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Bahraich News: सी पैप मशीन नेे नवजात को बचाया
Thu, 18 Dec 2025 01:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 18 Dec 2025 01:32 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में सी पैप से सांस लेता नवजात व मौजूद चिकित्सक। -संवाद
बहराइच। मिहींपुरवा निवासी शांति देवी के नवजात शिशु को जन्म के बाद सांस लेने में कठिनाई होने पर मंगलवार को मोतीपुर सीएचसी से जिला महिला विंग स्थित एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) रेफर किया गया। एसएनसीयू में सी-पैप मशीन के माध्यम से नियंत्रित दबाव पर ऑक्सीजन देने पर बच्चे की हालत में सुधार हुआ और वह खतरे से बाहर हो गया।
एसएनसीयू प्रभारी डॉ. असद अली ने बताया कि प्रसव के बाद जब नवजात नहीं रोया और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी तो चिकित्सकों ने उसे एसएनसीयू रेफर कर दिया। एसएनसीयू में सी-पैप मशीन के जरिए नियंत्रित दबाव के साथ ऑक्सीजन देना शुरू किया गया। कुछ ही समय में शिशु की सांसें स्थिर होने लगीं और अब बच्चा खतरे से बाहर है।
बताया कि बीते आठ महीनों में इस सी-पैप सुविधा से सांस लेने में परेशानी वाले 39 नवजातों का सफल उपचार किया गया है। इनमें लगभग 40 प्रतिशत नवजात जिला महिला विंग में जन्मे थे, जबकि शेष अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर किए गए थे।
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उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मामलों में बच्चों को लखनऊ रेफर करना पड़ता था, जिससे समय लगने के कारण जोखिम बढ़ जाता था। लेकिन सी-पैप मशीन की स्थापना के बाद अब जिले में ही ऐसे जटिल मामलों का उपचार संभव हो गया है।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जिले में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। एसएनसीयू, वीएचएसएनडी और पीएमएसएमए जैसी योजनाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और जोखिम की पहचान की जा रही है।
नियमित जांच और समय पर उपचार से कम हो सकता है जोखिम
मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवांगी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान होने वाला एनीमिया (खून की कमी), उच्च रक्तचाप, संक्रमण, मधुमेह और समय से पहले प्रसव नवजात शिशु में श्वसन संकट के प्रमुख कारण हैं। गर्भावस्था के दौरान पंजीकरण, नियमित जांच और समय पर उपचार से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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एसएनसीयू प्रभारी डॉ. असद अली ने बताया कि प्रसव के बाद जब नवजात नहीं रोया और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी तो चिकित्सकों ने उसे एसएनसीयू रेफर कर दिया। एसएनसीयू में सी-पैप मशीन के जरिए नियंत्रित दबाव के साथ ऑक्सीजन देना शुरू किया गया। कुछ ही समय में शिशु की सांसें स्थिर होने लगीं और अब बच्चा खतरे से बाहर है।
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बताया कि बीते आठ महीनों में इस सी-पैप सुविधा से सांस लेने में परेशानी वाले 39 नवजातों का सफल उपचार किया गया है। इनमें लगभग 40 प्रतिशत नवजात जिला महिला विंग में जन्मे थे, जबकि शेष अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर किए गए थे।
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उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मामलों में बच्चों को लखनऊ रेफर करना पड़ता था, जिससे समय लगने के कारण जोखिम बढ़ जाता था। लेकिन सी-पैप मशीन की स्थापना के बाद अब जिले में ही ऐसे जटिल मामलों का उपचार संभव हो गया है।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जिले में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। एसएनसीयू, वीएचएसएनडी और पीएमएसएमए जैसी योजनाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और जोखिम की पहचान की जा रही है।
नियमित जांच और समय पर उपचार से कम हो सकता है जोखिम
मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवांगी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान होने वाला एनीमिया (खून की कमी), उच्च रक्तचाप, संक्रमण, मधुमेह और समय से पहले प्रसव नवजात शिशु में श्वसन संकट के प्रमुख कारण हैं। गर्भावस्था के दौरान पंजीकरण, नियमित जांच और समय पर उपचार से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।