{"_id":"622b879acde2d323b9384374","slug":"bahraich-bahraich-news-lko621371418","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुरी तरीके से खिसका बसपा व कांग्रेस का जनाधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुरी तरीके से खिसका बसपा व कांग्रेस का जनाधार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। विधानसभा चुनाव 2017 की अपेक्षा इस बार बहुजन समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के जनाधार में भारी कमी देखने को मिली है। जिले के मतदाताओं ने बसपा व कांग्रेस प्रत्याशियों को सिरे से खारिज कर दिया है। आलम यह रहा कि विधानसभा चुनाव 2017 में जिले की सातों विधानसभा सीटों पर 10 से 20 प्रतिशत तक मत पाने वाली बहुजन समाजवादी पार्टी इस बार 10 प्रतिशत का आंकड़ा भी नहीं छू सकी।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति रही राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की जिसने 2017 का चुनाव सपा के साथ गठबंधन में लड़ा था और 20 से 40 प्रतिशत के अंदर मत प्राप्त किए थे, लेकिन इस बार संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह हासिये पर नजर आई।
हालत यह रही कि कांग्रेस को एक से दो प्रतिशत मत से ही संतोष करना पड़ा। यही नहीं कई विधानसभा सीटों पर मत प्रतिशत एक से भी कम रहा। कांग्रेस किसी भी विधानसभा में पांच प्रतिशत मतों का आंकड़ा नहीं छू सकी। अगर बात भाजपा व सपा की करें तो कई विधानसभा सीटों पर 2017 के चुनाव की अपेक्षा इन दोनों के मत प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। बसपा का वोट बैंक कहे जाने वाले दलित मतदाता पूरी तरह भाजपा के खेमे में नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे ज्यादा खराब स्थिति रही राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की जिसने 2017 का चुनाव सपा के साथ गठबंधन में लड़ा था और 20 से 40 प्रतिशत के अंदर मत प्राप्त किए थे, लेकिन इस बार संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह हासिये पर नजर आई।
विज्ञापन
हालत यह रही कि कांग्रेस को एक से दो प्रतिशत मत से ही संतोष करना पड़ा। यही नहीं कई विधानसभा सीटों पर मत प्रतिशत एक से भी कम रहा। कांग्रेस किसी भी विधानसभा में पांच प्रतिशत मतों का आंकड़ा नहीं छू सकी। अगर बात भाजपा व सपा की करें तो कई विधानसभा सीटों पर 2017 के चुनाव की अपेक्षा इन दोनों के मत प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। बसपा का वोट बैंक कहे जाने वाले दलित मतदाता पूरी तरह भाजपा के खेमे में नजर आए।
विज्ञापन