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हर महीने पांच लोग एचआईवी पॉजिटिव

Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
Bahraich
Bahraich Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
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बहराइच। पेट की आग को शांत करने के लिए घर से निकले थे लेकिन बड़े शहर की चकाचौंध व बेरोजगारी के तनाव ने इस कदर घेरा कि अनजाने ही एचआईवी से संक्रमित हो गए। परदेश से कमाकर लौट रहे अधिकांश लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। जिला अस्पताल की जांच में इसका खुलासा हुआ है। कुछ संक्रमित लोगों में ऐसे हैं, जो नियमित नशे के आदी हैं। गांव ही नहीं, शहर के लोग भी इस संक्रमण से अछूते नहीं हैं। औसतन प्रतिमाह जिले में एचआईवी संक्रमित पांच लोग मिल रहे हैं। इससे स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी भी हतप्रभ हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद जिले में एचआईवी पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जागरूकता और साक्षरता के अभाव में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। दूसरे प्रदेश में नौकरी कर वापस लौटने वालों में एचआईवी का संक्रमण बड़े पैमाने पर हो रहा है। वहीं, नशे की लत भी युवाओं पर भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल के सीएमस डॉ. केराम बताते हैं कि अब तक प्रतिमाह कम से कम 300 लोगों की जांच की जा रही है। जिनमें से औसतन पांच लोग संक्रमित मिल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो जिले से बाहर बड़े शहरों में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रग्स यूजर्स के अलावा मजदूर, पन्नी चुनने वाले, रिक्शा चालकों की संख्या सर्वाधिक है।
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अप्रैल व मई में मिले सबसे ज्यादा केस
जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष इस वर्ष अप्रैल व मई में एचआईवी संक्रमित व्यक्ति ज्यादा मिले हैं। अप्रैल माह में 400 लोगों की जांच हुई इसमें से 10 केस एचआईवी पॉजिटिव मिले, जबकि मई में संदिग्ध 329 लोगों की जांच हुई, जिसमें 11 लोग संक्रमित मिले। इस पर पैथोलॉजी विभाग के प्रभारी डॉ. हीरालाल बताते हैं कि तराई क्षेत्र में बेरोजगारी की वजह से ज्यादातर युवा गैर प्रांतों में जाकर नौकरी करते हैं। वहां वह अनजाने में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर शिकार हो जाते हैं। अप्रैल व मई माह में ज्यादातर लोग अपने घरों को वापस हुए। जब इनकी जांच हुई तो संक्रमण का पता चला।
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जिला अस्पताल में होती है जांच
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. हीरालाल बताते हैं कि श्रावस्ती व बहराइच के संदिग्ध एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जांच अस्पताल के आईसीटीसी सेंटर में की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रतिमाह सेंटर पर औसतन तीन सौ व्यक्ति जांच के लिए आते हैं। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संक्रमित व्यक्ति को नोडल ऑफिस डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ भेज दिया जाता है। वहां उसका इलाज किया जाता है। संक्रमित व्यक्ति का नाम और पता गोपनीय रखा जाता है।

मानसिक तनाव ढकेल देता गलत रास्ते पर
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. एके विश्वकर्मा बताते हैं कि शौक के साथ नशे की लत का कारण मानसिक तनाव, साथ उठने बैठने वालों का दबाव व बेरोजगारी से उत्पन्न तनाव से मनुष्य अवसाद में चला जाता है। इससे उबरने के लिए जो रास्ते युवक अख्तियार करते हैं, वह उन्हें जाने अनजाने एचआईवी संक्रमण का शिकार बनाता है।
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