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नदी लील रही मकान व खेत, मदद का नहीं इंतजाम
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बहराइच। सरयू नदी खेती योग्य जमीन व मकानों को लील रही है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से मुआवजे के लिए लिस्ट ही नहीं बनाई गई है जिससे पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल सका है। वहीं, नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के बावजूद रिहायशी इलाकों में पानी नहीं भरा है। इस वजह से अभी तक लंच पैकेट भी वितरित नहीं हो सके हैं। प्रशासन बाढ़ आने पर पीड़ितों को मदद देने की बात कह रहा है। अब तक मिहींपुरवा व महसी के 850 लोगों को सिर्फ राशन किट वितरित किया गया है।
जिले में प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा भारी तबाही होती है। इस बार भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर दो बार अधिक हुआ है। बाढ़ द्वारा नुकसान होने पर जिला प्रशासन की ओर से लंच पैकेट, राशन किट व अन्य सामान वितरित किए जाते हैं। इसके लिए टेंडर भी होता है। लेकिन इस बार अभी तक टेंडर नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण प्रशासन गांवों में बाढ़ का पानी न होने का बता रहा है। वहीं महसी और मोतीपुर तहसील के 40 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए। लेकिन प्रशासन के मुताबिक अभी तक गांव में पानी नहीं आया है। जिससे किसी को आपदा राहत कोष से बाढ़ के लिए मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि मोतीपुर तहसील, कैसरगंज और महसी तहसील क्षेत्र में इस समय नदी कटान करते हुए मकानों और खेती योग्य जमीन को अपने में समाहित किया जा रहा है। जिससे कटान पीड़ित लोग तटबंध या प्राथमिक स्कूलों में शरण लिए हुए हैं। इतना ही नहीं पानी अधिक होने से शिवपुर, महसी और जरवल विकास खंड में कई लोग जान भी गंवा चुके हैं। बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से मदद दी गई है। जबकि नदी व बाढ़ से सभी पीड़ित ग्रामीण मुआवजे के लिए प्रशासन की राह तक रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक गांवों में बाढ़ न आने का दावा किया जा रहा है। जिससे सिर्फ दो विकास खंड में राशन ही वितरित किया जा सका है।
मोतीपुर तहसील में तहसील प्रशासन की ओर से 500 पैकेट खाद्यान्न किट का वितरण किया गया है। जबकि महसी में 350 लोगों को वितरित किया गया है। वहीं मिहींपुरवा में 750 पैकेट खाद्यान्न किट की और मांग की गई है।
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बाढ़ पीड़ितों को खाद्यान्न किट वितरित करने के लिए सिंघल ट्रेडर्स की ओर से पांच लाख रुपये जमानत राशि जमा की गई है, लेकिन अभी तक लंच पैकेट व अन्य वस्तुओं का वितरण शुरू नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण बाढ़ का रिहायशी इलाके में न आना है।
जिले की तीन तहसील बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके लिए कार्य योजना भी बनाकर शासन को भेजी गई थी, लेकिन इस बार अभी तक रिहायशी क्षेत्र में बाढ़ का पानी नहीं भरा है। लेकिन अभी समय भी है। बाढ़ आने वाले समय में भी आ सकती है। जिस तहसील से जो खाद्यान्न मांगी जाती है, वहां खाद्यान्न भेज दिया जाता है।
जयचंद्र पांडेय, एडीएम, बहराइच
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जिले में प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा भारी तबाही होती है। इस बार भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर दो बार अधिक हुआ है। बाढ़ द्वारा नुकसान होने पर जिला प्रशासन की ओर से लंच पैकेट, राशन किट व अन्य सामान वितरित किए जाते हैं। इसके लिए टेंडर भी होता है। लेकिन इस बार अभी तक टेंडर नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण प्रशासन गांवों में बाढ़ का पानी न होने का बता रहा है। वहीं महसी और मोतीपुर तहसील के 40 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए। लेकिन प्रशासन के मुताबिक अभी तक गांव में पानी नहीं आया है। जिससे किसी को आपदा राहत कोष से बाढ़ के लिए मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि मोतीपुर तहसील, कैसरगंज और महसी तहसील क्षेत्र में इस समय नदी कटान करते हुए मकानों और खेती योग्य जमीन को अपने में समाहित किया जा रहा है। जिससे कटान पीड़ित लोग तटबंध या प्राथमिक स्कूलों में शरण लिए हुए हैं। इतना ही नहीं पानी अधिक होने से शिवपुर, महसी और जरवल विकास खंड में कई लोग जान भी गंवा चुके हैं। बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से मदद दी गई है। जबकि नदी व बाढ़ से सभी पीड़ित ग्रामीण मुआवजे के लिए प्रशासन की राह तक रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक गांवों में बाढ़ न आने का दावा किया जा रहा है। जिससे सिर्फ दो विकास खंड में राशन ही वितरित किया जा सका है।
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मोतीपुर तहसील में तहसील प्रशासन की ओर से 500 पैकेट खाद्यान्न किट का वितरण किया गया है। जबकि महसी में 350 लोगों को वितरित किया गया है। वहीं मिहींपुरवा में 750 पैकेट खाद्यान्न किट की और मांग की गई है।
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बाढ़ पीड़ितों को खाद्यान्न किट वितरित करने के लिए सिंघल ट्रेडर्स की ओर से पांच लाख रुपये जमानत राशि जमा की गई है, लेकिन अभी तक लंच पैकेट व अन्य वस्तुओं का वितरण शुरू नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण बाढ़ का रिहायशी इलाके में न आना है।
जिले की तीन तहसील बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके लिए कार्य योजना भी बनाकर शासन को भेजी गई थी, लेकिन इस बार अभी तक रिहायशी क्षेत्र में बाढ़ का पानी नहीं भरा है। लेकिन अभी समय भी है। बाढ़ आने वाले समय में भी आ सकती है। जिस तहसील से जो खाद्यान्न मांगी जाती है, वहां खाद्यान्न भेज दिया जाता है।
जयचंद्र पांडेय, एडीएम, बहराइच