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Bahraich News: आंधी-पानी में मकान पर गिरा पेड़, मां-बेटा घायल
Mon, 06 Apr 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 06 Apr 2026 12:36 AM IST
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महसी के रमपुरवा में आंधी में पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त मकान। -संवाद
बहराइच/महसी। जिले में शनिवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई। खेतों में कटी पड़ी सरसों और गेहूं की फसलें उड़ गईं, जबकि खड़ी फसल भीगकर खराब हो गई। कई इलाकों में फसलों के 30 फीसदी से अधिक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। महसी क्षेत्र में एक मकान पर पेड़ गिरने से मां-बेटा घायल हो गए और एक मवेशी की मौत हो गई। महसी, चित्तौरा, कैसरगंज, नानपारा और मिहींपुरवा समेत कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
तहसील महसी के रमपुरवा गांव में तेज आंधी के दौरान पीपल का एक विशाल पेड़ मकान पर गिर पड़ा। हादसे के समय घर के अंदर सो रहीं सुशीला पाठक (51) और उनका 12 वर्षीय बेटा शिवम पाठक मलबे में दबकर घायल हो गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल भेजा। लेखपाल रमेश तिवारी ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन किया।
इसी तरह रेहुवा मंसूर के सरजूपुरवा गांव में गूलर का पेड़ गिरने से उसके नीचे बंधे मवेशी की मौके पर ही मौत हो गई। लेखपाल शिवप्रकाश पांडे ने नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है।
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आंधी-बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। धरसवा, फखरपुर और आसपास के क्षेत्रों में गेहूं की कटी फसल खेतों में बिखर गई और भीगने से खराब होने लगी। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई। कई किसानों ने बताया कि अब दाना काला पड़ने और पैदावार घटने का खतरा है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ेगा।
फखरपुर क्षेत्र में हालात और खराब दिखे, जहां खेतों में गेहूं के पूले बिखरे पड़े मिले। किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। वहीं अचानक बदले मौसम से किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं और फसल बचाने के लिए जूझ रहे हैं।
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सर्वे करने के दिए निर्देश
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि शनिवार को अचानक बिगड़े मौसम से किसानों को होने वाले नुकसान के मामले में तहसील प्रशासन को सर्वे करवाने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद उसी के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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गेहूं की फसल को अच्छी तरह सुखाएं
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसबी सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि कटी हुई फसल को तुरंत इकट्ठा कर सुरक्षित स्थान पर रखें या तिरपाल से ढक दें, ताकि और नुकसान न हो। भीगी हुई गेहूं की फसल को धूप निकलते ही फैलाकर अच्छी तरह सुखाएं, ताकि दाना काला न पड़े। गिरी हुई फसल को जल्द कटवाकर सुरक्षित भंडारण करें, देरी करने पर नुकसान बढ़ सकता है। जिन खेतों में गन्ना या अन्य फसल बोई गई है, वहां जलभराव न होने दें, इससे जमाव प्रभावित होता है। मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें और कटाई या मड़ाई का काम मौसम साफ होने पर ही करें।
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300 गांवों में रहा बिजली का संकट
फखरपुर प्रतिनिधिक के अनुसार आंधी के कारण कस्बे व आसपास के 38 गांवों की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। रविवार सुबह आठ बजे के आसपास आपूर्ति बहाल हो सकी। बिजली कर्मियों के अनुसार 33 केवी लाइन में खराबी आने से आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसे ठीक कर बहाल कर दिया गया।
महसी प्रतिनिधि ने बताया कि तहसील के 112 गांवों की बिजली आपूर्ति रात से ठप है। एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। सधुवापुर निवासी ललित, आशीष और संजय कुमार ने जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
बाबागंज प्रतिनिधि के अनुसार 50 से अधिक गांवों में अंधेरा है। रविवार देर शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे करीब 50 हजार की आबादी परेशान है। पानी की किल्लत के चलते लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विशेश्वरगंज में आंधी के कारण बिजली की लाइनों पर पेड़ों की डालियां गिरने से पूरी रात सप्लाई बाधित रही। वहीं हुजूरपुर क्षेत्र के 36 गांवों में रविवार देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे लोग पानी और मोबाइल चार्जिंग के लिए परेशान दिखे।
चित्तौरा प्रतिनिधि के अनुसार बहादुरचक फीडर से जुड़े कई गांवों में शनिवार को रात भर बिजली बाधित रही। नगरौर गांव में एचटी लाइन का तार टूटने से सप्लाई रुकी थी, जिसे रविवार सुबह ठीक कर बहाल किया गया।
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तहसील महसी के रमपुरवा गांव में तेज आंधी के दौरान पीपल का एक विशाल पेड़ मकान पर गिर पड़ा। हादसे के समय घर के अंदर सो रहीं सुशीला पाठक (51) और उनका 12 वर्षीय बेटा शिवम पाठक मलबे में दबकर घायल हो गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल भेजा। लेखपाल रमेश तिवारी ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन किया।
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इसी तरह रेहुवा मंसूर के सरजूपुरवा गांव में गूलर का पेड़ गिरने से उसके नीचे बंधे मवेशी की मौके पर ही मौत हो गई। लेखपाल शिवप्रकाश पांडे ने नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है।
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आंधी-बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। धरसवा, फखरपुर और आसपास के क्षेत्रों में गेहूं की कटी फसल खेतों में बिखर गई और भीगने से खराब होने लगी। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई। कई किसानों ने बताया कि अब दाना काला पड़ने और पैदावार घटने का खतरा है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ेगा।
फखरपुर क्षेत्र में हालात और खराब दिखे, जहां खेतों में गेहूं के पूले बिखरे पड़े मिले। किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। वहीं अचानक बदले मौसम से किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं और फसल बचाने के लिए जूझ रहे हैं।
सर्वे करने के दिए निर्देश
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि शनिवार को अचानक बिगड़े मौसम से किसानों को होने वाले नुकसान के मामले में तहसील प्रशासन को सर्वे करवाने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद उसी के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
गेहूं की फसल को अच्छी तरह सुखाएं
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसबी सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि कटी हुई फसल को तुरंत इकट्ठा कर सुरक्षित स्थान पर रखें या तिरपाल से ढक दें, ताकि और नुकसान न हो। भीगी हुई गेहूं की फसल को धूप निकलते ही फैलाकर अच्छी तरह सुखाएं, ताकि दाना काला न पड़े। गिरी हुई फसल को जल्द कटवाकर सुरक्षित भंडारण करें, देरी करने पर नुकसान बढ़ सकता है। जिन खेतों में गन्ना या अन्य फसल बोई गई है, वहां जलभराव न होने दें, इससे जमाव प्रभावित होता है। मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें और कटाई या मड़ाई का काम मौसम साफ होने पर ही करें।
300 गांवों में रहा बिजली का संकट
फखरपुर प्रतिनिधिक के अनुसार आंधी के कारण कस्बे व आसपास के 38 गांवों की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। रविवार सुबह आठ बजे के आसपास आपूर्ति बहाल हो सकी। बिजली कर्मियों के अनुसार 33 केवी लाइन में खराबी आने से आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसे ठीक कर बहाल कर दिया गया।
महसी प्रतिनिधि ने बताया कि तहसील के 112 गांवों की बिजली आपूर्ति रात से ठप है। एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। सधुवापुर निवासी ललित, आशीष और संजय कुमार ने जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
बाबागंज प्रतिनिधि के अनुसार 50 से अधिक गांवों में अंधेरा है। रविवार देर शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे करीब 50 हजार की आबादी परेशान है। पानी की किल्लत के चलते लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विशेश्वरगंज में आंधी के कारण बिजली की लाइनों पर पेड़ों की डालियां गिरने से पूरी रात सप्लाई बाधित रही। वहीं हुजूरपुर क्षेत्र के 36 गांवों में रविवार देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे लोग पानी और मोबाइल चार्जिंग के लिए परेशान दिखे।
चित्तौरा प्रतिनिधि के अनुसार बहादुरचक फीडर से जुड़े कई गांवों में शनिवार को रात भर बिजली बाधित रही। नगरौर गांव में एचटी लाइन का तार टूटने से सप्लाई रुकी थी, जिसे रविवार सुबह ठीक कर बहाल किया गया।