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भाइयों ने गुड़िया पीट लिया बहनों की सुरक्षा का संकल्प
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 19 Aug 2015 10:11 PM IST
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बहराइच। नागपंचमी का पर्व बुधवार को जिले भर में परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने घरों व मंदिरों में नाग देवता का पूजन-अर्चन कर सुख समृद्धि की कामना की।
शिव मंदिरों में भगवान शिव की भी आराधना की गई। बहनों द्वारा बनाई गई कपड़े की गुड़िया भाइयों ने पीटी। बहनों ने भाइयों की सफलता और दीर्घायु की कामना की। इसके बाद घुघरी का प्रसाद ग्रहण किया।
नागपंचमी के अवसर पर बुधवार सुबह से ही घरों व शिव मंदिरों में नाग देवता को दूध, चना, पुष्प आदि अर्पित कर लोगों ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया।
सिद्धनाथ मंदिर में दिन भर श्रद्धालु आते रहे। वहीं, ग्रामीण अंचलों में स्थित शिव मंदिरों में भी भगवान शिव तथा नाग देवता की आराधना हुई। विभिन्न क्षेत्रों में सपेरे भी नाग देवता के दर्शन करवाने के लिए पिटारा लिए घर-घर दरवाजा खटखटाते रहे।
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गांवों में लोगों ने नाग देवता से सुरक्षा की कामना करते हुए नागबंधन से घर को बंाधने की परंपरा का निर्वहन किया। गाय के गोबर से घरों को प्रतीकात्मक नागबंधन से बांधा गया।
सुख-समृद्धि के इस पर्व पर बच्चों में खासा उत्साह दिखायी पड़ा। सुबह से ही विभिन्न चौक चौराहों पर गुड़िया पीटने के लिए रंगबिरंगे छड़ी की बिक्री हुई।
गली मोहल्लों में शाम होते ही गुड़िया पीटने का शोर सुनाई पड़ने लगा। भाई बहन द्वार पर इकठ्ठा हुए। बहनों ने कपड़े की प्रतीकात्मक गुड़िया द्वार पर छोड़ी और भाइयों ने रंगबिरंगी छड़ियों से उसे पीटा।
इस दौरान बहनों ने भाइयों के दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने बहनों की सुरक्षा का संकल्प लिया। इसके बाद बहनों ने उबले चने के प्रसाद का वितरण भी किया। नाग देवता से घर के सदस्यों की सलामती की दुआ मांगी गई।
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शिव मंदिरों में भगवान शिव की भी आराधना की गई। बहनों द्वारा बनाई गई कपड़े की गुड़िया भाइयों ने पीटी। बहनों ने भाइयों की सफलता और दीर्घायु की कामना की। इसके बाद घुघरी का प्रसाद ग्रहण किया।
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नागपंचमी के अवसर पर बुधवार सुबह से ही घरों व शिव मंदिरों में नाग देवता को दूध, चना, पुष्प आदि अर्पित कर लोगों ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया।
सिद्धनाथ मंदिर में दिन भर श्रद्धालु आते रहे। वहीं, ग्रामीण अंचलों में स्थित शिव मंदिरों में भी भगवान शिव तथा नाग देवता की आराधना हुई। विभिन्न क्षेत्रों में सपेरे भी नाग देवता के दर्शन करवाने के लिए पिटारा लिए घर-घर दरवाजा खटखटाते रहे।
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गांवों में लोगों ने नाग देवता से सुरक्षा की कामना करते हुए नागबंधन से घर को बंाधने की परंपरा का निर्वहन किया। गाय के गोबर से घरों को प्रतीकात्मक नागबंधन से बांधा गया।
सुख-समृद्धि के इस पर्व पर बच्चों में खासा उत्साह दिखायी पड़ा। सुबह से ही विभिन्न चौक चौराहों पर गुड़िया पीटने के लिए रंगबिरंगे छड़ी की बिक्री हुई।
गली मोहल्लों में शाम होते ही गुड़िया पीटने का शोर सुनाई पड़ने लगा। भाई बहन द्वार पर इकठ्ठा हुए। बहनों ने कपड़े की प्रतीकात्मक गुड़िया द्वार पर छोड़ी और भाइयों ने रंगबिरंगी छड़ियों से उसे पीटा।
इस दौरान बहनों ने भाइयों के दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने बहनों की सुरक्षा का संकल्प लिया। इसके बाद बहनों ने उबले चने के प्रसाद का वितरण भी किया। नाग देवता से घर के सदस्यों की सलामती की दुआ मांगी गई।