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ऐसा विधायक चुनें जो समस्याएं दूर कराए
अमर उजाला/श्रावस्ती
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:44 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे किसान
- फोटो : अमर उजाला
किसानों की कई समस्याएं हैं, जिनका समाधान नहीं हो पा रहा है। कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ही हो सकता है। इसके बाद भी जनप्रतिनिधि समस्याओं के समाधान के लिए पहल नहीं करते हैं। किसानों की समस्या और उनका जनप्रतिनिधि कैसा हो। इस मुद्दे पर विचार करने के लिए शुक्रवार को जमुनहा के ब्लॉक सभागार में अमर उजाला की ओर से फोकस ग्रुप का आयोजन किया गया, जिसमें काश्तकारों ने खुलकर अपने विचार रखे।
किसानों का जनप्रतिनिधि कैसा हो, इसका उत्तर तलाशने के लिए जमुनहा ब्लॅाक सभागार में क्षेत्र से जुटे काश्तकारों ने घंटों मंथन किया। इसमें यह बात सामने आई कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि आम नहीं खास हो जाता है। वह वोट देने वाले किसानों को भूल जाता हैं। इसी के साथ ही सदन पहुंचते ही वह किसानों के स्थानीय मुद्दों के प्रति लापरवाह भी हो जाते हैं।
किसान अपनी समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराने वालों को ही अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट देना चाहता है। कुछ किसानों ने खाद, बीज व पानी की समस्या का निस्तारण न होने की बात कही, तो कुछ ने कहा कि जनप्रतिनिधि की लापरवाही के कारण उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली आवास, पेंशन, बिजली, पानी की भी सुविधा नहीं मिल पाती है।
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इन योजनाओं का लाभ पूंजीपति ही उठाते हैं। जबकि कुछ ने किसानों की उपज का उचित मूल्य न मिलने की बात कह कर उसे ही अपना जनप्रतिनिधि बनाने की बात कही जो जिले में गन्ना व मंडी समिति की स्थापना कराए।
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किसानों का जनप्रतिनिधि कैसा हो, इसका उत्तर तलाशने के लिए जमुनहा ब्लॅाक सभागार में क्षेत्र से जुटे काश्तकारों ने घंटों मंथन किया। इसमें यह बात सामने आई कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि आम नहीं खास हो जाता है। वह वोट देने वाले किसानों को भूल जाता हैं। इसी के साथ ही सदन पहुंचते ही वह किसानों के स्थानीय मुद्दों के प्रति लापरवाह भी हो जाते हैं।
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किसान अपनी समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराने वालों को ही अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट देना चाहता है। कुछ किसानों ने खाद, बीज व पानी की समस्या का निस्तारण न होने की बात कही, तो कुछ ने कहा कि जनप्रतिनिधि की लापरवाही के कारण उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली आवास, पेंशन, बिजली, पानी की भी सुविधा नहीं मिल पाती है।
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इन योजनाओं का लाभ पूंजीपति ही उठाते हैं। जबकि कुछ ने किसानों की उपज का उचित मूल्य न मिलने की बात कह कर उसे ही अपना जनप्रतिनिधि बनाने की बात कही जो जिले में गन्ना व मंडी समिति की स्थापना कराए।