{"_id":"7c0023e0e157c40dab793dd5237984ea","slug":"children-s-treatment-under-the-tree-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेड़ की छांव में बाल रोगियों का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेड़ की छांव में बाल रोगियों का इलाज
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Mon, 22 Jun 2015 10:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भीषण गर्मी जिला अस्पताल के रोगियों पर भारी पड़ रही है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को संसाधनों की कमी तो झेलनी ही पड़ रही है, इसके अलावा जो संसाधन हैं वो भी सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
बाल रोग विभाग में भर्ती बाल रोगियों का इलाज पेड़ की छांव में हो रहा है। ऐसे में वे कितने स्वस्थ होंगे और संक्रमण से बचेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
तराई में बुखार व डायरिया का प्रकोप बच्चों पर कहर बनकर टूट रहा है। आए दिन मौतें हो रही हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग मौतों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
प्रतिदिन औसतन 1800 नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है, तो वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में औसतन 25 नौनिहाल प्रतिदिन गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं। लेकिन, यहां मर्ज दूर होने के बजाए और बढ़ रही है। कारण गर्मी से निजात दिलाने के लिए लगाए गए पंखे व एसी बेकार पड़े हैं।
एसी शोपीस बनकर खिड़की की शोभा बढ़ा रही हैं तो पंखे ऐसे कि, उनके ठीक नीचे भर्ती मरीज को भी हवा नहीं मिलती है। बुखार व डायरिया से पीड़ित बच्चों में उलझन व बेचैनी की बीमारी पनप रही है। मजबूर होकर तीमारदारों को पंखा झलते हुए रात व दिन बिताने पड़ रहे हैं।
कुछ तीमारदार अपने मरीज को पेड़ की छांव में लिटाकर इलाज कराने को मजबूर हैं। इससे बीमार बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा है लेकिन जिम्मेदार आंखें बंद किए हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भी नहीं राहत
कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए चिल्ड्रेन वार्ड के एक कमरे में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया हैं। यहां छह बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में यहां दो बच्चे भर्ती हैं, यहां भी पंखे व एसी लगाए गए हैं।
पंखे चलते जरूर हैं लेकिन उनसे राहत नहीं है, जबकि एसी लंबे समय से खराब है। उसे ठीक कराने की जहमत अस्पताल प्रशासन ने नहीं उठाई है। दिन में बच्चे पेड़ों की छांव में रहते हैं लेकिन रात के समय स्थिति विकराल हो जाती है।
जल्द दुरुस्त होंगी व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड की सभी एसी चालू हालत में हैं लेकिन बिजली केबल एसी का लोड नहीं उठा पा रही हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए निदेशालय पत्र लिखा गया था। निदेशालय ने उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया की अनुमति दी है। जल्द ही समस्याएं दूर कर ली जाएंगी।
विज्ञापन
बाल रोग विभाग में भर्ती बाल रोगियों का इलाज पेड़ की छांव में हो रहा है। ऐसे में वे कितने स्वस्थ होंगे और संक्रमण से बचेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
तराई में बुखार व डायरिया का प्रकोप बच्चों पर कहर बनकर टूट रहा है। आए दिन मौतें हो रही हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग मौतों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
प्रतिदिन औसतन 1800 नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है, तो वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में औसतन 25 नौनिहाल प्रतिदिन गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं। लेकिन, यहां मर्ज दूर होने के बजाए और बढ़ रही है। कारण गर्मी से निजात दिलाने के लिए लगाए गए पंखे व एसी बेकार पड़े हैं।
एसी शोपीस बनकर खिड़की की शोभा बढ़ा रही हैं तो पंखे ऐसे कि, उनके ठीक नीचे भर्ती मरीज को भी हवा नहीं मिलती है। बुखार व डायरिया से पीड़ित बच्चों में उलझन व बेचैनी की बीमारी पनप रही है। मजबूर होकर तीमारदारों को पंखा झलते हुए रात व दिन बिताने पड़ रहे हैं।
कुछ तीमारदार अपने मरीज को पेड़ की छांव में लिटाकर इलाज कराने को मजबूर हैं। इससे बीमार बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा है लेकिन जिम्मेदार आंखें बंद किए हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भी नहीं राहत
कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए चिल्ड्रेन वार्ड के एक कमरे में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया हैं। यहां छह बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में यहां दो बच्चे भर्ती हैं, यहां भी पंखे व एसी लगाए गए हैं।
पंखे चलते जरूर हैं लेकिन उनसे राहत नहीं है, जबकि एसी लंबे समय से खराब है। उसे ठीक कराने की जहमत अस्पताल प्रशासन ने नहीं उठाई है। दिन में बच्चे पेड़ों की छांव में रहते हैं लेकिन रात के समय स्थिति विकराल हो जाती है।
जल्द दुरुस्त होंगी व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड की सभी एसी चालू हालत में हैं लेकिन बिजली केबल एसी का लोड नहीं उठा पा रही हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए निदेशालय पत्र लिखा गया था। निदेशालय ने उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया की अनुमति दी है। जल्द ही समस्याएं दूर कर ली जाएंगी।