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अग्निपथ पर चलने को तैयार नहीं युवा, भूतपूर्व सैनिकों भी खफा
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बहराइच। सेना भर्ती में सरकार की ओर से अग्निपथ योजना लाई गई है। इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाएगा और उसके बाद रिटायरमेंट दिया जाएगा। सरकार की ओर से इस योजना को युवाओं के लिए बेहतरीन मौका करार दिया जा रहा है, लेकिन जिले के युवा इस योजना को सिरे से खारिज करते नजर आ रहे हैं। युवाओं का मानना है कि यह देश सेवा व जज्बे के साथ खिलवाड़ है। सरकार को इस योजना में संशोधन करना चाहिए और देश की सुरक्षा में संविदा को नहीं लाना चाहिए। वहीं, भूतपूर्व सैनिक भी सरकार की इस योजना के खिलाफ हैं।
भूतपूर्व सैनिक इसे देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं मान रहे हैं। सैनिकों का मानना है कि सिविल मामलों में तो यह योजना ठीक है लेकिन देश की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। सरकार की इस नीति से युवाओं में देश प्रेम का जज्बा खत्म हो जाएगा और इस योजना के तहत भर्ती होने वाला युवा हर वक्त नौकरी जाने व भविष्य को लेकर चिंतित रहेगा। इससे उसके अंदर देश के लिए मर-मिटने का जज्बा मजबूत नहीं हो पाएगा। खास बात यह है कि जो युवा सेना में जाने का सपना देख रहे हैं और देश सेवा के लिए सुबह-शाम सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं उनमें भी मायूसी है।
सेवानिवृत्त एमसीपीओ राकेश पांडेय ने बताया कि सेना में अनुशासन होता है। चार साल में रिटायर होने वाला युवा किसी अन्य जगह नौकरी नहीं कर पाएगा। चार साल की नौकरी के दौरान अगर उसे गोली लगती है या कोई अन्य दुर्घटना होती है तो उसके परिवार को क्या मिलेगा इस पर भी स्थिति साफ नहीं है। सरकार को इसे 10 साल करना चाहिए। सेवानिवृत्त नायक गुरविंदर सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह गलत है। युवा सेना में भर्ती होगा और उसे चार साल में रिटायर कर दिया जाएगा तो उसे कौन नौकरी पर रखेगा।
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विधायक व सांसद को सरकार आजीवन पेंशन देती है लेकिन जो देश पर मर मिटने के लिए भर्ती होगा उसे मात्र चार साल में रिटायर कर दिया जाएगा। सेवानिवृत्त सूबेदार जाकिर हुसैन ने बताया कि यह देश के लिए मर मिटने की नौकरी है। सेवानिवृत्त सूबेदार बलविंदर सिंह इस योजना के पक्ष में दिखे। उन्होंने कहा कि यह सही है। इससे युवाओं को सेना के माहौल में रहकर चार साल सीखने का मौका मिलेगा। चार साल अनुशासन में रहने के बाद युवा अर्धसैनिक बलों सीआईएसएफ, सीआरपीएफ आदि में आसानी से भर्ती हो सकेंगे।
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भूतपूर्व सैनिक इसे देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं मान रहे हैं। सैनिकों का मानना है कि सिविल मामलों में तो यह योजना ठीक है लेकिन देश की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। सरकार की इस नीति से युवाओं में देश प्रेम का जज्बा खत्म हो जाएगा और इस योजना के तहत भर्ती होने वाला युवा हर वक्त नौकरी जाने व भविष्य को लेकर चिंतित रहेगा। इससे उसके अंदर देश के लिए मर-मिटने का जज्बा मजबूत नहीं हो पाएगा। खास बात यह है कि जो युवा सेना में जाने का सपना देख रहे हैं और देश सेवा के लिए सुबह-शाम सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं उनमें भी मायूसी है।
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सेवानिवृत्त एमसीपीओ राकेश पांडेय ने बताया कि सेना में अनुशासन होता है। चार साल में रिटायर होने वाला युवा किसी अन्य जगह नौकरी नहीं कर पाएगा। चार साल की नौकरी के दौरान अगर उसे गोली लगती है या कोई अन्य दुर्घटना होती है तो उसके परिवार को क्या मिलेगा इस पर भी स्थिति साफ नहीं है। सरकार को इसे 10 साल करना चाहिए। सेवानिवृत्त नायक गुरविंदर सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह गलत है। युवा सेना में भर्ती होगा और उसे चार साल में रिटायर कर दिया जाएगा तो उसे कौन नौकरी पर रखेगा।
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विधायक व सांसद को सरकार आजीवन पेंशन देती है लेकिन जो देश पर मर मिटने के लिए भर्ती होगा उसे मात्र चार साल में रिटायर कर दिया जाएगा। सेवानिवृत्त सूबेदार जाकिर हुसैन ने बताया कि यह देश के लिए मर मिटने की नौकरी है। सेवानिवृत्त सूबेदार बलविंदर सिंह इस योजना के पक्ष में दिखे। उन्होंने कहा कि यह सही है। इससे युवाओं को सेना के माहौल में रहकर चार साल सीखने का मौका मिलेगा। चार साल अनुशासन में रहने के बाद युवा अर्धसैनिक बलों सीआईएसएफ, सीआरपीएफ आदि में आसानी से भर्ती हो सकेंगे।