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शहर के बाशिंदों की चाह, खुले स्मार्ट बहराइच की राह
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2015 11:39 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी महात्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के पहले चरण में यूपी के अवध में लखनऊ को छोड़कर अन्य जिलों को शामिल नहीं किया है। ऐसे में बहराइचवासी भी नाउम्मीद हुए हैं। मगर बहराइच को स्मार्ट सिटी बनाने की चाहत हर दिल में है।
शहरवासियों को जाम से निजात दिलाने, शुद्ध पेयजल देने और सीवरेज की समस्या को दूर करने के लिए कार्ययोजना तक नहीं बनाई जा सकी है। बिजली की किल्लत भी स्मार्ट सिटी बनने पर ग्रहण लगा रही है।
बहराइच शहर में शुद्ध पेयजल की सबसे अहम समस्या है। इसे दूर किए बिना स्मार्ट सिटी का सपना साकार नहीं हो सकता है। यहां दशकों पूर्व बिछाई गई पाइप लाइनें जर्जर हो गई हैं। नई पानी टंकी का निर्माण भी बीते पांच सालों में नहीं हुआ है। दूसरी सबसे अहम समस्या ट्रैफिक जाम की है।
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शहर में आटो चलने तो शुरू हो गए। लेकिन संकुचित सड़क और उनकी पटरियों पर बढ़ता अतिक्रमण काफी हद तक जाम के लिए जिम्मेदार हैं। ठेले और खोमचे वालों को भी एक समुचित जगह उपलब्ध कराने में नगरपालिका फिसड्डी साबित हुआ है।
शहर में सड़क, लाइटिंग और हाईवे की पटरियों को दुरुस्त करने का काम जरूर किया गया है। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं को शहरवासी तरस रहे हैं। कचरा प्रबंधन की योजना भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। रोजगार पैदा करने की दिशा में भी शहर में कोई खास उपलब्धि नहीं हासिल की है। शहर में बिजली की कटौती भी सबसे अहम समस्या बनी हुई है।
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शहरवासियों को जाम से निजात दिलाने, शुद्ध पेयजल देने और सीवरेज की समस्या को दूर करने के लिए कार्ययोजना तक नहीं बनाई जा सकी है। बिजली की किल्लत भी स्मार्ट सिटी बनने पर ग्रहण लगा रही है।
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बहराइच शहर में शुद्ध पेयजल की सबसे अहम समस्या है। इसे दूर किए बिना स्मार्ट सिटी का सपना साकार नहीं हो सकता है। यहां दशकों पूर्व बिछाई गई पाइप लाइनें जर्जर हो गई हैं। नई पानी टंकी का निर्माण भी बीते पांच सालों में नहीं हुआ है। दूसरी सबसे अहम समस्या ट्रैफिक जाम की है।
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शहर में आटो चलने तो शुरू हो गए। लेकिन संकुचित सड़क और उनकी पटरियों पर बढ़ता अतिक्रमण काफी हद तक जाम के लिए जिम्मेदार हैं। ठेले और खोमचे वालों को भी एक समुचित जगह उपलब्ध कराने में नगरपालिका फिसड्डी साबित हुआ है।
शहर में सड़क, लाइटिंग और हाईवे की पटरियों को दुरुस्त करने का काम जरूर किया गया है। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं को शहरवासी तरस रहे हैं। कचरा प्रबंधन की योजना भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। रोजगार पैदा करने की दिशा में भी शहर में कोई खास उपलब्धि नहीं हासिल की है। शहर में बिजली की कटौती भी सबसे अहम समस्या बनी हुई है।