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36 कर्मियों को मिलेगा भुगतान
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बहराइच। राजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज में 36 कार्मिकों के वेतन भुगतान का अनुमोदन शासन से प्राप्त हो गया है। जल्द ही वर्षों से बकाया वेतन का भुगतान भी हो जाएगा, लेकिन शासन ने अपने पत्र में इन कार्मिकों को अतिरिक्त की श्रेणी में रखा तथा भविष्य में इनसे कार्य न लेने की व्यवस्था भी दे दी। ये वही कार्मिक हैं जिनकी नियुक्ति के बाद कोरोना काल में इनसे जमकर काम लिया गया और जब वेतन भुगतान की बारी आई तो बाहर कर दिया गया। विवाद बढ़ा तब सामने आया कि हुक्मरानों ने इनकी नियुक्ति में मोटी रिश्वत ले रखी है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने इस प्रकरण की जांच का निर्देश भी दिया था।
अमर उजाला ने इन कार्मिकों का मुद्दा उठाया था। जब इन कार्मिकों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का घेराव किया तो उन्होंने दबाव में आकर 10 कार्य दिवस के भीतर सभी कार्मिकों का वेतन भुगतान करने का आश्वासन पत्र दिया था। यह समय बीतने के बाद भी जब वेतन भुगतान नहीं हुआ तो कार्मिकों ने फिर घेराव की चेतावनी दी थी। लंबी जद्दोजहद के बाद शासन ने वेतन भुगतान की अनुमति तो दी, लेकिन इन कार्मिकों को पैदल कर दिया। शासन ने अपने पत्र में इनको अतिरिक्त माना और वेतन भुगतान के बाद भविष्य में काम न लेने का भी फैसला किया।
इन कार्मिकों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि उनकी नियुक्ति में रिश्वत ली गई थी। कोरोना काल में इनसे अस्पतालों में पोछा तक लगवाया गया। नियुक्ति में कार्यदाई संस्था के अलावा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और पूर्व सीएमएस डीके सिंह की भूमिका साफ-सुथरी नहीं थी। रिश्वत लेकर नियुक्ति की गई थी। अमर उजाला ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की तो स्वास्थ्य महानिदेशक ने जांच टीम गठित कर दी थी, लेकिन हुक्मरानों ने अपने प्रयास से इस जांच को दबवा दिया।
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अमर उजाला ने इन कार्मिकों का मुद्दा उठाया था। जब इन कार्मिकों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का घेराव किया तो उन्होंने दबाव में आकर 10 कार्य दिवस के भीतर सभी कार्मिकों का वेतन भुगतान करने का आश्वासन पत्र दिया था। यह समय बीतने के बाद भी जब वेतन भुगतान नहीं हुआ तो कार्मिकों ने फिर घेराव की चेतावनी दी थी। लंबी जद्दोजहद के बाद शासन ने वेतन भुगतान की अनुमति तो दी, लेकिन इन कार्मिकों को पैदल कर दिया। शासन ने अपने पत्र में इनको अतिरिक्त माना और वेतन भुगतान के बाद भविष्य में काम न लेने का भी फैसला किया।
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इन कार्मिकों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि उनकी नियुक्ति में रिश्वत ली गई थी। कोरोना काल में इनसे अस्पतालों में पोछा तक लगवाया गया। नियुक्ति में कार्यदाई संस्था के अलावा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और पूर्व सीएमएस डीके सिंह की भूमिका साफ-सुथरी नहीं थी। रिश्वत लेकर नियुक्ति की गई थी। अमर उजाला ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की तो स्वास्थ्य महानिदेशक ने जांच टीम गठित कर दी थी, लेकिन हुक्मरानों ने अपने प्रयास से इस जांच को दबवा दिया।
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