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डेंगू से दो और ने तोड़ा दम
Bahraich
Updated Fri, 11 Oct 2013 05:38 AM IST
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बहराइच। तराई में डेंगू जानलेवा बना हुआ है। डेंगू पीड़ित दो रोगियों की जिला अस्पताल से लखनऊ ले जाते समय मौत हो गई, जबकि गुरुवार को पांच रोगी और भर्ती हुए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दो की हालत बेहद नाजुक
बनी हुई।
बौंडी थाना अंतर्गत घुरेहरी गांव निवासी अल्ताफ (5) को बुखार की शिकायत पर मंगलवार को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। यहां ब्लड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। प्लेटलेट्स 26 हजार के आस-पास थे। डॉक्टरों ने अल्ताफ को डेंगू वार्ड में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया, लेकिन बुधवार दोपहर अल्ताफ की हालत अचानक बिगड़ गई। यह देख डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया। परिवारीजन अल्ताफ को लेकर लखनऊ रवाना हुए, लेकिन रास्ते में जरवलरोड के पास उसकी मौत हो गई। इसी तरह श्रावस्ती के जमुनहा बाजार निवासी निसार (22) को जिला अस्पताल से केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया था। निसार की हालत बेहद नाजुक थी। लखनऊ ले जाते समय निसार ने रास्ते में दम तोड़ दिया। परिवारीजन शव लेकर वापस घर लौट गए हैं। उधर, गुरुवार को डेंगू पीड़ित पांच और रोगी जिला अस्पताल में भर्ती करवाए गए हैं। इनमें नगर कोतवाली अंतर्गत कानूनगोपुरा निवासी रविकांत मिश्रा, बशीरगंज मोहल्ला निवासी अतीक (30), पयागपुर थाना अंतर्गत पंडितपुरवा गांव निवासी विद्याकांत, परसिया गांव निवासी देवी प्रसाद (45) एवं पुलिस लाइंस निवासी रवींद्र पांडेय (52) शामिल हैं। सभी रोगियों में डेंगू की पुष्टि ब्लड टेस्ट से हुई है। सभी को डेंगू वार्ड में शिफ्ट किया गया है। डेंगू पीड़ितों का इलाज वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरबी सिंह व डॉ. आरएस बर्नवाल की देख-रेख में किया जा रहा है। तराई में बढ़ रहे डेंगू के मामलों से लोगों में दहशत व्याप्त है।
गंभीर हालत में पहुंचे थे रोगी
सीएमएस डॉ. महेश्वरी पांडेय ने बताया कि शनी व अल्ताफ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था, जिससे उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर किया था। लखनऊ ले जाते समय रोगियों की रास्ते में मौत की सूचना मिली है।
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डॉक्टर की सलाह
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा कहते हैं कि मौसम परिवर्तन के चलते बुखार व डेंगू का प्रकोप तराई में बढ़ा है। ऐसे में खान-पान पर विशेष ध्यान, साफ-सफाई व रात को सोते समय मच्छरदानी के प्रयोग से काफी हद तक रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुखार के लक्षण दिखने पर तत्काल किसी कुशल डॉक्टर से परामर्श लें, ताकि समय पर इलाज हो सके।
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बनी हुई।
बौंडी थाना अंतर्गत घुरेहरी गांव निवासी अल्ताफ (5) को बुखार की शिकायत पर मंगलवार को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। यहां ब्लड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। प्लेटलेट्स 26 हजार के आस-पास थे। डॉक्टरों ने अल्ताफ को डेंगू वार्ड में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया, लेकिन बुधवार दोपहर अल्ताफ की हालत अचानक बिगड़ गई। यह देख डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया। परिवारीजन अल्ताफ को लेकर लखनऊ रवाना हुए, लेकिन रास्ते में जरवलरोड के पास उसकी मौत हो गई। इसी तरह श्रावस्ती के जमुनहा बाजार निवासी निसार (22) को जिला अस्पताल से केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया था। निसार की हालत बेहद नाजुक थी। लखनऊ ले जाते समय निसार ने रास्ते में दम तोड़ दिया। परिवारीजन शव लेकर वापस घर लौट गए हैं। उधर, गुरुवार को डेंगू पीड़ित पांच और रोगी जिला अस्पताल में भर्ती करवाए गए हैं। इनमें नगर कोतवाली अंतर्गत कानूनगोपुरा निवासी रविकांत मिश्रा, बशीरगंज मोहल्ला निवासी अतीक (30), पयागपुर थाना अंतर्गत पंडितपुरवा गांव निवासी विद्याकांत, परसिया गांव निवासी देवी प्रसाद (45) एवं पुलिस लाइंस निवासी रवींद्र पांडेय (52) शामिल हैं। सभी रोगियों में डेंगू की पुष्टि ब्लड टेस्ट से हुई है। सभी को डेंगू वार्ड में शिफ्ट किया गया है। डेंगू पीड़ितों का इलाज वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरबी सिंह व डॉ. आरएस बर्नवाल की देख-रेख में किया जा रहा है। तराई में बढ़ रहे डेंगू के मामलों से लोगों में दहशत व्याप्त है।
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गंभीर हालत में पहुंचे थे रोगी
सीएमएस डॉ. महेश्वरी पांडेय ने बताया कि शनी व अल्ताफ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था, जिससे उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर किया था। लखनऊ ले जाते समय रोगियों की रास्ते में मौत की सूचना मिली है।
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डॉक्टर की सलाह
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा कहते हैं कि मौसम परिवर्तन के चलते बुखार व डेंगू का प्रकोप तराई में बढ़ा है। ऐसे में खान-पान पर विशेष ध्यान, साफ-सफाई व रात को सोते समय मच्छरदानी के प्रयोग से काफी हद तक रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुखार के लक्षण दिखने पर तत्काल किसी कुशल डॉक्टर से परामर्श लें, ताकि समय पर इलाज हो सके।