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Bahraich News: मेडिकल कॉलेज में इलाज के इंतजार में दो घंटे धूप में बैठी रही प्रसूता, चली गई जान
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मेडिकल कालेज परिसर में महिला की मौत के बाद जमा लोग।
- फोटो : मेडिकल कालेज परिसर में महिला की मौत के बाद जमा लोग।
बहराइच। राजकीय मेडिकल कॉलेज की महिला विंग में बृहस्पतिवार को इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बीमार भाभी को भर्ती कराने के लिए ननद करीब दो घंटे तक अस्पताल में भटकती रही, लेकिन इलाज शुरू नहीं हो सका। प्रसूता ने धूप में बैठे-बैठे दम तोड़ दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
फखरपुर के गेंदौरा गांव निवासी मनोज सिंह की पत्नी नीतू सिंह (35) को 13 दिन पहले बेटी हुई थी। प्रसव के बाद से ही नीतू की तबीयत खराब चल रही थी। बृहस्पतिवार सुबह ननद मंजू इलाज के लिए उन्हें लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज की महिला विंग पहुंचीं। मंजू ने बताया कि कमरा नंबर 105 में तैनात डॉ. मेघा ने जांच के बाद दवा लिखी और भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद मंजू भर्ती प्रक्रिया के लिए काउंटर पर गईं और भाभी को बाहर धूप में बैठा दिया।
मंजू के मुताबिक, काउंटर पर कर्मचारियों ने पहले बेड न होने का हवाला दिया, फिर उन्हें एक से दूसरी जगह भेजते रहे। करीब दो घंटे तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। आखिर में कर्मचारियों ने कहा इमरजेंसी में ले जाइए, वहीं भर्ती होगी, लेकिन जब मंजू लौटकर आई, तो देखा कि भाभी की सांसें थम चुकी थीं।
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समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान...
मंजू सिंह ने कहा कि अगर समय पर भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया होता, तो भाभी की जान बच सकती थी। घटना के बाद महिला विंग में अफरातफरी मच गई। परिजन रो-रोकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
जांच का आदेश, होगी सख्त कार्रवाई
मामले की जांच का आदेश दिया गया है। जिस किसी की भी लापरवाही सामने आएगी उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मृतका के परिजनों से बात कर उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। परिजन शव लेकर गांव लौट गए हैं।
- डॉ. एमएम त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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फखरपुर के गेंदौरा गांव निवासी मनोज सिंह की पत्नी नीतू सिंह (35) को 13 दिन पहले बेटी हुई थी। प्रसव के बाद से ही नीतू की तबीयत खराब चल रही थी। बृहस्पतिवार सुबह ननद मंजू इलाज के लिए उन्हें लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज की महिला विंग पहुंचीं। मंजू ने बताया कि कमरा नंबर 105 में तैनात डॉ. मेघा ने जांच के बाद दवा लिखी और भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद मंजू भर्ती प्रक्रिया के लिए काउंटर पर गईं और भाभी को बाहर धूप में बैठा दिया।
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मंजू के मुताबिक, काउंटर पर कर्मचारियों ने पहले बेड न होने का हवाला दिया, फिर उन्हें एक से दूसरी जगह भेजते रहे। करीब दो घंटे तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। आखिर में कर्मचारियों ने कहा इमरजेंसी में ले जाइए, वहीं भर्ती होगी, लेकिन जब मंजू लौटकर आई, तो देखा कि भाभी की सांसें थम चुकी थीं।
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समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान...
मंजू सिंह ने कहा कि अगर समय पर भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया होता, तो भाभी की जान बच सकती थी। घटना के बाद महिला विंग में अफरातफरी मच गई। परिजन रो-रोकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
जांच का आदेश, होगी सख्त कार्रवाई
मामले की जांच का आदेश दिया गया है। जिस किसी की भी लापरवाही सामने आएगी उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मृतका के परिजनों से बात कर उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। परिजन शव लेकर गांव लौट गए हैं।
- डॉ. एमएम त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक