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बहराइच पुलिस लाइन में सड़ रहे सैकड़ों नर कंकाल
Bahraich
Updated Sat, 31 Jan 2015 05:30 AM IST
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बहराइच। उन्नाव में तो महज 104 नर कंकाल मिले हैं लेकिन पुलिस लाइन बहराइच के एक कमरे में नर कंकालों का जखीरा भरा पड़ा है। वर्षों पुराने ये नर कंकाल सड़ रहे हैं। पुलिस महकमा इसे विसरा बता रहा है लेकिन इनकी हालत देखकर लगता है कि इनका पुरसाहाल नहीं है। सुरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। पुलिस महकमे के अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 1950 से अब तक के लगभग 5380 मौतों के राज इस कमरे में दफन हैं।
बहराइच के पुलिस लाइन में एक कमरा ऐसा है, जहां पर वर्षों पुराने नर कंकाल सड़ रहे हैं। मानव अस्थियां बोरे और कपड़े में बंधी पड़ी हैं। विसरा के सैकड़ों डिब्बे भी अस्त-व्यस्त पड़े हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर महकमा कितना संजीदा है, वह इस कमरे का ही देख कर लगाया जा सकता है। दरवाजे की सिटकनी टूटी हुई है और खिड़कियां नदारद हैं। कभी कुत्ते तो कभी अन्य जानवर घुसकर मानव अवशेषों को तितर-बितर कर रहे हैं। पुलिस महकमे के जिम्मेदार इसे काफी पुराना विसरा बता रहे हैं लेकिन इन्हें निस्तारित करने की जहमत न तो अफसरों ने उठाई न कर्मचारियों ने।
कमरे में बंद नर कंकाल और विसरे के हालात जानने के लिए जब पड़ताल की गई तो पता चला कि यहां वर्ष 1950 से अब तक 5793 पोस्टमार्टम ऐसे हुए हैं, जिनका विसरा रखकर महकमे के जिम्मेदार भूल गए। इनमें से सिविल पुलिस के 400 व जीआरपी में 13 केस ऐसे हैं, जिनमें फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद दो चक्रों में विसरा नष्ट करवाया गया। लेकिन, अभी भी 5380 मौतों के राज इन कमरों में दफन हैं जो अब सड़ रहे हैं। गौरतलब है कि हत्या, आत्महत्या, संदिग्ध हालात में मौत या दुर्घटना आदि में दम तोड़ने वाले लोगों के शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है। कुछ लाशों के पोस्टमार्टम में तो चिकित्सक मौके पर ही मौत के कारणों की पुष्टि कर देते हैं लेकिन कई लोगों की मौतें ऐसी होती हैं, जिनमें विशेषज्ञों के परीक्षण की जरूरत होती है। कमरों में भरा विसरा इसी परीक्षण के लिए रखने की बात अधिकारी कह रहे हैं।
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विसरा में रखे जाते हैं ये अवशेष
पुलिस अस्पताल के सूत्रों की मानें तो संबंधित व्यक्ति के मौत के बाद पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के निर्देश के तहत हार्ट, लिवर, ब्रेन, छोटी आंत, गुरदा को विशेष जार में रसायन में मिलाकर रखा जाता है। जबकि दुर्घटना, हत्या या मारपीट की स्थिति में क्षतिग्रस्त अंग की हड्डी को सुरक्षित रखने का प्रावधान है।
कोषागार की तरह होनी चाहिए सुरक्षा
पुलिस अस्पताल में विसरा जिन कमरो में रखा जाता है, उनकी सुरक्षा कोषागार की तरह होनी चाहिए। पूर्णकालिक सुरक्षा कर्मी की तैनाती भी की जानी चाहिए लेकिन पुलिस अस्पताल के ठीक पीछे आवासीय इलाके में बने इस कमरे में तो दरवाजे और खिड़कियां तक टूटी हैं।
पुलिस अस्पताल का मैनुअल
पुलिस अस्पताल के मैनुअल के मुताबिक छह माह से एक साल में विसरा की जांच कराकर उसे नष्ट करवा देना चाहिए। इसके लिए संबंधित थाना क्षेत्र के थानाध्यक्ष को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय पर प्रार्थना पत्र देकर विसरा नष्ट कराने की अर्जी देनी चाहिए।
मात्र 413 विसरा हुए नष्ट
वर्ष 2000 में न्यायालय के आदेश पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र के 400 व वर्ष 2012 में जीआरपी परिक्षेत्र के 13 विसरों को नष्ट करवाया गया। लेकिन, 1950 से रखे विसरों पर संबंधित थानाध्यक्षों की नजर नहीं गई।
हम तो विसरा नष्ट करा देते हैं
पुलिस अधीक्षक आरएल वर्मा कहते हैं कि विसरा की परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद पुलिस महकमा उन्हें नष्ट कराता है। पुराने विसरे क्यों रखे हुए हैं, इसकी जांच करवाएंगे। लेकिन विसरा में खोपड़ी, कंकाल और हड्डियां नहीं आती हैं। इसके जिम्मेदार सीएमओ हैं कि पोस्टमार्टम के बाद उन्होंने मानव अस्थियों को क्यों रखवाया।
नहीं है जानकारी, करवाएंगे जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कुलभूषण जैन ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है। वैसे विशेष परिस्थितियों में अस्थियां रखी जाती है। उन्हें न्यायालय के आदेश पर ही निस्तारित किया जा सकता है। जांच करवाएंगे। उच्चाधिकारियों से संपर्क साधकर कार्रवाई की जाएगी।
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बहराइच के पुलिस लाइन में एक कमरा ऐसा है, जहां पर वर्षों पुराने नर कंकाल सड़ रहे हैं। मानव अस्थियां बोरे और कपड़े में बंधी पड़ी हैं। विसरा के सैकड़ों डिब्बे भी अस्त-व्यस्त पड़े हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर महकमा कितना संजीदा है, वह इस कमरे का ही देख कर लगाया जा सकता है। दरवाजे की सिटकनी टूटी हुई है और खिड़कियां नदारद हैं। कभी कुत्ते तो कभी अन्य जानवर घुसकर मानव अवशेषों को तितर-बितर कर रहे हैं। पुलिस महकमे के जिम्मेदार इसे काफी पुराना विसरा बता रहे हैं लेकिन इन्हें निस्तारित करने की जहमत न तो अफसरों ने उठाई न कर्मचारियों ने।
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कमरे में बंद नर कंकाल और विसरे के हालात जानने के लिए जब पड़ताल की गई तो पता चला कि यहां वर्ष 1950 से अब तक 5793 पोस्टमार्टम ऐसे हुए हैं, जिनका विसरा रखकर महकमे के जिम्मेदार भूल गए। इनमें से सिविल पुलिस के 400 व जीआरपी में 13 केस ऐसे हैं, जिनमें फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद दो चक्रों में विसरा नष्ट करवाया गया। लेकिन, अभी भी 5380 मौतों के राज इन कमरों में दफन हैं जो अब सड़ रहे हैं। गौरतलब है कि हत्या, आत्महत्या, संदिग्ध हालात में मौत या दुर्घटना आदि में दम तोड़ने वाले लोगों के शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है। कुछ लाशों के पोस्टमार्टम में तो चिकित्सक मौके पर ही मौत के कारणों की पुष्टि कर देते हैं लेकिन कई लोगों की मौतें ऐसी होती हैं, जिनमें विशेषज्ञों के परीक्षण की जरूरत होती है। कमरों में भरा विसरा इसी परीक्षण के लिए रखने की बात अधिकारी कह रहे हैं।
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विसरा में रखे जाते हैं ये अवशेष
पुलिस अस्पताल के सूत्रों की मानें तो संबंधित व्यक्ति के मौत के बाद पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के निर्देश के तहत हार्ट, लिवर, ब्रेन, छोटी आंत, गुरदा को विशेष जार में रसायन में मिलाकर रखा जाता है। जबकि दुर्घटना, हत्या या मारपीट की स्थिति में क्षतिग्रस्त अंग की हड्डी को सुरक्षित रखने का प्रावधान है।
कोषागार की तरह होनी चाहिए सुरक्षा
पुलिस अस्पताल में विसरा जिन कमरो में रखा जाता है, उनकी सुरक्षा कोषागार की तरह होनी चाहिए। पूर्णकालिक सुरक्षा कर्मी की तैनाती भी की जानी चाहिए लेकिन पुलिस अस्पताल के ठीक पीछे आवासीय इलाके में बने इस कमरे में तो दरवाजे और खिड़कियां तक टूटी हैं।
पुलिस अस्पताल का मैनुअल
पुलिस अस्पताल के मैनुअल के मुताबिक छह माह से एक साल में विसरा की जांच कराकर उसे नष्ट करवा देना चाहिए। इसके लिए संबंधित थाना क्षेत्र के थानाध्यक्ष को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय पर प्रार्थना पत्र देकर विसरा नष्ट कराने की अर्जी देनी चाहिए।
मात्र 413 विसरा हुए नष्ट
वर्ष 2000 में न्यायालय के आदेश पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र के 400 व वर्ष 2012 में जीआरपी परिक्षेत्र के 13 विसरों को नष्ट करवाया गया। लेकिन, 1950 से रखे विसरों पर संबंधित थानाध्यक्षों की नजर नहीं गई।
हम तो विसरा नष्ट करा देते हैं
पुलिस अधीक्षक आरएल वर्मा कहते हैं कि विसरा की परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद पुलिस महकमा उन्हें नष्ट कराता है। पुराने विसरे क्यों रखे हुए हैं, इसकी जांच करवाएंगे। लेकिन विसरा में खोपड़ी, कंकाल और हड्डियां नहीं आती हैं। इसके जिम्मेदार सीएमओ हैं कि पोस्टमार्टम के बाद उन्होंने मानव अस्थियों को क्यों रखवाया।
नहीं है जानकारी, करवाएंगे जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कुलभूषण जैन ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है। वैसे विशेष परिस्थितियों में अस्थियां रखी जाती है। उन्हें न्यायालय के आदेश पर ही निस्तारित किया जा सकता है। जांच करवाएंगे। उच्चाधिकारियों से संपर्क साधकर कार्रवाई की जाएगी।