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तरक्की: प्राकृतिक खेती ने बदल डाली रामप्रवेश की किस्मत, 2019 में बढ़ाया कदम, आज सफलता के शिखर पर

Wed, 28 Sep 2022 05:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो मनोज तिवारी, अमर उजाला, बहराइच
मनोज तिवारी, अमर उजाला, बहराइच Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 28 Sep 2022 05:10 PM IST
सार

बहराइच के किसान रामप्रवेश ने प्राकृतिक खेती के दम पर अपनी पहचान बनाई है। कुछ साल पहले तक उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पर खेती के दम पर उन्होंने इतनी तरक्की हासिल की है कि राज्यपाल सहित कई बड़े मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

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this is how rampravesh changed his luck by natural farming.
खेत में लगी फसल दिखाते किसान रामप्रवेश। - फोटो : amar ujala

विस्तार

एक तरफ लोग खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं, कुछ किसान नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं मिहींपुरवा ब्लॉक निवासी किसान रामप्रवेश। सब्जियों व अनाज की प्राकृतिक खेती के दम पर रामप्रवेश ने जिले में अलग पहचान बना ली है। राज्यपाल सहित कई बड़े मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, उनसे प्रभावित होकर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती की ओर रुख किया है। तमाम किसान उनसे तौर-तरीके भी सीख रहे हैं।

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मिहींपुरवा विकास खंड के नैनिहा गांव निवासी 54 वर्षीय किसान रामप्रवेश की माली हालत कुछ साल पहले ठीक नहीं थी। खेती-किसानी में काफी प्रयास के बाद भी उनकी आमदनी में इजाफा नहीं हो रहा था। परिवार का भरण-पोषण तक मुश्किल हो गया था। ऐसे में वह खेती छोड़ने के बारे में सोचने लगे, लेकिन इसी दौरान उन्हें प्राकृतिक खेती की जानकारी हुई। लोगों ने बताया कि इससे कम लागत में काफी कमाई हो जाती है। उन्होंने वरिष्ठ कृषि वैैैज्ञानिक डॉ. बीपी शाही से संपर्क किया और इनसे प्राकृतिक खेती के तौर-तरीके सीखे। इसके बाद 2019 में उन्होंने सब्जियों की प्राकृतिक खेती शुरू कर दी। इस समय रामप्रवेश प्राकृतिक रूप से परवल, कुंदरु, गोभी, आलू, टमाटर, प्याज, पपीता, बैंगन, भिंडी, करेला, तोरई, लौकी आदि सब्जियों का उत्पादन कर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। इसके अलावा गन्ना, गेहूं, धान और फूल की नर्सरी भी प्राकृतिक तरीके से तैयार कर रहे हैं।
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बीते वर्ष रामप्रवेश ने खरीफ प्याज उत्पादन में जिले में पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद कृषि विभाग व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने रामप्रवेश को सम्मानित किया था। राज्यपाल ने भी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया था। रामप्रवेश बताते हैं कि उन्होंने मात्र एक बीघे में खरीफ प्याज की फसल बोई थी जिसमें उन्हें लागत निकालने के बाद 50 हजार का मुनाफा हुआ था। ब्रोकली से भी अच्छा मुनाफा हुआ था। उन्होंने बताया कि इस बार दिल्ली से गोभी की कई नई प्रजातियां मंगवाईं हैं जिनमें लाल व पीले रंग की गोभी भी शामिल है। रामप्रवेश बताते हैं कि प्राकृतिक खेती से धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। भूमि को नुकसान नहीं होता है। उन्होंने बताया कि उनकी सफलता में पत्नी फूलकुमारी का विशेष योगदान है।
रामप्रवेश से प्रभावित होकर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती अपना ली है। किसान रामअधार मौर्य, शिवशंकर सिंह, अरविंद चौहान, अनूप वर्मा, सुरेश वर्मा, मिश्रीलाल चौहान, कंधई, कृपाराम व मस्तराम समेत एक दर्जन से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वहीं, रामकुमार मौर्य, अंबर लाल जायसवाल, रोहित, भगौती प्रसाद व गंगाराम समेत दो दर्जन से अधिक लोग इन दिनों रामप्रवेश से प्राकृतिक खेती के तौर तरीके सीखने के लिए आ रहे हैं।

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