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25 गांवों में हमेशा रहता है हमले का खतरा
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बहराइच। कतर्नियाघाट रेंज के 25 गांवों में मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा हमेशा बना रहता है। यहां के ग्रामीणों की जिंदगी हमेशा खतरे में रहती है। दूसरी तरफ, वन्य जीव संघर्ष से बचाव करने वाली वन विभाग की टीम स्टाफ की कमी से जूझ रही है। आलम यह है कि सात रेंजों में से पांच में प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी कमान संभाले हुए है। मानव को वन्य जीव से बचाने के लिए वन विभाग के पास जागरुकता फैलाने के अलावा कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में जंगल से सटे गांवों में इन दिनों तेंदुए का हमला बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे लगभग 86 गांव आते हैं। इनमें 25 गांव ऐसे हैं जहां जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है। जंगल से निकलकर कब बाघ व तेंदुआ ग्रामीणों को शिकार बना लें, इसका कोई भरोसा नहीं है। बचाव के लिए ग्रामीणों को खुद ही जागरूक रहना होगा। कुछ गांव ऐसे हैं जहां लगभग-लगभग हर दूसरे माह कोई न कोई तेंदुए के हमले में घायल हो रहा है। जंगल में निवास कर रहे बाघ, तेंदुए व अन्य जंगली जानवरों की सुरक्षा व इंसान को भी बचाने की जिम्मेदारी वन विभाग के पास है, लेकिन इन दिनों वन विभाग भी अपने आपमें अधूरा है। इस समय वन विभाग के पास 50 प्रतिशत स्टाफ ही बचा है। इसी से जागरूक करने के अलावा गश्त की जाती है। संवाद
मोतीपुर रेंज में सोमवार शाम तेंदुए ने दो बच्चों को अपना निवाला बनाया। इससे पहले साल 2021 की 30 जुलाई व एक अगस्त को भी मासूम को निवाला बनाया था। वन विभाग का मानना है कि ग्रामीण अपने बच्चों को अकेले जंगल की ओर न जाने दें तो घटनाओं पर विराम लग सकता है।
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झाला, मनगौढ़िया, गायघाट, सेमरीघटही, हरखापुर, अयोध्यापुरवा, गंगापुर, मटेही, पकड़िया दीवान, चंदनपुर, नौसार गुमटिहा, मधवापुर व गुलहना समेत 25 गांव ऐसे हैं जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा लगातार बना रहता है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार की रेंज में बसे लगभग 25 गांवों में मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा है। ये ऐसे गांव हैं जो जंगल के बहुत ही करीब बसे हुए हैं। जानवरों से बचाव के लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। विभाग में स्टाफ की कमी होने के बावजूद कर्तव्यों का निर्वहन किया जा रहा है। घटना के बाद से गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट
27 दिसंबर - आठ वर्षीय प्रमोद कुमार पर तेंदुए ने हमला किया।
25 दिसंबर - 45 वर्षीय मंसूर अहमद निवासी घोसियाना पर तेंदुए का हमला।
23 दिसंबर - छह वर्षीय धर्म प्रकाश निवासी गोड़ियनपुरवा पर तेंदुए का हमला।
10 दिसंबर - 50 वर्षीय बुजुर्ग काशीराम निवासी हरखापुर पर तेंदुए का हमला।
06 दिसंबर - 15 वर्षीय गुलशन कुमार निवासी मधवापुर पर तेंदुए का हमला।
04 दिसंबर - 24 वर्षीय सुरेंद्र कुमार निवासी खुटेहना फार्म पर तेंदुए का हमला।
01 दिसंबर - पांच वर्षीय राम प्रसाद निवासी पकड़ियादीवान पर तेंदुए का हमला।
26 नवंबर - सात वर्षीय काजल निवासी नारायनटांडा पर तेंदुए का हमला।
25 नवंबर - 50 वर्षीय बुजुर्ग मोहम्मद उमर निवासी दलजीतपुरवा पर तेंदुए का हमला।
25 नवंबर - 40 वर्षीय सद्दीक निवासी दलजीतपुरवा पर तेंदुए का हमला।
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कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में जंगल से सटे गांवों में इन दिनों तेंदुए का हमला बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे लगभग 86 गांव आते हैं। इनमें 25 गांव ऐसे हैं जहां जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है। जंगल से निकलकर कब बाघ व तेंदुआ ग्रामीणों को शिकार बना लें, इसका कोई भरोसा नहीं है। बचाव के लिए ग्रामीणों को खुद ही जागरूक रहना होगा। कुछ गांव ऐसे हैं जहां लगभग-लगभग हर दूसरे माह कोई न कोई तेंदुए के हमले में घायल हो रहा है। जंगल में निवास कर रहे बाघ, तेंदुए व अन्य जंगली जानवरों की सुरक्षा व इंसान को भी बचाने की जिम्मेदारी वन विभाग के पास है, लेकिन इन दिनों वन विभाग भी अपने आपमें अधूरा है। इस समय वन विभाग के पास 50 प्रतिशत स्टाफ ही बचा है। इसी से जागरूक करने के अलावा गश्त की जाती है। संवाद
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मोतीपुर रेंज में सोमवार शाम तेंदुए ने दो बच्चों को अपना निवाला बनाया। इससे पहले साल 2021 की 30 जुलाई व एक अगस्त को भी मासूम को निवाला बनाया था। वन विभाग का मानना है कि ग्रामीण अपने बच्चों को अकेले जंगल की ओर न जाने दें तो घटनाओं पर विराम लग सकता है।
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झाला, मनगौढ़िया, गायघाट, सेमरीघटही, हरखापुर, अयोध्यापुरवा, गंगापुर, मटेही, पकड़िया दीवान, चंदनपुर, नौसार गुमटिहा, मधवापुर व गुलहना समेत 25 गांव ऐसे हैं जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा लगातार बना रहता है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार की रेंज में बसे लगभग 25 गांवों में मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा है। ये ऐसे गांव हैं जो जंगल के बहुत ही करीब बसे हुए हैं। जानवरों से बचाव के लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। विभाग में स्टाफ की कमी होने के बावजूद कर्तव्यों का निर्वहन किया जा रहा है। घटना के बाद से गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट
27 दिसंबर - आठ वर्षीय प्रमोद कुमार पर तेंदुए ने हमला किया।
25 दिसंबर - 45 वर्षीय मंसूर अहमद निवासी घोसियाना पर तेंदुए का हमला।
23 दिसंबर - छह वर्षीय धर्म प्रकाश निवासी गोड़ियनपुरवा पर तेंदुए का हमला।
10 दिसंबर - 50 वर्षीय बुजुर्ग काशीराम निवासी हरखापुर पर तेंदुए का हमला।
06 दिसंबर - 15 वर्षीय गुलशन कुमार निवासी मधवापुर पर तेंदुए का हमला।
04 दिसंबर - 24 वर्षीय सुरेंद्र कुमार निवासी खुटेहना फार्म पर तेंदुए का हमला।
01 दिसंबर - पांच वर्षीय राम प्रसाद निवासी पकड़ियादीवान पर तेंदुए का हमला।
26 नवंबर - सात वर्षीय काजल निवासी नारायनटांडा पर तेंदुए का हमला।
25 नवंबर - 50 वर्षीय बुजुर्ग मोहम्मद उमर निवासी दलजीतपुरवा पर तेंदुए का हमला।
25 नवंबर - 40 वर्षीय सद्दीक निवासी दलजीतपुरवा पर तेंदुए का हमला।