{"_id":"6259b15ab9609a433b5442bc","slug":"bahraich-bahraich-news-lko626282426","type":"story","status":"publish","title_hn":"बार-बार दरक रहा ओवरब्रिज, जिम्मेदार चुप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बार-बार दरक रहा ओवरब्रिज, जिम्मेदार चुप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जरवलरोड (बहराइच)। लखनऊ-बहराइच मार्ग पर जरवलरोड स्थित मानक के विपरीत निर्मित ओवरब्रिज (संजय सेतु) अपने निर्माण वर्ष से ही सवालों के घेरे में है। हालत यह है कि ओवरब्रिज निर्माण वर्ष के बाद कई बार दरक चुका है। ब्रिज पर आवागमन दो बार बंद किया जा चुका है। इसके बाद भी ओवरब्रिज का मार्ग दुरुस्त नहीं हो पा रहा है। मार्ग पर बनी ठोकर बड़े हादसे को दावत दे रही है। इसके अलावा संजय सेतु मार्ग में बार-बार आ रही गैपिंग जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। मामले में जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
लखनऊ-बहराइच मार्ग के बीच जरवलरोड स्थित ग्राम कुड़वा के निकट रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर पीएनसी कंपनी द्वारा लगभग 60 करोड़ की लागत से 14 सौ मीटर लंबे ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था। ओवरब्रिज का लोकार्पण 28 अगस्त, 2018 को हुआ था। ओवरब्रिज के संचालन से लखनऊ, बहराइच, रुपईडीहा, नानपारा व नेपाल से आने-जाने वाले वाहनों को रेलवे क्रॉसिंग से छुटकारा मिल गया था, लेकिन निर्माण वर्ष से ही मानक के विपरीत हुए ओवरब्रिज निर्माण पर सवाल उठने लगे थे। हालत यह है कि ओवरब्रिज के निर्माण वर्ष के चार माह बाद 30 दिसंबर, 2018 को नवनिर्मित ओवरब्रिज का सीमेंटेड पैनल टूटने पर ब्रिज को दो माह के लिए बंद कर दिया गया था।
ब्रिज पर आवागमन ठप होने के बाद कैसरगंज के तत्कालीन एसडीएम रामजीत मौर्या ने ब्रिज का निरीक्षण कर एनएचएआई व पीएनसी कंपनी के अधिकारियों से वार्ता की थी। ब्रिज तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे। दो माह बाद ब्रिज पर आवागमन बहाल हुआ, लेकिन कुछ ही माह में फिर दिक्कत आ गई। सूचना पर जरवलरोड के तत्कालीन एसओ हर्षवर्धन सिंह ने मौके पर पहुंचकर खतरे को देखते हुए वाहनों का आवागमन बंद करा दिया था। हलात यह है कि ओवरब्रिज अपने निर्माण के बाद चार साल के दौरान पांच बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। मौजूदा समय में भी ओवरब्रिज मार्ग कई स्थानों से दरक चुका है। ब्रिज से प्रतिदिन जिले के आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का आना-जाना रहता है, लेकिन इसके बाद भी वे चुप्पी साधे हैं।
विज्ञापन
मौजूदा समय में ब्रिज के ज्वाइंट में आई लंबी गैपिंग हादसे को दावत दे रही है। हालांकि, मरम्मत का कार्य प्रारंभ कराया गया है, लेकिन बार-बार पुल क्षतिग्रस्त होने से जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
विज्ञापन
लखनऊ-बहराइच मार्ग के बीच जरवलरोड स्थित ग्राम कुड़वा के निकट रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर पीएनसी कंपनी द्वारा लगभग 60 करोड़ की लागत से 14 सौ मीटर लंबे ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था। ओवरब्रिज का लोकार्पण 28 अगस्त, 2018 को हुआ था। ओवरब्रिज के संचालन से लखनऊ, बहराइच, रुपईडीहा, नानपारा व नेपाल से आने-जाने वाले वाहनों को रेलवे क्रॉसिंग से छुटकारा मिल गया था, लेकिन निर्माण वर्ष से ही मानक के विपरीत हुए ओवरब्रिज निर्माण पर सवाल उठने लगे थे। हालत यह है कि ओवरब्रिज के निर्माण वर्ष के चार माह बाद 30 दिसंबर, 2018 को नवनिर्मित ओवरब्रिज का सीमेंटेड पैनल टूटने पर ब्रिज को दो माह के लिए बंद कर दिया गया था।
विज्ञापन
ब्रिज पर आवागमन ठप होने के बाद कैसरगंज के तत्कालीन एसडीएम रामजीत मौर्या ने ब्रिज का निरीक्षण कर एनएचएआई व पीएनसी कंपनी के अधिकारियों से वार्ता की थी। ब्रिज तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे। दो माह बाद ब्रिज पर आवागमन बहाल हुआ, लेकिन कुछ ही माह में फिर दिक्कत आ गई। सूचना पर जरवलरोड के तत्कालीन एसओ हर्षवर्धन सिंह ने मौके पर पहुंचकर खतरे को देखते हुए वाहनों का आवागमन बंद करा दिया था। हलात यह है कि ओवरब्रिज अपने निर्माण के बाद चार साल के दौरान पांच बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। मौजूदा समय में भी ओवरब्रिज मार्ग कई स्थानों से दरक चुका है। ब्रिज से प्रतिदिन जिले के आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का आना-जाना रहता है, लेकिन इसके बाद भी वे चुप्पी साधे हैं।
विज्ञापन
मौजूदा समय में ब्रिज के ज्वाइंट में आई लंबी गैपिंग हादसे को दावत दे रही है। हालांकि, मरम्मत का कार्य प्रारंभ कराया गया है, लेकिन बार-बार पुल क्षतिग्रस्त होने से जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।