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शराब बनाने वाले हाथ गढ़ने लगे कलाकृतियां
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बहराइच। कभी शराब बनाने के लिए बदनाम रही सोहनी बलई गांव की महिलाएं अब अपनी एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर हैं। इन हाथों ने अब कलाकृतियां बनाना और मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया है। अब यहां की महिलाएं सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं से जुड़कर स्वरोजगार से जुड़ गईं हैं और दूसरी महिलाओं को प्रेरणा दे रहीं हैं। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने शराब बनाने का काम छोड़ दिया है।
जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोहनी बलई गांव शराब बनाने व बेचने के लिए बदनाम रहा है। इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए महीने में कई बार जिला व पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम छापा मारती रही। कई बार टीम को सफलता भी मिल चुकी है। दबिश के दौरान एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार ने गांव की स्थिति को बदलने का निर्णय लिया। एएसपी ने डीएम डॉ. दिनेश चंद्र से मुलाकात की और गांव की यथास्थिति से अवगत कराया। डीएम ने गांव में कैंप लगाकर महिलाओं को जागरूक कर उन्हें इस काम को छोड़ने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी एएसपी ग्रामीण को दी। एएसपी ने गांव में अपनी टीम के साथ पहुंचकर महिलाओं को समझाया और उन्हें मुख्य धारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
एएसपी ने गांव में कई बार अलग-अलग कैंप लगवाया और वहां की महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कैंप लगाकर जागरूक करने का असर यह रहा कि वहां की महिलाओं ने शराब बनाना छोड़ दिया और स्वरोजगार से जुड़ने के लिए गांव में होने वाली ट्रेनिंग में भाग लेनी लगीं। महिलाएं सांस्कृतिक कार्यक्रम, वन डिस्ट्रिक वन प्रोडेक्ट समेत अन्य योजनाओं से जुड़ने लगीं। बीते 15 अगस्त को संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अपनी कला का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया। गांव में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अब शराब बनाने का काम छोड़कर स्वरोजगार से जुड़ गईं हैं।
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इस गांव में थारू समाज के लोग अधिक रहते है। यहां की आबादी चार हजार से अधिक है। शराब बनाने वाली महिलाएं अब मधुमक्खी पालन से जुड़ गईं है या फिर से गेहूं के डंठल से कलाकृतियां बनाकर स्वरोजगार से जुड़कर अपनी जिंदगी संवार रहीं हैं।
मुझे जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने यह काम दिया था। मैं इसमें मनोयोग से लगा रहा। कई बार डीएम से सहयोग भी मांगा तो उन्होंने हर स्तर पर दिया। इसके बाद सफलता हाथ लगी। आगे चलकर और परिवर्तन देखने को मिलेगा।
- अशोक कुमार, एएसपी ग्रामीण, बहराइच
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जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोहनी बलई गांव शराब बनाने व बेचने के लिए बदनाम रहा है। इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए महीने में कई बार जिला व पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम छापा मारती रही। कई बार टीम को सफलता भी मिल चुकी है। दबिश के दौरान एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार ने गांव की स्थिति को बदलने का निर्णय लिया। एएसपी ने डीएम डॉ. दिनेश चंद्र से मुलाकात की और गांव की यथास्थिति से अवगत कराया। डीएम ने गांव में कैंप लगाकर महिलाओं को जागरूक कर उन्हें इस काम को छोड़ने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी एएसपी ग्रामीण को दी। एएसपी ने गांव में अपनी टीम के साथ पहुंचकर महिलाओं को समझाया और उन्हें मुख्य धारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
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एएसपी ने गांव में कई बार अलग-अलग कैंप लगवाया और वहां की महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कैंप लगाकर जागरूक करने का असर यह रहा कि वहां की महिलाओं ने शराब बनाना छोड़ दिया और स्वरोजगार से जुड़ने के लिए गांव में होने वाली ट्रेनिंग में भाग लेनी लगीं। महिलाएं सांस्कृतिक कार्यक्रम, वन डिस्ट्रिक वन प्रोडेक्ट समेत अन्य योजनाओं से जुड़ने लगीं। बीते 15 अगस्त को संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अपनी कला का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया। गांव में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अब शराब बनाने का काम छोड़कर स्वरोजगार से जुड़ गईं हैं।
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इस गांव में थारू समाज के लोग अधिक रहते है। यहां की आबादी चार हजार से अधिक है। शराब बनाने वाली महिलाएं अब मधुमक्खी पालन से जुड़ गईं है या फिर से गेहूं के डंठल से कलाकृतियां बनाकर स्वरोजगार से जुड़कर अपनी जिंदगी संवार रहीं हैं।
मुझे जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने यह काम दिया था। मैं इसमें मनोयोग से लगा रहा। कई बार डीएम से सहयोग भी मांगा तो उन्होंने हर स्तर पर दिया। इसके बाद सफलता हाथ लगी। आगे चलकर और परिवर्तन देखने को मिलेगा।
- अशोक कुमार, एएसपी ग्रामीण, बहराइच