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शारदीय नवरात्र आज से, पूजन-अर्चन के लिए सजे मंदिर
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बहराइच। शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे हैं। इसके लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मंदिर सज गए हैं। माता रानी की आराधना और पूजा के लिए बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने भीड़ उमड़ रही है। वहीं, मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए पंडाल की स्थापना का कार्य भी शुरू हो गया है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में करीब 1500 पंडालों की स्थापना होगी। मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात कर दी गई है। शारदीय नवरात्र की तैयारियां जोरों पर हैं।
शारदीय नवरात्र को देखते हुए घरों में भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। घरों में कलश स्थापना के साथ अन्य तैयारियों का उत्साह देखा जा सकता है। कोरोना महामारी के बाद इस बार फिर से पंडालों में भी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना होने जा रही है। इसे लेकर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बहराइच शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1500 प्रतिमाओं की स्थापना होनी है जिनके पंडाल सजाने का काम जोरों पर चल रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना होगी। मंदिरों के सामने दुकानें भी सज गई हैं जबकि मंदिरों में भी पूजा-अर्चना को लेकर तैयारियों में पुजारी व प्रबंधक जुटे हैं।
पंडित राधाकृष्ण पाठक ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बृहस्पतिवार को सूर्योदय से सुबह आठ बजे तक है। पूर्वाह्न 11.15 से 12.07 बजे तक भी शुभ समय रहेगा। इसके अलावा दिन में कभी भी कलश स्थापना की जा सकेगी।
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शारदीय नवरात्र को देखते हुए घरों में भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। घरों में कलश स्थापना के साथ अन्य तैयारियों का उत्साह देखा जा सकता है। कोरोना महामारी के बाद इस बार फिर से पंडालों में भी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना होने जा रही है। इसे लेकर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बहराइच शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1500 प्रतिमाओं की स्थापना होनी है जिनके पंडाल सजाने का काम जोरों पर चल रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना होगी। मंदिरों के सामने दुकानें भी सज गई हैं जबकि मंदिरों में भी पूजा-अर्चना को लेकर तैयारियों में पुजारी व प्रबंधक जुटे हैं।
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पंडित राधाकृष्ण पाठक ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बृहस्पतिवार को सूर्योदय से सुबह आठ बजे तक है। पूर्वाह्न 11.15 से 12.07 बजे तक भी शुभ समय रहेगा। इसके अलावा दिन में कभी भी कलश स्थापना की जा सकेगी।
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