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तराई में अब कुष्ठ रोग का साया
Bahraich
Updated Thu, 10 Oct 2013 05:38 AM IST
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बहराइच। तराई में अब कुष्ठ रोग का साया गहराता जा रहा है। एक महीने में 143 कुष्ठ रोगी सामने आए हैं। साल दर साल यह स्थिति और भी भयावह होती जा रही है। वर्ष 2013, सितंबर तक 721 कुष्ठ रोगी मिले हैं। यह खुलासा हुआ राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम के तहत मिले आंकड़ों में। बावजूद इसके विभाग की मानें तो लोगों में जागरूकता बढ़ी है और रोगियों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही है।
बहराइच के 14 विकासखंडों में पौने 35 लाख की आबादी निवास करती है। इनमें 18 लाख, 40 हजार के आसपास पुरुष व 16 लाख, 39 हजार के आसपास महिलाएं शामिल हैं। कुष्ठ रोग विभाग की मानें तो एक लाख की आबादी पर एक रोगी मिले तो स्थिति नियंत्रण में समझी जाती है, लेकिन राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 35 लाख की आबादी पर तीन सालों में तीन हजार, दो सौ एक मरीज कुष्ठ रोग के मरीज हैं। आलम यह है कि जिले के 14 विकासखंडों में फरवरी से चल रहे स्पेशल एक्टिविटी प्रोग्राम के तहत विभाग को सितंबर में 143 मरीज मिले हैं, जिनमें 40 महिलाएं व 19 बच्चे भी शामिल हैं। इसी के साथ वर्ष 2013-14 में इनकी संख्या 721 हो गई है। इसमें 30 फीसदी महिलाएं हैं। यह आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि तराई में कुष्ठ रोग पर स्वास्थ्य महकमे का अभियान कारगर साबित नहीं हो रहा है।
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बहराइच के 14 विकासखंडों में पौने 35 लाख की आबादी निवास करती है। इनमें 18 लाख, 40 हजार के आसपास पुरुष व 16 लाख, 39 हजार के आसपास महिलाएं शामिल हैं। कुष्ठ रोग विभाग की मानें तो एक लाख की आबादी पर एक रोगी मिले तो स्थिति नियंत्रण में समझी जाती है, लेकिन राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 35 लाख की आबादी पर तीन सालों में तीन हजार, दो सौ एक मरीज कुष्ठ रोग के मरीज हैं। आलम यह है कि जिले के 14 विकासखंडों में फरवरी से चल रहे स्पेशल एक्टिविटी प्रोग्राम के तहत विभाग को सितंबर में 143 मरीज मिले हैं, जिनमें 40 महिलाएं व 19 बच्चे भी शामिल हैं। इसी के साथ वर्ष 2013-14 में इनकी संख्या 721 हो गई है। इसमें 30 फीसदी महिलाएं हैं। यह आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि तराई में कुष्ठ रोग पर स्वास्थ्य महकमे का अभियान कारगर साबित नहीं हो रहा है।
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