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एतिहासिक फैसले ने दिया समाज को कड़ा संदेश
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बहराइच। नानपारा की दिल दहला देने वाली वारदात ने सिंहनी को छीन लिया मगर उसके साथ वहशीपन की हदें पार करने वाले को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाकर समाज को एक संदेश दिया है। अब दिल में इस तरह की दरिंदगी रखने वाले सौ बार सोचेंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पुलिस ने इसकी सराहना की है। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो संत प्रताप सिंह ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के लिए कई नजीर पेश की गईं। इसमें अब्दुल मन्नान बनाम बिहार सरकार समेत अन्य मामलों का हवाला दिया गया। डीजीसी क्रिमनल मुन्नूलाल मिश्रा व विशेष लोक अभियोजक संतोष और सुरेंद्र मौर्या का कहना है कि यह घटना अपने आप में जघन्य अपराधहै। डेढ़ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या किए जाने को कोर्ट ने गंभीर अपराध माना और अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई गई। यह फैसला समाज को एक संदेश देगा।
28 दिन में पेश की चार्जशीट
पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने बताया कि नानपारा में मासूम के साथ इंसान रूपी हैवान ने जो कृत्य किया था, उस मामले में विवेचक द्वारा साक्ष्यों को एकत्रित कर महज 28 दिन में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार ने बताया कि कोर्ट के निर्देशन में पुलिस ने पैरवी कर 37 दिन के अंदर ही डीएनए रिपोर्ट प्राप्त कर ली थी जिसके आधार पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए परशुराम को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह अपराधियों के लिए कड़े कानून का एक संदेश भी है।
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वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पुलिस ने इसकी सराहना की है। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो संत प्रताप सिंह ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के लिए कई नजीर पेश की गईं। इसमें अब्दुल मन्नान बनाम बिहार सरकार समेत अन्य मामलों का हवाला दिया गया। डीजीसी क्रिमनल मुन्नूलाल मिश्रा व विशेष लोक अभियोजक संतोष और सुरेंद्र मौर्या का कहना है कि यह घटना अपने आप में जघन्य अपराधहै। डेढ़ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या किए जाने को कोर्ट ने गंभीर अपराध माना और अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई गई। यह फैसला समाज को एक संदेश देगा।
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28 दिन में पेश की चार्जशीट
पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने बताया कि नानपारा में मासूम के साथ इंसान रूपी हैवान ने जो कृत्य किया था, उस मामले में विवेचक द्वारा साक्ष्यों को एकत्रित कर महज 28 दिन में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार ने बताया कि कोर्ट के निर्देशन में पुलिस ने पैरवी कर 37 दिन के अंदर ही डीएनए रिपोर्ट प्राप्त कर ली थी जिसके आधार पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए परशुराम को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह अपराधियों के लिए कड़े कानून का एक संदेश भी है।
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