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सिपाहियों पर कार्रवाई, थानाध्यक्ष बेकसूर कैसे
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बहराइच। विशेश्वरगंज थाने में तैनात दो सिपाही क्षेत्र के एक युवक को हिरासत में लेकर थाने लाते हैं, उसको अवैध तरीके से हिरासत में रखते हैं और छोड़ने के लिए पैसे की डिमांड करते हैं। पीड़ित थाने के बाहर आता है.. फिर गोंडा डीआईजी के कार्यालय पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाता है। डीआईजी जांच कराकर दोनों सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज करवाते हैं। लेकिन एसएचओ को यह सब बातें नहीं पता चल पाती हैं। यह तब है, जब थानाध्यक्ष के कंधे पर एसपी ने थाने को चलाने का जिम्मा दे रखा है। डीआईजी साहब! ऐसे में यह कैसे मान लिया जाए कि थानाध्यक्ष बेकसूर हैं। अगर कुछ नहीं पता चला तो लापरवाही है और लापरवाही पर कोई कार्रवाई न होना क्षेत्र में चर्चा का विषय है।
देवीपाटन मंडल के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने बताया कि रणवरिया गांव निवासी तंजीर ने शिकायत की थी कि विश्वेश्वरगंज थाने में तैनात दो सिपाहियों ने उसे हिरासत से छोड़ने के बदले पैसे की मांग की। एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार को जांच सौंपी गई थी। जांच में सिपाही शत्रुहन प्रियदर्शी व संजय कुमार यादव दोषी पाए गए। एएसपी ग्रामीण की रिपोर्ट मिलने के बाद डीआईजी ने दोनों सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। विशेश्वरगंज थानाध्यक्ष जयहरि मिश्र ने बताया कि डीआईजी के निर्देश पर थाने में तैनात सिपाही शत्रुहन प्रियदर्शी व संजय कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
ऐसे में अब सवाल उठता है कि इतना बड़ा मामला विशेश्वरगंज थानाध्यक्ष के संज्ञान में क्यों नहीं आया। डीआईजी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार सिपाहियों ने थाने पर युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखा, तो क्या थाने में कोई ऐसा सिपाही, दरोगा और दीवान नहीं रहा। जो थानाध्यक्ष को यह भी बता सके कि युवक को हिरासत में रखा गया है। क्या थानेदार की यह जिम्मेदारी नहीं कि थाने पर हिरासत में आने वाले लोगों की जानकारी रखें। ऐसे कई सवाल हैं, जो थानाध्यक्ष के लापरवाह होने की ओर संकेत दे रहे है। ऐसे लापरवाह थानाध्यक्ष पर कार्रवाई न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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नियम विपरीत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
विशेश्वरगंज थाने का प्रकरण संज्ञान में आया है। दो सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच की जाएगी। जांच में अगर कोई और दोषी पाया जाएगा तो निश्चित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नियम के विपरीत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वह कोई भी हो। -केशव चौधरी, एसपी बहराइच
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देवीपाटन मंडल के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने बताया कि रणवरिया गांव निवासी तंजीर ने शिकायत की थी कि विश्वेश्वरगंज थाने में तैनात दो सिपाहियों ने उसे हिरासत से छोड़ने के बदले पैसे की मांग की। एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार को जांच सौंपी गई थी। जांच में सिपाही शत्रुहन प्रियदर्शी व संजय कुमार यादव दोषी पाए गए। एएसपी ग्रामीण की रिपोर्ट मिलने के बाद डीआईजी ने दोनों सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। विशेश्वरगंज थानाध्यक्ष जयहरि मिश्र ने बताया कि डीआईजी के निर्देश पर थाने में तैनात सिपाही शत्रुहन प्रियदर्शी व संजय कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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ऐसे में अब सवाल उठता है कि इतना बड़ा मामला विशेश्वरगंज थानाध्यक्ष के संज्ञान में क्यों नहीं आया। डीआईजी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार सिपाहियों ने थाने पर युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखा, तो क्या थाने में कोई ऐसा सिपाही, दरोगा और दीवान नहीं रहा। जो थानाध्यक्ष को यह भी बता सके कि युवक को हिरासत में रखा गया है। क्या थानेदार की यह जिम्मेदारी नहीं कि थाने पर हिरासत में आने वाले लोगों की जानकारी रखें। ऐसे कई सवाल हैं, जो थानाध्यक्ष के लापरवाह होने की ओर संकेत दे रहे है। ऐसे लापरवाह थानाध्यक्ष पर कार्रवाई न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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नियम विपरीत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
विशेश्वरगंज थाने का प्रकरण संज्ञान में आया है। दो सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच की जाएगी। जांच में अगर कोई और दोषी पाया जाएगा तो निश्चित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नियम के विपरीत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वह कोई भी हो। -केशव चौधरी, एसपी बहराइच