिया गया। इस दौरान बैराज के सभी गेट खोल दिए गए। इससे नदी का पानी चारो तरफ बह गया। ऐसे में कतर्नियाघाट की गेरुआ और कौड़ियाला नदी सूख गई है। नदी सूखने से जलीव जीवों के रहन-सहन का संकट हो गया है। पुन: पानी छोड़े जाने के बाद ही इनकी स्थिति सुधरेगी।
मोतीपुर तहसील के सुजौली क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज बहती है। इस नदी से संरक्षित वन क्षेत्र की कौड़ियाला और गेरुआ नदी में पानी प्रवाहित है। इन नदियों में मगरमच्छ, घड़ियाल और डॉल्फिन जैसे जलीय जीव रहते हैं, लेकिन बैराज का क्लोजर हो जाने से जलीव जीवों को काफी परेशानी होती है। सोमवार को सिंचाई विभाग की ओर से बैराज का क्लोजर कर दिया गया। जिससे बैराज का पानी पूरी तरह से बह गया। बैराज सूख गया। क्लोजर के चलते कौड़ियाला और गेरुआ नदी भी सूख गई। ऐसे में इन नदियों में निवास करने वाले जंगली जीवों के जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है।
बैराज के प्रभारी संतराम वर्मा ने बताया कि 18 व 19 अक्तूबर को क्लोजर के लिए बैराज के सभी गेट खोल दिए गए थे। पानी बाहर निकलने से बैराज की मरम्मत व सफाई कार्य शुरू करा दिया गया। क्लोजर का कार्य 15 दिनों तक चलेगा। मरम्मत कार्य होने के बाद पुन: बैराज में पानी भर जाएगा, जिससे जलीय जीवों को पानी मिलने लगेगा।
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गेट खुलने पर घाघरा में चली जाती हैं डॉल्फिन
क्लोजर के चलते गेरुआ नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में सिर्फ गहराई वाले जगह पर ही जलीय जीव एकत्रित हैं। ऐसे में घड़ियाल और मगरमच्छ पानी वाले स्थान पर ठिकाना तलाश रहे हैं। जबकि डॉल्फिन गेट खुलने के साथ ही घाघरा नदी में चली जाती हैं। पानी आने के बाद पुन: सभी जीव वापस आ जाते हैं।
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मोतीपुर तहसील के सुजौली क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज बहती है। इस नदी से संरक्षित वन क्षेत्र की कौड़ियाला और गेरुआ नदी में पानी प्रवाहित है। इन नदियों में मगरमच्छ, घड़ियाल और डॉल्फिन जैसे जलीय जीव रहते हैं, लेकिन बैराज का क्लोजर हो जाने से जलीव जीवों को काफी परेशानी होती है। सोमवार को सिंचाई विभाग की ओर से बैराज का क्लोजर कर दिया गया। जिससे बैराज का पानी पूरी तरह से बह गया। बैराज सूख गया। क्लोजर के चलते कौड़ियाला और गेरुआ नदी भी सूख गई। ऐसे में इन नदियों में निवास करने वाले जंगली जीवों के जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है।
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बैराज के प्रभारी संतराम वर्मा ने बताया कि 18 व 19 अक्तूबर को क्लोजर के लिए बैराज के सभी गेट खोल दिए गए थे। पानी बाहर निकलने से बैराज की मरम्मत व सफाई कार्य शुरू करा दिया गया। क्लोजर का कार्य 15 दिनों तक चलेगा। मरम्मत कार्य होने के बाद पुन: बैराज में पानी भर जाएगा, जिससे जलीय जीवों को पानी मिलने लगेगा।
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गेट खुलने पर घाघरा में चली जाती हैं डॉल्फिन
क्लोजर के चलते गेरुआ नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में सिर्फ गहराई वाले जगह पर ही जलीय जीव एकत्रित हैं। ऐसे में घड़ियाल और मगरमच्छ पानी वाले स्थान पर ठिकाना तलाश रहे हैं। जबकि डॉल्फिन गेट खुलने के साथ ही घाघरा नदी में चली जाती हैं। पानी आने के बाद पुन: सभी जीव वापस आ जाते हैं।